दुर्ग। शौर्यपथ।
शहर की सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी जिन हाथों में सौंपी गई, उन्हीं की निष्क्रियता अब मासूम बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ती दिख रही है। नगर पालिका निगम के स्वास्थ्य प्रभारी निलेश अग्रवाल की लापरवाही से शहर के बीचोंबीच स्थित कचरा संग्रहण केंद्र आग और जहरीले धुएं का केंद्र बन चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि न तो निगम प्रशासन हरकत में है और न ही शहर की प्रथम नागरिक अलका बाघमार कोई ठोस कदम उठाती नजर आ रही हैं।
SLRM सेंटर बना डंपिंग ग्राउंड
सुराना कॉलेज के सामने स्थित SLRM सेंटर, जहाँ केवल कचरे का अस्थायी संग्रह होना चाहिए था, वहाँ खुलेआम बड़े पैमाने पर कचरा डंप किया गया। शाम होते ही पूरा इलाका बदबूदार हो जाता था और बीते दिनों लगी आग ने हालात को और भयावह बना दिया।
पिछले तीन दिनों से लगातार उठ रहे जहरीले धुएं ने आसपास के वातावरण को विषैला बना दिया है। इस क्षेत्र में सुराना कॉलेज के समीप छोटे बच्चों के छात्रावास स्थित हैं, जहाँ रहने वाले सैकड़ों बच्चे मजबूरी में यह जहरीली हवा सांसों में भर रहे हैं। इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ना तय है।
छोटों पर कार्रवाई, बड़े दोषियों पर मेहरबानी?
यह सवाल अब शहर में गूंज रहा है कि—
जब किसी प्रशासनिक अधिकारी या कर्मचारी से जरा सी चूक होती है तो तत्काल नोटिस, स्थानांतरण और निलंबन की कार्रवाई कर दी जाती है, तो फिर इतनी बड़ी और गंभीर लापरवाही के बाद स्वास्थ्य प्रभारी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या प्रभारी पद पर बैठे होने का अर्थ यह है कि प्रशासनिक प्रोटोकॉल का लाभ तो लिया जाए, लेकिन जवाबदेही शून्य रहे?
महापौर की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी
शहर की सफाई, स्वास्थ्य और नागरिकों की सुरक्षा की अंतिम जिम्मेदारी महापौर की होती है। महापौर ने स्वास्थ्य विभाग की कमान परिषद के निलेश अग्रवाल को सौंपी है, तो मौजूदा बदहाल हालात की सीधी जिम्मेदारी भी उन्हीं पर आती है।
पिछले एक वर्ष से शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर, दुर्गंध और गंदगी की शिकायतें आम हैं। कई नागरिक यह कहने लगे हैं कि वर्तमान कार्यकाल में हालात पिछले कार्यकाल की तुलना में और अधिक विकराल हो चुके हैं।
खामोशी का संदेश क्या जाएगा?
यदि इतनी गंभीर लापरवाही के बावजूद महापौर अलका बाघमार कोई कठोर निर्णय नहीं लेतीं, तो यह संदेश जाएगा कि पद ग्रहण के समय ली गई शपथ केवल औपचारिकता थी।
शहर की जनता पूछ रही है—
क्या छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई संभव है, लेकिन बड़े पदों पर बैठे जिम्मेदार लोगों पर नहीं?
राजनीतिक असर और भविष्य की चिंता
यदि शहरी सरकार इसी तरह आम जनता की तकलीफों से मुंह मोड़ती रही, तो इसका राजनीतिक असर भी तय है। यह स्थिति विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक संगठन भारतीय जनता पार्टी के लिए भी भविष्य में चिंता का विषय बन सकती है।
अब नजरें महापौर के फैसले पर
अब पूरा शहर देख रहा है कि—
क्या महापौर अलका बाघमार बच्चों की सेहत और शहर की स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए लापरवाह स्वास्थ्य प्रभारी निलेश अग्रवाल पर कड़ा कदम उठाएंगी?
या फिर यह मामला भी फाइलों और धुएं के साथ हवा में ही उड़ जाएगा।
यह केवल राजनीति का सवाल नहीं, बल्कि शहर के भविष्य और मासूम बच्चों के स्वास्थ्य का मुद्दा है।