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शौर्यपथ के खुलासे का बड़ा असर: दुर्ग राशन घोटाले में FIR, 70 लाख से अधिक का राशन गायब; चार आरोपियों पर आपराधिक मामला दर्ज Featured

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लगातार प्रकाशित जांच रिपोर्टों और अनियमितताओं के खुलासे के बाद हरकत में आया खाद्य विभाग, कलेक्टर के निर्देश पर तीन उचित मूल्य दुकानों में दर्ज हुई एफआईआर

दुर्ग। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में सामने आई गंभीर अनियमितताओं को लेकर दैनिक शौर्यपथ द्वारा लगातार प्रकाशित खबरों का बड़ा असर सामने आया है। शौर्यपथ ने विभागीय जांच प्रतिवेदनों के आधार पर करोड़ों रुपये मूल्य के राशन की कमी, एक ही व्यक्ति का बार-बार सामने आ रहा नाम और कार्रवाई के अभाव को प्रमुखता से उजागर किया था। इसके बाद जिला प्रशासन और खाद्य विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए तीन शासकीय उचित मूल्य दुकानों से जुड़े संचालकों एवं विक्रेताओं के विरुद्ध मोहन नगर थाना में एफआईआर दर्ज करा दी है।

प्रशासनिक कार्रवाई में करीब 70 लाख रुपये से अधिक मूल्य के खाद्यान्न के गायब होने का मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि गरीब हितग्राहियों के लिए आवंटित राशन को खुले बाजार में बेच दिया गया।

शौर्यपथ ने उठाए थे कई अहम सवाल

शौर्यपथ ने अपनी पड़ताल में जिला खाद्य विभाग के चार अलग-अलग जांच प्रतिवेदनों का विश्लेषण करते हुए बताया था कि कई उचित मूल्य दुकानों में भारी मात्रा में खाद्यान्न स्टॉक से कम पाया गया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि विभिन्न जांचों में नवीन राजपूत का नाम बार-बार दुकान संचालन और राशन वितरण से जुड़ा मिला, जबकि विभागीय प्रतिवेदनों में लाखों रुपये मूल्य के खाद्यान्न की कमी दर्ज होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी।

समाचार में यह सवाल भी उठाया गया था कि यदि सामान्य मामलों में तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज हो सकता है, तो सरकारी राशन की इतनी बड़ी कमी के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? साथ ही यह भी पूछा गया था कि क्या पूरे मामले की वास्तविक जानकारी जिला प्रशासन तक पहुंच रही है और क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी।

जांच में सामने आई थी भारी गड़बड़ी

शौर्यपथ द्वारा प्रकाशित जांच प्रतिवेदनों में अलग-अलग उचित मूल्य दुकानों में सैकड़ों और हजारों क्विंटल चावल सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी दर्ज थी। जांच के दौरान कुछ विक्रेताओं ने अपने बयान में यह भी कहा था कि वे केवल वितरण का कार्य करते हैं और संचालन संबंधी निर्देश उन्हें अन्य व्यक्ति से मिलते थे। एक जांच प्रतिवेदन में दुकान संचालन की जिम्मेदारी स्वीकार किए जाने का उल्लेख भी सामने आया था।

अब प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

खाद्य विभाग ने वर्ष 2024 में किए गए निरीक्षणों और भौतिक सत्यापन के आधार पर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर कलेक्टर को सौंपा। संबंधित संचालकों को पहले गायब राशन जमा कराने अथवा उसकी राशि शासन के खाते में जमा करने का अवसर दिया गया, लेकिन निर्धारित समय सीमा तक ऐसा नहीं होने पर कलेक्टर के निर्देश पर आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई।

2327 क्विंटल से अधिक चावल का नहीं मिला हिसाब

खाद्य विभाग के अनुसार जांच में 2327.13 क्विंटल चावल, 1.12 क्विंटल शक्कर, 4.19 क्विंटल नमक तथा लगभग 35 लीटर केरोसिन स्टॉक से कम पाया गया। विभाग का मानना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली का यह राशन अवैध रूप से खुले बाजार में खपाया गया, जिससे शासन और गरीब हितग्राहियों दोनों को नुकसान हुआ।

तीन उचित मूल्य दुकानों में मिली गंभीर अनियमितताएं

जांच के दौरान निम्नलिखित दुकानों में स्टॉक में भारी कमी दर्ज की गई—

उचित मूल्य दुकान क्रमांक 431001017 – लगभग 410 क्विंटल चावल कम मिला।

उचित मूल्य दुकान क्रमांक 431001025 – लगभग 1244.55 क्विंटल चावल, 1.12 क्विंटल शक्कर, 4.19 क्विंटल नमक एवं 21 लीटर केरोसिन कम मिला।

उचित मूल्य दुकान क्रमांक 431001006 – लगभग 672.58 क्विंटल चावल एवं 14 लीटर केरोसिन स्टॉक से कम पाया गया।

चार लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

कलेक्टर के निर्देश पर मोहन नगर थाना में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की संबंधित धाराओं के तहत जय शक्ति महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष संध्या चंदेल, विक्रेता नवीन राजपूत, अविनाश निर्मलकर एवं लल्लन किशोर यादव के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुट गई है।

प्रशासन का संदेश— अब होगी सख्त कार्रवाई

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेगा। राशन वितरण में गड़बड़ी, रिकॉर्ड में हेराफेरी या कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध भविष्य में भी कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

अब भी कई सवाल बाकी

एफआईआर दर्ज होने के बाद भी कई महत्वपूर्ण सवाल अभी बाकी हैं। क्या पूरे मामले में अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच होगी? क्या विभागीय स्तर पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी? क्या सरकारी राशन की कथित हेराफेरी से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा?

फिलहाल इतना तय है कि दैनिक शौर्यपथ द्वारा उठाए गए सवालों के बाद शुरू हुई कार्रवाई ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। अब जिले की जनता की निगाहें पुलिस विवेचना और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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शौर्यपथ