दुर्ग / शौर्यपथ / हर नेता चुनाव के समय जनता से कई वादे करता है जिसमे से कुछ ऐसे वादे होते है जो प्रासंगिक होते है जिसे पूरा नहीं किया जा सकता जो सिर्फ वादे ही रह जाते है किन्तु कुछ ऐसे वादे है जिस पर अमल करना जनहित के लिए बहुत ज़रूरी होता है साथ ही जन मानस के हित के लिए उनकी भावनाओं से जुड़ा होता है किन्तु दुर्ग शहर के विधायक अरुण वोरा सिर्फ चुनावी वादे करके जीत हांसिल करते है . चुनाव के पहले विधायक वोरा द्वारा कई वादे किये गए जिसे पूरा करने में विधायक असफल रहे चाहे वह निगम चुनाव हो या फिर विधान सभा चुनाव विधायक वोरा के वादे झूठ का पुलिंदा साबित हो रहे है . निगम चुनाव के समय ठगडा बाँध के निवासियों से मुख्यमंत्री के सामने रोड शो में ये वादा किया गया था कि वहा के निवासियों को नहीं हटाया जाएगा और पट्टा दिया जाएगा किन्तु ये वादे पूरी तरह से फेल हो गए यहाँ तक कि जब यहाँ के निवासियों को हटाया जा रहा था तो विधायक शहर में ही नहीं थे ठगडा बाँध के निवासी वोरा बंगले का चक्कर काटते रहे और इधर कार्यवाही होती रही . ऐसा ही वादा उनके द्वारा निगम के एल्डरमेन के नियुक्ति के लिए किया गया था कि जिस परिवार से कोई भी पार्षद चुनाव लड़ा हो या पार्षद हो उसे एल्डरमैन नियुक्त नहीं किया जाएगा किन्तु यहाँ भी विधायक का वादा झूठा साबित हुआ और राजेश शर्मा को एल्डरमैन बना दिया गया जबकि उनकी माता जी पद्मनाभपुर वार्ड से पार्षद है .
ऐसे ही एक वादा विधायक वोरा द्वारा इंदिरा मार्किट के व्यापारियों से किया गया था कि कांग्रेस कि सरकार बनने के बाद पटेल चौक से ग्रीन चौक तक जाने वाले डिवाईडर को हटा दिया जाएगा किन्तु चुनाव में जीतने और कांग्रेस की सरकार बनने के बाद विधायक वोरा का ये वादा भी झूठा साबित हुआ और आज वर्तमान विधानसभा के साढ़े तीन साल के कार्यकाल बीत जाने के बाद भी डिवाइडर जस का तस है जो इंदिरा मार्केट के व्यापारियों को वो घडी याद दिलाता है कि शहर के विधायक बनने के बाद विधायक ने अपना वादा नहीं निभाया .
आज उसी डिवाइडर के कारण एक माँ की गोद सुनी हो गयी एक ९ माह के मासूम की जान चली गयी . बता दे कि रविवार की दोपहर एक ४०७ वाहन की ठोकर से बाइक सवार परिवार दुर्घटना ग्रस्त हो गया और डिवाईडर से टकरा गया जिसके कारण बाइक में माँ की गोद में बैठा ९ माह का मासूम उचल कर गिर पड़ा और डिवाईडर से टकरा गया जिससे सर पर चोट लगने की वजह से उस मासूम की मौत हो गयी जिसने अभी दुनिया देखि ही नहीं थी . अगर विधायक वोरा अपना वादा निभाते तो आज कम से कम एक मासूम की जान तो बाख जाती एक घर का चिराग बुझने से बच जाता . औलाद के जाने का गम शायद विधायक को नहीं मालुम और इश्वर से यही प्राथना है कि ये घडी किसी के पास भी ना आये किन्तु जिनकी औलाद अपने माँ बाप के कंधो पर जाती है उनसे पूछिए विधायक साहब उन पर क्या गुजरती है . कई वादे है जो राजनीती से जुड़े होते है जिससे किसी को जान माल का नुक्सान नहीं होता किन्तु कुछ वादे ऐसे होते है जिसके पूरा ना होने से किसी की दुनिया उजड़ सकती है जो कि कल एक परिवार के साथ हुआ . एक माँ की गोद सुनी हुई , एक बाप का सपना टूट गया एक घर का चिराग बुझ गया . जगह जगह शहर के विकास की बात करने के बजाये कुछ सार्थक कार्य हुआ होता तो आज एक परिवार की खुशिया गम में नहीं बदलती .