नई दिल्ली । शौर्यपथ । जैसा कि सभी को मालूम है कि रूस और यूक्रेन के युद्ध में भारतीय छात्र हजारों की संख्या में यूक्रेन में फंसे हुए हैं जिन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन गंगा चला रखा है इस ऑपरेशन के तहत युक्रेन से लगी हुई सीमा के देशों से बच्चों को भारत लाया जा रहा है भारत सरकार ने अपने सरकार के उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह बड़ी जिम्मेदारी दी है किंतु कहते हैं ना कि राजपाट गया किंतु घमंड नहीं गया कुछ ऐसा ही किस्सा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ रोमानिया में हो गया जहां रोमानिया के एक मेयर ने सिंधिया को राजनीति ना कर मुद्दे की बात कर बच्चों को कब और कैसे ले जाना है इस बात पर फटकार लगाई इस बारे में सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें सिंधिया रोमानिया में शरण पाए हुए छात्रों से मोदी सरकार के गुणगान की बात कर रहे होंगे या कुछ ऐसी बात कर रहे होंगे जिसे सुनकर मेयर काफी नाराज हुए वायरल वीडियो में यह कह रहे हैं कि आप मुद्दे की बात पर आइए और बच्चों को यह बताइए कि इन्हें कब और कैसे ले जाए ले जा रहे हैं तब केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने मेयर को या कहा मैं निश्चित करूंगा कि मुझे कब और क्या कहना है इतने से बात पर काफी नाराज होते हुए दिखाएं हैं और केंद्रीय मंत्री सिंधिया को फटकार जैसी तेज आवाज में कह रहे हैं कि यहां पर इन बच्चों को रहने की व्यवस्था खाने की व्यवस्था हम कर रहे हैं आप सिर्फ इन बच्चों को यह बताइए कि इन्हें कब और कैसे ले जाएंगे मेयर की आवाज सुनते ही बच्चों ने ताली बजाया जिस प्रकार के हाव भाव वीडियो में नजर आ रहे हैं उससे ऐसा लगता है मानो केंद्रीय मंत्री सिंधिया यहां पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं ऐसी विकट परिस्थिति में जहां छात्रों के परिजन एक एक पल युगों जैसे काट रहे हैं वही मुद्दे की बात को छोड़कर राजनीति करना कहां तक उचित होगा एक तरफ यूक्रेन रूस व अन्य सीमावर्ती देश भारतीय छात्रों को सम्मान भारत पहुंचाने के लिए अपनी तरफ से भरकर प्रयास कर रहे हैं वह भी बिना राजनीति के वहीं पर भारत के केंद्रीय मंत्री सिंधिया द्वारा किए जा रहे बर्ताव से नाराज होकर रोमानिया के मेयर द्वारा जिस तरह फटकार लगाई गई उससे कहीं ना कहीं भारत की ही छवि धूमिल होती है क्योंकि वर्तमान में केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने निजी यात्रा पर नहीं गए हैं भारत सरकार के प्रतिनिधि बनकर गए हैं और ऐसे समय में उनके हर कार्य को भारत सरकार की सफलता और असफलता के मानकों में देखा जाता है।