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प्यासे गांव, खोखे दावे: कोंडागांव में गड्ढों का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण,प्रशासनिक लापरवाही ने छीना ग्रामीणों का “जल अधिकार”

प्रतीकात्मक चित्र प्रतीकात्मक चित्र
  • rounak group

 

शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट | कोंडागांव

सरकारी फाइलों में विकास की चमक भले ही दिखाई दे रही हो, लेकिन कोंडागांव जिले के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। ग्राम तुमड़ीवाल की तस्वीरें और वहां के हालात प्रशासनिक दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं।

एक ओर सरकार हर घर नल, स्वच्छ पेयजल और ग्रामीण विकास के बड़े-बड़े विज्ञापन जारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण आज भी गड्ढों और झरिया का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। यह केवल बदहाल व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

“मेढ़क वाले पानी” से बुझ रही प्यास

शौर्यपथ टीम जब ग्राम तुमड़ीवाल पहुंची, तो रास्ते में एक बेहद चिंताजनक दृश्य सामने आया। एक युवक मिट्टी से भरे गड्ढे में जमा पानी को बर्तन से निकालकर पी रहा था। पानी इतना गंदा था कि उसमें कीचड़ और जीव-जंतु साफ दिखाई दे रहे थे।

जब युवक से बात की गई, तो उसकी आवाज में बेबसी साफ झलक रही थी। उसने बताया—

“गांव में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। जो बोरवेल था, वो भी खराब पड़े-पड़े जवाब दे चुका है। कई बार शिकायत हुई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूरी में यही पानी पीना पड़ता है।”

यह बयान सिर्फ एक युवक की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है।

कागजों में योजनाएं, जमीन पर सूखा सच

प्रशासन और जनप्रतिनिधि अक्सर विकास यात्राओं, शिविरों और बैठकों में ग्रामीण सुविधाओं के दावे करते नजर आते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यदि योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं, तो आखिर ग्रामीण गड्ढों का पानी क्यों पी रहे हैं?

क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी इन गांवों का वास्तविक निरीक्षण किया?
क्या खराब बोरवेल की मरम्मत कराना भी अब प्रशासन के लिए “प्राथमिकता” नहीं रह गई?
और सबसे बड़ा सवाल—अगर यही हाल रहा, तो ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन की जिम्मेदारी कौन लेगा?

बीमारी का खतरा, फिर भी मौन प्रशासन

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का दूषित पानी पीने से डायरिया, टाइफाइड, पीलिया और त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं। गर्मी के मौसम में स्थिति और भयावह हो सकती है। इसके बावजूद संबंधित विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

विकास के नारों के बीच दम तोड़ती व्यवस्था

तस्वीरें साफ बता रही हैं कि ग्रामीण भारत के विकास की असली कहानी अभी भी अधूरी है। जब लोग गड्ढों का पानी पीने को मजबूर हों, तब विकास के दावे केवल मंचीय भाषण बनकर रह जाते हैं।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस खबर के बाद हरकत में आता है या फिर यह गांव भी सिर्फ “रिपोर्टों” में ही जिंदा रहेगा।

इस खबर को देखने के लिए हमारे youtube चेनल पर क्लीक करे 

https://youtu.be/0A_9oYx2-po?si=7pMzyi4UdItWxOtK

कोंडागांव-शासन प्रशासन के दावे हुए फेल,
आज भी ग्रामीण झरिया का पानी पीने के लिए मजबूर,
क्या ये ग्रामीण नही देते है शासन को वोट क्या इनकी कोई समस्या का नही होगा उपचार
क्या ऐसे ही गंदे पानी पीने के लिए रहेंगे मजबूर।

कोंडागांव से दीपक वैष्णव की ख़ास रिपोर्

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Last modified on Saturday, 16 May 2026 12:38
शौर्यपथ