दुर्ग। शौर्यपथ । दुर्ग निगम सालो से नुकसान में है निगम की अभी तक अपना कोई भवन नही है , बिजली बिल का लाखो का भुगतान बचा है । अभी तक 20 सालो से भाजपा का निगम में कब्ज़ा था और विपक्ष कांग्रेस द्वारा लगातार आरोप लगते रहे किन्तु विगत 6 माह से कांग्रेस की सरकार है किंतु सरकार बदलने के बाद भी अधिकारियों के काम करने की प्रणाली में कोई परिवर्तन नही आया । निगम के ज़िम्मेदार अधिकारी वर्तमान में भी ऐसे कई संसाधन की खरीददारी कर लेते है जिसका कोई उपयोग नही होता और रखे रखे ही ये लाखो के संसाधन खराब हो जाते है । ऐसा ही मामला हाल ही के महीने का है जिसमे निगम दुर्ग द्वारा लगभग 70 लाख की दो वैक्यूम मशीन मंगाई गई ताकि सड़क की धूल हटाई जा सके । महीने 15 दिन खूब चली उसके बाद 70 लाख की मशीन महीनों से बन्द है । एक बार फिर निगम प्रशासन ने 70 लाख की बर्बादी कर दी । बर्बादी इसलिए कह सकते है क्योंकि विगत 4 माह से गाड़ी अपनी जगह से हिली भी नही किन्तु कंपनी को वाहन का पूरा भुगतान हो गया ।
अधिकारियों में है दूरदर्शी की कमी या चल रहा कमीशन का खेल ..? दुर्ग निगम में पहले भी वैक्यूम मशीन असफल हुआ था बावजूद इसके निगम प्रशासन के अधिकारियों द्वारा आचार संहिता के दौरान वैक्यूम व्हीकल लाने के लिए जो कदम उठाया गया वह कई तरह के संदेहों को जन्म देता है । आखिर ऐसी क्या ज़रूरत आ पड़ी थी कि आनन फानन में 70 लाख की मशीन मगम ली गई जो आज महीनों से खड़ी है । वही चर्चा है कि इस खरीददारी में निगम के किसी अधिकारी का अपने रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई । चर्चा यह भी है कि जिस कम्पनी से वैक्यूम लिया गया उस कम्पनी में निगम के किसी अधिकारी का रिश्तेदार कार्य करता है और अपरोक्ष रूप से फायदा पहुंचाने के लिए ये सौदा किया गया जो कि जांच का विषय है ।
महापौर व आयुक्त लेंगे मामले को संज्ञान या फ़ाइल दब जाएगी अंधेरी कोठरी में ? दुर्ग निगम के नवनियुक्त महापौर बाकलीवाल जिस तरह से शहर की व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ फिजुलखर्जी पर रोक लगाने व निगम की आय बढ़ाने का प्रयास कर रहे है दुर्ग की जनता को उम्मीद है कि मामले को संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जांच की अनुशसा करेंगे और ये जानने का प्रयास करेंगे कि आखिर ऐसी क्या उपयोगिता आ पड़ी जो वैक्यूम मशीन की खरीददारी की गई ?