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महापौर अलका बाघमार और बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा पर सवाल: गुमटी घोटाले पर कार्रवाई क्यों नहीं? Featured

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लगभग 60 लाख रुपये के कथित नगद लेनदेन और अनियमित गुमटियों की शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, सवाल—अभ्युदय मिश्रा निष्क्रिय हैं या किसी राजनीतिक संरक्षण में?

दुर्ग। दुर्ग नगर निगम में गुमटियों के आवंटन और संचालन से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले ने अब नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सीधे तौर पर नगर निगम की महापौर अलका बाघमार और वर्तमान बाजार अधिकारी एवं इस मामले से जुड़े नोडल दायित्व संभाल रहे अभ्युदय मिश्रा की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं।

मामले में लगभग 60 लाख रुपये के कथित नगद लेनदेन, नियमों के विपरीत गुमटियों के संचालन और शहरी राष्ट्रीय आजीविका मिशन के अंतर्गत हुई कथित अनियमितताओं की शिकायतें पहले ही संबंधित अधिकारियों और महापौर तक पहुंचाई जा चुकी हैं। इसके बावजूद यदि शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर दुर्ग नगर निगम किसका इंतजार कर रहा है?

कार्रवाई के बजाय शुल्क वसूली—किस नियम के तहत चल रहा खेल?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन गुमटियों के संचालन और आवंटन को लेकर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं, उनके विरुद्ध जांच और कार्रवाई करने के बजाय यदि नगर निगम उन्हीं संचालकों से शुल्क वसूल रहा है, तो यह किस नियम और किस अधिकार के तहत किया जा रहा है?

क्या शुल्क वसूल लेने मात्र से पूर्व में हुई कथित अनियमितताएं समाप्त हो जाती हैं?

या फिर नगर निगम की व्यवस्था में यह नया सिद्धांत लागू हो गया है कि पहले नियमों की अनदेखी करो और बाद में शुल्क लेकर सब कुछ नियमित मान लिया जाए?

अभ्युदय मिश्रा: भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की अनुशंसा क्यों नहीं?

कुछ महीनों पहले इस मामले से संबंधित नोडल दायित्व बाजार विभाग को सौंपा गया और बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा को जिम्मेदारी मिली। ऐसे में अब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न उनकी भूमिका को लेकर है।

यदि उनके संज्ञान में शिकायतें, कथित नगद लेनदेन और नियम विरुद्ध संचालन की जानकारी है, तो उन्होंने अब तक क्या जांच की? किन अधिकारियों या व्यक्तियों से जवाब मांगा? किसके विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की? और यदि कोई अनियमितता नहीं मिली, तो उसका स्पष्ट तथ्यात्मक प्रतिवेदन सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

लगातार शिकायतों के बाद भी ठोस कार्रवाई सामने न आने से अभ्युदय मिश्रा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थिति ऐसी बन गई है कि शहर में यह चर्चा तेज है कि बाजार अधिकारी वास्तव में निष्क्रिय हैं या फिर कार्रवाई न करने के पीछे कोई ऐसा संरक्षण है, जिसकी वजह से पूरा मामला फाइलों और आश्वासनों के बीच दबा हुआ है?

अलका बाघमार का ‘जल्द कार्रवाई करेंगे’ वाला आश्वासन आखिर कब तक?

महापौर अलका बाघमार से भी इस मामले में कई बार कार्रवाई की अपेक्षा की गई। शिकायतकर्ताओं और हमारी टीम को कथित तौर पर लगातार यही आश्वासन मिलता रहा कि “जल्द कार्रवाई करेंगे।”

लेकिन सवाल यह है कि यह “जल्द” आखिर कितने महीनों का होता है?

महापौर के पास नगर निगम की नीतिगत और जनप्रतिनिधि स्तर की जिम्मेदारी है। यदि इतने गंभीर आरोपों और शिकायतों के बाद भी केवल आश्वासन दिए जाएं और जांच, जिम्मेदारी तय करने तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए ठोस पहल दिखाई न दे, तो जनता सवाल तो पूछेगी ही।

सिफारिश करने की बात और कार्रवाई सुनिश्चित करने की इच्छाशक्ति—दोनों में जमीन-आसमान का अंतर होता है।

शहर अब केवल यह सुनने के मूड में नहीं है कि “कार्रवाई करेंगे।” सवाल यह है कि—

कार्रवाई कब होगी?

किसके खिलाफ होगी?

और कथित 60 लाख रुपये के नगद लेनदेन की जांच कौन करेगा?

साय सरकार का सुशासन और दुर्ग निगम की अलग पटकथा?

प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार लगातार सुशासन और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई का दावा करती रही है। कई मामलों में अधिकारियों तक पर कार्रवाई हुई है। ऐसे में दुर्ग नगर निगम का यह मामला और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

सवाल यह है कि क्या दुर्ग नगर निगम की शहरी सरकार के लिए नियम अलग हैं?

क्या यहां शिकायतों पर कार्रवाई की गति इतनी धीमी है कि पहले मामला ठंडा पड़े, फिर चर्चा खत्म हो और उसके बाद फाइल भी कहीं दब जाए?

अगर ऐसा नहीं है तो फिर महापौर अलका बाघमार और जिम्मेदार अधिकारी सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करें कि गुमटी मामले की जांच किस स्तर पर है और अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

“उत्सवों में व्यस्त, सवालों पर मौन?”

जनता के बीच अब यह कटाक्ष भी सुनाई देने लगा है कि दुर्ग की शहरी सरकार को तीज-त्योहार, आयोजन और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए समय तो मिल जाता है, लेकिन गंभीर शिकायतों की फाइलों पर निर्णायक कार्रवाई करने की घड़ी शायद अभी तक नहीं आई।

नगर निगम की राजनीति में सक्रिय लोगों के बीच महापौर के कार्यकाल और कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज है। यहां तक कहा जा रहा है कि यदि आज जनता को फिर से फैसला देने का अवसर मिले तो महापौर के प्रदर्शन को लेकर गंभीर राजनीतिक सवाल खड़े हो सकते हैं।

हालांकि यह जनता और राजनीतिक विश्लेषण का विषय है, लेकिन इतना तय है कि चुनावी जीत से मिला पद केवल सम्मान नहीं, जवाबदेही भी मांगता है।

अब नजर नई आयुक्त लीना कोसाम पर

अब इस पूरे मामले में निगाहें दुर्ग नगर निगम की प्रशासनिक मुखिया आईएएस अधिकारी लीना कोसाम पर टिकी हैं।

क्या नई आयुक्त कथित गुमटी अनियमितताओं, लगभग 60 लाख रुपये के नगद लेनदेन के आरोपों और नियम विरुद्ध संचालन की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराएंगी?

क्या बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा से जवाब लिया जाएगा कि शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?

क्या महापौर अलका बाघमार प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने के लिए स्पष्ट पहल करेंगी?

या फिर यह मामला भी “जल्द कार्रवाई करेंगे” की उस सूची में शामिल होकर रह जाएगा, जहां कार्रवाई से ज्यादा आश्वासन और जवाब से ज्यादा मौन दिखाई देता है?

अब गेंद दुर्ग नगर निगम की शहरी सरकार और प्रशासनिक नेतृत्व के पाले में है। जनता जवाब चाहती है—आखिर कथित गुमटी घोटाले की निष्पक्ष जांच कब होगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?

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