पसरा लगाने वालों पर कार्रवाई, लेकिन अनमोल ज्वेलर्स के कथित अतिक्रमण पर मौन क्यों? — बाजार व्यवस्था को लेकर निगम प्रशासन से जवाब की मांग
दुर्ग। शहर के सबसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्रों में शामिल इंदिरा मार्केट के एक प्रमुख चौक पर सड़क और आम लोगों के आवागमन के लिए बने बरामदे तक कथित कब्जे ने नगर निगम की बाजार व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और स्थिति के अनुसार अनमोल ज्वेलर्स द्वारा दुकान के सामने बरामदे के हिस्से में व्यापारिक गतिविधियां संचालित किए जाने के साथ सड़क की ओर बैरियर और वाहन लगाए जाने की बात सामने आई है। यदि आवंटित क्षेत्र से अधिक हिस्से का उपयोग किया जा रहा है, तो इसकी जांच और नियमानुसार कार्रवाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है।
सबसे बड़ा सवाल बाजार विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर है। बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा के कार्यकाल में छोटे व्यापारियों और पसरा लगाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर निगम की सक्रियता दिखाई देती है, लेकिन बड़े और स्थापित व्यापारिक प्रतिष्ठानों द्वारा किए जा रहे कथित अतिक्रमण पर समान कार्रवाई क्यों दिखाई नहीं देती? क्या बाजार विभाग ने इस स्थान का निरीक्षण किया है? क्या संबंधित व्यापारी को नोटिस दिया गया? और यदि दिया गया है तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई?
ट्रिपल इंजन की सरकार के सुशासन का इम्तिहान
नगरीय निकाय चुनाव के दौरान प्रदेश में ट्रिपल इंजन की सरकार के माध्यम से सुशासन और बेहतर नगरीय व्यवस्था का दावा किया गया था। ऐसे में इंदिरा मार्केट जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र में सड़क और बरामदे के उपयोग को लेकर पैदा हुई स्थिति इन दावों की जमीनी कसौटी बन जाती है।
जनता का सवाल सीधा है—यदि बरामदा पैदल चलने वालों के लिए है और सड़क सार्वजनिक आवागमन के लिए, तो किसी भी प्रतिष्ठान को इन स्थानों के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति किस आधार पर मिल रही है? यदि अनुमति नहीं है, तो कार्रवाई में देरी क्यों?
अभ्युदय मिश्रा की भूमिका पर भी जवाब जरूरी
बाजार अधिकारी के रूप में अभ्युदय मिश्रा पर बाजार क्षेत्र की व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि क्या उन्होंने स्वयं मौके का निरीक्षण किया है और क्या इस कथित अतिक्रमण के संबंध में कोई कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
यदि निगम के रिकॉर्ड में आवंटित क्षेत्र अपेक्षाकृत कम है और मौके पर उससे अधिक क्षेत्र का उपयोग पाया जाता है, तो माप-जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और नियमानुसार कार्रवाई ही इस विवाद का तथ्यात्मक समाधान हो सकता है।
महापौर अलका बाघमार से भी जनहित में सवाल
दुर्ग नगर निगम की महापौर श्रीमती अलका बाघमार के सामने भी यह मामला व्यवस्था और समान कार्रवाई से जुड़ा प्रश्न है। यदि सड़क और बरामदे पर अतिक्रमण की शिकायत या प्रमाण निगम के संज्ञान में हैं, तो क्या महापौर प्रशासन को बाजार क्षेत्र का विशेष निरीक्षण कराकर सभी अतिक्रमणों पर समान कार्रवाई के निर्देश देंगी?
साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्या इस मामले में महापौर कार्यालय को कोई शिकायत प्राप्त हुई है और यदि हुई है तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।
लेन-देन के आरोप नहीं, जांच से सामने आएगा सच
अतिक्रमण बने रहने को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह के सवाल और चर्चाएं हो सकती हैं, लेकिन किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि पर लेन-देन अथवा संरक्षण का आरोप बिना प्रमाण तथ्य के रूप में लगाना उचित नहीं होगा। यदि ऐसी कोई शिकायत या प्रमाण है तो उसकी स्वतंत्र जांच ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है।
फिलहाल तस्वीर यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि नियम छोटे-बड़े सभी व्यापारियों के लिए समान हैं या नहीं। इंदिरा मार्केट में यदि सार्वजनिक रास्ते और बरामदे का व्यावसायिक उपयोग नियम विरुद्ध पाया जाता है, तो निगम प्रशासन को कार्रवाई का आधार, आवंटन की सीमा और मौके की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
अब निगाहें बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा और महापौर अलका बाघमार पर हैं—क्या इंदिरा मार्केट की इस व्यवस्था पर निगम प्रशासन मौके पर जाकर जांच करेगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई करेगा?