साढ़े चार साल की बच्ची को मृत समझकर खंडहर में फेंक दिया था आरोपी ने, अदालत में पीड़िता ने की पहचान
डीएनए, फोरेंसिक साक्ष्य, सीसीटीवी और मासूम की गवाही बनीं दोषसिद्धि का आधार; 13 हजार रुपए जुर्माना भी
दुर्ग / शौर्यपथ / साढ़े चार साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म करने और गला घोंटकर उसकी हत्या का प्रयास करने के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी धनेश्वर साहू उर्फ जनता (40) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उतई थाना क्षेत्र के बंजारीपारा में 10 अप्रैल 2026 को हुई इस घटना में पुलिस की त्वरित जांच और समय पर चालान पेश किए जाने के बाद 153 दिन के भीतर अदालत का फैसला आया। सजा का आदेश 26 सितंबर को जारी किया गया।
पांच रुपए लेकर निकली थी मासूम, आरोपी बहला-फुसलाकर ले गया
पुलिस के मुताबिक 10 अप्रैल को दोपहर करीब 11:30 बजे बच्ची अपनी दादी से पांच रुपए लेकर घर के पास दुकान पर सामान लेने गई थी। इसी दौरान आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने घर की छत पर ले गया। दुकान के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में आरोपी के बच्ची को अपने साथ ले जाने की तस्वीरें सामने आईं।
आरोप है कि आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। उसके चिल्लाने पर कपड़े से मुंह दबाया और गला घोंटकर उसकी हत्या का प्रयास किया। बच्ची के बेहोश हो जाने पर आरोपी ने उसे मृत समझ लिया। इसके बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से बच्ची को तकिया कवर और जूट की बोरी में बंद कर घर के पीछे स्थित खंडहर में फेंक दिया।
बोरे से बाहर निकला पैर, बच गई मासूम की जान
बच्ची के काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिजन और मोहल्ले के लोग उसकी तलाश में जुटे। इसी दौरान खंडहर में दो युवकों की नजर एक बोरे पर पड़ी, जिसमें से बच्ची का पैर बाहर निकला हुआ था। बोरा खोलने पर बच्ची गंभीर और लहूलुहान हालत में मिली। तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।
घटना की जानकारी फैलते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने उतई थाने का घेराव कर आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
15 दिन में चालान, साक्ष्यों ने खोली वारदात की परतें
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी धनेश्वर साहू को गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया गया। जांच पूरी कर पुलिस ने 25 अप्रैल 2026 को चालान न्यायालय में पेश कर दिया।
जांच के दौरान आरोपी के घर से बाल, तकिया कवर, जूट की बोरी, बच्ची के कपड़े तथा आरोपी के कपड़े बरामद किए गए। इनका फोरेंसिक परीक्षण और डीएनए मिलान कराया गया। चिकित्सकीय जांच में बच्ची के शरीर, जांघ और गले पर खरोंच के निशान, अंदरूनी चोट तथा अधिक रक्तस्राव की पुष्टि हुई।
अदालत में मासूम ने पहचाना आरोपी
मामले की सुनवाई के दौरान साढ़े चार साल की बच्ची ने अदालत में पर्दे के पीछे खड़े आरोपी को पहचान लिया और अपने साथ हुई घटना के संबंध में बयान दिया। सीसीटीवी फुटेज, डीएनए रिपोर्ट, चिकित्सकीय साक्ष्य और पीड़िता की गवाही सहित अन्य साक्ष्यों को अदालत ने महत्वपूर्ण माना।
विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास के साथ 7 वर्ष, 10 वर्ष और 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा कुल 13 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो एक्ट तथा एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई थी।
त्वरित जांच से जल्द मिला न्याय
मामले में पुलिस द्वारा तेजी से जांच पूरी कर 15 दिन के भीतर चालान पेश किया गया और करीब पांच माह में अदालत से फैसला आया। यह प्रकरण बाल सुरक्षा और त्वरित न्याय की आवश्यकता को रेखांकित करता है। मासूम की पहचान और जीवन बचाने वाले स्थानीय युवकों की तत्परता से लेकर वैज्ञानिक साक्ष्यों और न्यायालय में हुई गवाही तक, पूरी कार्रवाई ने मामले को निर्णायक रूप से मजबूत किया।