दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम में विगत लगभग दो सालो से निगम आयुक्त के रूप में लोकेश चंद्राकर कार्यभार संभाल रहे है विगत दो सालो में अगर निगम क्षेत्र की व्यवस्था पर नजर डाले तो हर क्षेत्र में बदहाली और भ्रष्टाचार का आलम नजर आ जाता है . दुर्ग निगम के प्रशासनिक मुखिया शायद दुर्ग निगम को जिले का सबसे ज्यादा बदहाल निगम बनने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहे है . शहर के दुरस्त स्थल से ह्रदय स्थल पर कचरे का ढेर लगवा कर महीनो शहर की जनता को बदबूदार वातावरण में रहने को मजबूर किया . अब यह कचरा शिवनाथ नदी से मिलने वाली प्रमुख नाला के करीब एकत्रित किया जा रहा है वह भी शहर के अन्दर ऐसे में बदबूदार वातावरण से आस पास के रहवासियों के लिए कुछ समय बाद परेशानी का सबब बनेगा .
फ़ूड जोन तो बना दिया गया किन्तु आज भी जिन्हें दूकान का आबंटन हुआ वह सडको पर खुले आम व्यापार कर रहे है और निगम प्रशासन मौन साधे बैठा है . यातायात व्यवस्था अवैध अतिक्रमण के कारण चरमरा गई किन्तु निगम प्रशासन छोटे मोटे कार्यवाही को अंजाम देकर अपनी पीठ थपथपा रहा .
सडको पर आवारा पशुओ की फौज राहगीरों के लिए दुर्घटना का कारण बन रही किन्तु आयुक्त लोकेश चंद्राकर गौठान के चारागाह की जमीन पर अवैध रूप से कब्ज़ा जमाये शहर के बड़े बिल्डर के आगे बेबस है सारी प्रशासनिक शक्तिया सिर्फ कमजोरो पर ही अपनाया जा रहा है . निगम प्रशासन द्वारा लगातार विज्ञप्ति ज़ारी कर चेतावनी दी जा रही अवैध अतिक्रमण के खिलाफ जो अब सिर्फ एक मजाक के रूप में देखा जा रहा है .
मुख्य चौक चौराहों पर अतिक्रमण कर व्यापार करने वालो पर कार्यवाही ना कर सकने वाली निगम प्रशासन छोटे छोटे पसरे वालो पर रौब दिखाती गाहे बघाहे नजर आ ही जाती है . गरीबो द्वारा निर्माणाधीन भवन पर अगर मार्ग में जऱा भी मटेरियल आ जाए तो ताकत का नमूना पेश करते हुए कार्यवाही और जुर्माना वसूला जाता है वही अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बिना भवन अनुज्ञा लिए अवैध रूप से निर्माण हो रहे भवन पर निगम प्रशासन पानी के टेंकर भेज कर अपनी चाटुकारिता को दर्शाती हुई नजर आती है .
निगम के कर्मचारियों को परिवार के सदस्यों के नाम से नियम विरुद्ध गुमठी आबंटन कर गुमठी घोटाला को अंजाम देते हुए अवैध रेन बसेरा सञ्चालन पर आयुक्त लोकेश चंद्राकर मौन रहते है , निगम प्रशासन के पास वाहन उपलब्ध होते हुए भी आचार संहिता में भावपत्र के माध्यम से वाहन किराये पर लेकर कार्य करवाना और आचार संहिता ख़त्म होने के अंतिम दिन तक लाखो रूपये का भुगतान निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली की ओर इशारा कर रहा जबकि ऐसे कई ठेकेदार है जो महीनो से भुगतान का इंतज़ार कर रहे है .
भ्रष्टाचार के खिलाफ दुर्ग की जनता
ने दिया वोट अब हो रहा व्यर्थ ....?
गत विधान सभा चुनाव में भले ही प्रदेश में महतारी वंदन योजना के कारण भाजपा की सरकार बनी हो किन्तु दुर्ग विधान सभा में भाजपा की जीत इतनी ज्यादा सुनिश्चित थी कि अगर प्रदेश में कांग्रेस 90 में से एक सीट भी हारती तो वह दुर्ग विधान सभा की होती . विधान सभा चुनाव के साल भर पहले से ही समाचार पत्रों में यह आंकलन प्रकाशित हो चुका था कि दुर्ग विधान सभा से अगर कांग्रेस वर्तमान विधायक अरुण वोरा को टिकिट देगी तो कांग्रेस की हार निश्चित है किन्तु परिवारवाद के आगोश में समाई कांग्रेस संगठन ने सभी सर्वे से किनारा करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में एक बार फिर अरुण वोरा को मौका दिया और नाम की घोषणा होते ही यह सुनिश्चित हो गया था की कांग्रेस प्रत्याशी की हार होगी कितने वोट से होगी बस यही चर्चा में बांकी रहा . दुर्ग की जनता ने अपनी चर्चो पर मुहर भी लगा दिया और दुर्ग के लिए एक अनजान चेहरे को अपना मत दिया . यहाँ भी भाजपा संगठन की सक्रिय से जय पिता के आरएसएस से निकटता को संबल मिला और प्रत्याशी की घोषणा हुई .
दुर्ग निगम क्षेत्र जो विधान सभा क्षेत्र के लगभग बराबर है में तात्कालिक विधायक के द्वारा भ्रष्टाचार पर लगाम ना लगाने का परिणाम हजारो मतों से हुई हार को परिलक्षित कर दिया . वर्तमान में भी दुर्ग निगम में भ्रष्टाचार चरम पर है किन्तु वर्तमान विधायक के द्वारा ऐसी कोई पहल नजर नहीं आ रही की पूर्व में हुए भ्रष्टाचार की जाँच की बात कही गई हो , गौठान की जमीन पर कब्ज़े के विरुद्ध आवाज़ उठाई गई हो , रसूखदारों द्वारा गंजपारा मुख्य मार्ग में सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण में निगम प्रशासन की निष्क्रियता पर सख्त निर्देश दिए गए हो , कचरे के परिवहन के नाम पर लाखो रुपयों का भुगतान अर्थ मूवर्स के संचालको को कर दिया गया हो , शहर के बिच महीनो पड़े कचरे के ढेर पर कोई प्रतिक्रिया दी गई हो .