दुर्ग। नगर पालिका निगम में निर्माण कार्यों के लिए अपनाई जाने वाली ठेका पद्धति का उद्देश्य प्रतिस्पर्धी निविदा के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण कार्य को उचित दर पर सुनिश्चित करना और निगम के सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग करना होता है। लेकिन जब किसी महत्वपूर्ण निर्माण कार्य की निविदा प्रक्रिया में बार-बार सीमित प्रतिस्पर्धा दिखाई दे और दरों में लगातार ऊपर-नीचे का अंतर सामने आए, तो स्वाभाविक रूप से प्रक्रिया की पारदर्शिता और आर्थिक प्रभाव को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।
दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में साइंस कॉलेज के समीप से रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले प्रस्तावित कैनाल रोड का टेंडर इसी वजह से चर्चा का विषय बन गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस सड़क निर्माण को लेकर प्रारंभिक स्तर पर यह प्रश्न भी सामने आया था कि निर्माण एजेंसी नगर निगम होगी अथवा लोक निर्माण विभाग। अंततः नगर निगम द्वारा कार्य कराए जाने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन इसके बाद निविदा प्रक्रिया में बार-बार बदलाव ने पूरे मामले को सामान्य सभा के सामने ला खड़ा किया।
चार निविदाएं, दरों में लगातार बदलाव
कैनाल रोड के लिए हुई निविदा प्रक्रिया में पहली बार लगभग 10 प्रतिशत Above दर सामने आई। इसके बाद दूसरी निविदा में लगभग 8 प्रतिशत Above दर पर प्रस्ताव आया। तीसरी बार निविदा आमंत्रित की गई तो लगभग 11 प्रतिशत Below दर सामने आने की बात कही गई। इसके बाद चौथी बार प्रक्रिया में लगभग 1 प्रतिशत Above दर का प्रस्ताव सामने आया।
यहां सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल दरों का ऊपर-नीचे होना नहीं, बल्कि यह बताया जा रहा है कि चारों निविदा प्रक्रियाओं में ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा के दौरान एक ही परिवार से संबंधित दो कंपनियां ही निविदाकर्ता के रूप में सामने आईं।
यही बिंदु अब सामान्य सभा में चर्चा का प्रमुख आधार बना है।
60 लाख का अंतर—निगम के लिए आर्थिक सवाल
निविदा में Above और Below दरों के बीच अंतर का सीधा प्रभाव निगम के वित्तीय हित पर पड़ता है। सामान्य सभा में हुई चर्चा के अनुसार, अलग-अलग दरों के कारण निगम को लगभग 60 लाख रुपये के आर्थिक अंतर का सामना करना पड़ सकता है।
यह राशि महज एक आंकड़ा नहीं है। नगर निगम के स्तर पर 60 लाख रुपये से सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल अथवा अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई विकास कार्यों को गति दी जा सकती है। ऐसे में निविदा की दर और निगम पर पड़ने वाले वित्तीय भार का परीक्षण केवल तकनीकी विषय न रहकर सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ा विषय बन जाता है।
सवाल टेंडर से ज्यादा प्रतिस्पर्धा का
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं है कि किसी कंपनी ने Above अथवा Below दर क्यों दी। टेंडर प्रक्रिया में विभिन्न दरों पर निविदा आना स्वाभाविक है और अंतिम निर्णय तकनीकी पात्रता, वित्तीय निविदा तथा शासन के लागू नियमों के अनुरूप होना चाहिए।
लेकिन सवाल यह है कि चार अलग-अलग निविदा प्रक्रियाओं में अन्य ठेकेदारों की प्रभावी भागीदारी क्यों दिखाई नहीं दी?
क्या यह महज संयोग है कि बार-बार एक ही परिवार से संबंधित दो कंपनियां निविदा प्रक्रिया में सामने आईं?
क्या निगम प्रशासन ने प्रतिस्पर्धा पर्याप्त बनाने के लिए सभी संभावित ठेकेदारों तक निविदा की जानकारी और अवसर पहुंचने की स्थिति का परीक्षण किया?
क्या निविदा की दरों में लगातार हुए बदलाव से निगम के वित्तीय हित पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत आकलन किया गया?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या प्रक्रिया नियमसम्मत होने के साथ-साथ वास्तविक प्रतिस्पर्धा की कसौटी पर भी खरी उतरती है?
इन सवालों का उत्तर तकनीकी दस्तावेजों और निविदा प्रक्रिया के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकता है।
अब सामान्य सभा की मुहर पर टिकी निगाहें
मामला सामान्य सभा के एजेंडे में आने के बाद अब निगाहें सदन के निर्णय पर टिक गई हैं। तकनीकी परीक्षण, निविदा की शर्तें, प्राप्त प्रस्ताव, दरों का तुलनात्मक विवरण और निगम के वित्तीय हित—इन सभी पहलुओं पर विचार के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
यदि प्रक्रिया नियमों के अनुरूप पाई जाती है तो उसका निर्णय सामने आएगा, लेकिन यदि प्रतिस्पर्धा अथवा वित्तीय हित से जुड़े कोई प्रश्न रिकॉर्ड में सामने आते हैं, तो उनका भी स्पष्ट प्रशासनिक परीक्षण आवश्यक होगा।
कैनाल रोड शहर की महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी से जुड़ा निर्माण कार्य है। इसलिए सवाल केवल सड़क बनने का नहीं, बल्कि यह भी है कि सड़क निर्माण के लिए सार्वजनिक धन का उपयोग किस दर पर, कितनी प्रतिस्पर्धा के बीच और किस प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।
अब देखना यह है कि सामान्य सभा Above-Below की दरों के इस अंतर को किस नजरिए से देखती है—महज तकनीकी प्रक्रिया के रूप में या निगम के वित्तीय हित से जुड़े व्यापक प्रश्न के रूप में। अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कैनाल रोड का यह टेंडर निगम के लिए आर्थिक रूप से किस दिशा में जाता है।