दुर्ग खाद्य एवं औषधि विभाग की निगरानी पर सवाल, अवैध निर्माण पर रोक या सिर्फ दिखावे की कार्रवाई?
दुर्ग।
खाद्य एवं औषधि विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पिछले महीने सितार गुटखा के अवैध निर्माण और विक्रय के खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाई के बाद शहरवासियों को उम्मीद थी कि अब प्रतिबंधित और नियम विरुद्ध संचालित इस कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगेगी। लेकिन कुछ ही समय बाद शहर में एक बार फिर सितार गुटखा की बिक्री शुरू होने की चर्चाओं ने विभागीय कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगर बाजार में सितार गुटखा दोबारा उपलब्ध हो रहा है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इसका निर्माण कहां से हो रहा है? क्या कार्रवाई के बाद भी अवैध निर्माण करने वालों ने दोबारा अपना नेटवर्क सक्रिय कर लिया है या फिर विभाग की निगरानी व्यवस्था सिर्फ कार्रवाई तक सीमित रह गई है?
बड़ी कार्रवाई के बाद भी क्यों लौट आया अवैध कारोबार?
पिछले महीने खाद्य एवं औषधि विभाग ने सितार गुटखा के अवैध निर्माण और विक्रय के खिलाफ कार्रवाई कर अपनी सक्रियता दिखाई थी। लेकिन इस कार्रवाई के बाद भी यदि वही उत्पाद बाजार में फिर दिखाई देने लगे हैं तो यह विभाग के लिए गंभीर चुनौती है।
सिर्फ विक्रेताओं पर कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि उन लोगों तक पहुंचना जरूरी है जो अवैध निर्माण और सप्लाई नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं। सवाल यह भी है कि क्या विभाग ने कार्रवाई के बाद लगातार निगरानी रखी या फिर मामला कार्रवाई की खबरों तक ही सीमित रह गया?
त्योहारी सीजन में मिठाई दुकानों पर जांच सिर्फ औपचारिकता?
त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है और हर साल की तरह खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा मिठाई दुकानों, खाद्य प्रतिष्ठानों और मिलावट की जांच की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लेकिन आम जनता के बीच यह सवाल भी बना हुआ है कि आखिर कितनी जांचों का परिणाम ठोस कार्रवाई के रूप में सामने आता है?
लोगों का आरोप है कि जांच अभियान तो चलते हैं, लेकिन ऐसी कड़ी कार्रवाई कम ही दिखाई देती है जिससे मिलावटखोरों और नियम तोड़ने वालों में वास्तविक डर पैदा हो।
विभाग के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर?
खाद्य सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले विभाग पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वह अवैध निर्माण, प्रतिबंधित उत्पादों और मिलावटी खाद्य सामग्री के खिलाफ लगातार कार्रवाई करे। लेकिन यदि कार्रवाई के कुछ दिनों बाद ही वही अवैध कारोबार फिर सक्रिय हो जाए तो विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब देखना होगा कि दुर्ग खाद्य एवं औषधि विभाग केवल त्योहारी सीजन में जांच अभियान और प्रेस नोट जारी करने तक सीमित रहता है या फिर अवैध गुटखा निर्माण और विक्रय के पूरे नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करता है।
बड़ा सवाल —
क्या दुर्ग में अवैध गुटखा कारोबारियों को सिर्फ कुछ दिनों की कार्रवाई का डर है, या फिर ऐसी सख्त कार्रवाई होगी जिससे दोबारा अवैध निर्माण करने की हिम्मत ही न हो?