दुर्ग। शौर्यपथ । दुर्ग नगर पालिक निगम के द्वारा बरसात के पहले शहर के नालियों और नालों की सफाई के लिए लाखों रुपए खर्च किए जाते थे बावजूद उसके बरसात के दिनों में शहर की हालत है बदतर ही रहती थी सड़कों पर पानी का जलभराव आम देखने को मिल जाता था किंतु आज से 3 साल पहले तात्कालिक आयुक्त तात्कालिक संयुक्त कलेक्टर इंद्रजीत बर्मन ने निगम के सफाई मित्रों के सहयोग से ही शहर के सभी नालों और नालियों की सफाई निगम के संसाधन के साथ मिलकर बिना राजस्व के नुकसान के कर दिया था 3 साल पहले हुए नालों की सफाई की तारीफ शहर के आम जनता ने खुलकर किया था सफाई व्यवस्था में शहर की स्थिति सुधर रही थी किंतु एक बार फिर नगर निगम में अपने ही परिपाटी को बदलते हुए बरसात के 1 महीना दो महीना पहले ही नालों की सफाई का लाखों रुपए का ठेका स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी कर दिया चर्चा यह है कि नालों की सफाई का ठेका ऐसे व्यक्ति को दिया गया जिसे इसके पूर्व सफाई का कोई अनुभव नहीं था सफाई का अनुभव ना होने के बावजूद इस तरह से शहर के नालों की सफाई का ठेका देने पर निगम के विपक्षी पार्टियों के पार्षदों सहित कई पार्षदों ने इसे चाटुकारिता की श्रेणी में भी शामिल किया चाटुकारिता हो या योग्यता पर जो नगर निगम पिछले दो-तीन सालों से निगम के संसाधनों से ही शहर के नालों नालियों की सफाई करता रहा है अब एक बार खस्ताहाल नगर निगम ने फिर से ठेका देकर निगम के राजस्व की हानि तो की ही है वही सफाई व्यवस्था से कई पार्षद नाराज भी हैं कई पार्षदों का कहना है कि उन्होंने इस बार नालों की सफाई के बारे में शिकायत की किंतु स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य अधिकारी , प्रभारी और महापौर द्वारा मामले में देखते हैं और करते हैं जैसे टालमटोल जवाब देते रहे और एक बार फिर निगम में लाखों रुपया सफाई के नाम पर खर्च हो गए हैं और आज भी शहर के नालों की स्थिति बदली नही । आज भी शहर के नालों में कई स्थानों पर जलकुंभी और गंदगी देखी जा सकती है जिसके कारण जल प्रवाह में भी रुकावट होना लाजमी है निगम के सत्ताधारी पार्टी के कई पार्षदों और उनकी पार्षदों का यह कहना है कि सफाई के नाम पर बंदरबांट हुआ है निगम सरकार अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए लाखों रुपए का ठेका जारी कर रही है ।
बता दें कि पिछले कई महीनो से निगम सरकार पर लगातार यहां आरोप लगाते आ रहे हैं कि ठेकेदारी में मनमानी रूप से मनपसंद ठेकेदारों को कार्य दिया जा रहा है एक समय ऐसा था जब निगम में कार्य ठेका 15 से 20% below जाता था वहीं अब above जाने लगा है जिसके कारण निगम को 15 से 20% राशि का हर ठेके पर नुकसान हो रहा है किंतु शहरी सरकार अब लगता है खुलकर व्यापार के मूड में आ गई है और इसी शहरी सरकार के विकास के भरोसे शहर के विधायक अरुण वोरा चुनावी मैदान में उतरेंगे अब देखना यह है कि चुनावी मैदान में शहर के विकास पर कितने प्रतिशत मुहर पक्ष में लगते हैं और जनता शहरी सरकार को कितना नंबर देती है ।
तात्कालिक आयुक्त इन्द्रजीत बर्मन जिन्होंने पहली बार सफाई मित्रो के सहयोग से करवाया था नाला सफाई का कार्य
लोकेश चंद्राकर आयुक्त नगर पालिक निगम दुर्ग
धीरज बाकलीवाल महापौर नगर पालिक निगम दुर्ग
स्वास्थ्य अधिकारी दुर्ग निगम
स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली पर भी उठ रहे सवाल ....
निगम प्रशासन द्वारा तात्कालिक आयुक्त इन्द्रजीत बर्मन के कार्यकाल में शहर के नालो की सफाई का कार्य निगम सफाई मित्रो द्वारा शुरू हुआ था तब स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता थे महापौर धीरज बाकलीवाल थे बाद के सालो में भी आयुक्त बदलते गए स्वास्थ्य अधिकारी भी बदले किन्तु नालो की सफाई निगम के सफाई मित्र ही करते रहे किन्तु इस बार सफाई कर्मियों की संख्या ज्यादा , संसाधन में इजाफा महापौर वही किन्तु स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर जावेद अली बस यही अंतर और एक बार फिर नालो की सफाई का ठेका पद्दति शुरू जिसके कारण स्वास्थ्य अधिकारी भी इस मामले में चर्चा में बने हुए है .
भर्ष्टाचार हुआ या नहीं यह जाँच का विषय किन्तु राजस्व का नुक्सान हुआ यह सत्य ...
नालो की सफाई में कितना भ्रष्टाचार हुआ या पूर्ण कार्य हुआ यह जाँच का विषय है किन्तु जब हर साल नालो की सफाई निगम के स्वास्थ्य मित्रो द्वारा हो रही थी तो ऐसी कौन सी स्थिति निर्मित हो गयी जिसके कारण निगम ने इस बार लाखो रूपये का ठेका निकाल दिया इस मामले में आयुक्त , महापौर एवं विधायक को संज्ञान में लेकर जाँच करवानी ही चाहिए और तथ्यों को जनता के सामने रखना चाहिए क्योकि जो पैसे खर्च हुए उनसे विकास के अन्य कार्य भी हो सकते थे ....