शौर्यपथ विशेष /
दुर्ग। इंदिरा मार्केट में नाली निर्माण कार्य की गुणवत्ता और ढलान की जांच को लेकर महापौर अलका बाघमार ने औचक निरीक्षण किया। सभापति श्याम शर्मा एवं निगम अधिकारियों के साथ पहुंचीं महापौर ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा की जानकारी ली तथा अधिकारियों को तकनीकी मापदंडों के अनुरूप कार्य कराने के निर्देश दिए। महापौर ने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
महापौर का यह निरीक्षण निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन इसी के साथ शहर की जमीनी व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि महापौर की पैनी नजर नाली की ढलान तक पहुंच रही है, लेकिन सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर हो रहे बड़े अतिक्रमण तक क्यों नहीं?
सुराना कॉलेज के सामने फल दुकानों द्वारा सड़क तक कब्जा कर व्यापार किए जाने से राहगीरों को परेशानी होने की शिकायतें हैं। इंदिरा मार्केट में भी कुछ बड़े दुकानदारों द्वारा दुकानों का सामान सड़क और सार्वजनिक हिस्सों तक फैलाने की स्थिति बताई जाती है। ऐसे में नागरिकों का सवाल है कि यदि छोटे पसरा कारोबारियों के खिलाफ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा सकती है तो बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए भी वही मापदंड क्यों नहीं?
गुमटी मामले की शिकायत पर कार्रवाई कब?
नगर निगम की गुमटियों से जुड़े करीब 50 लाख रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में शिकायत किए जाने के बावजूद जांच और कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। निर्माण कार्य में पेवर ब्लॉक की गुणवत्ता की जांच के लिए मौके पर पहुंचने वाली महापौर से नागरिक यह भी अपेक्षा कर रहे हैं कि वित्तीय अनियमितता से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए भी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट और समयबद्ध निर्देश दिए जाएं।
वहीं धंमधा नाका में कचरे के ढेर, गणेश मंदिर के सामने कथित अवैध निर्माण तथा बस स्टैंड में अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद भी राम रसोई के संचालन और आसपास के कब्जों को लेकर भी निगम की कार्रवाई पर सवाल बने हुए हैं।
प्रेस विज्ञप्ति का सुशासन और जमीन की हकीकत
नगर निगम की प्रेस विज्ञप्तियों में सुशासन, गुणवत्तापूर्ण विकास और आम जनता के हितों की बात प्रमुखता से सामने आती है। लेकिन शहर की सड़कों, बाजारों, सफाई व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों की स्थिति को देखकर नागरिक यह सवाल पूछ रहे हैं कि सुशासन का पैमाना केवल निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच है या फिर हर तरह के अतिक्रमण और अव्यवस्था पर समान कार्रवाई भी इसका हिस्सा है?
नगर निगम की सामान्य सभा में सत्ता पक्ष के पार्षदों की ओर से भी समय-समय पर महापौर परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठना इस बहस को और गंभीर बनाता है।
महापौर द्वारा निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सख्ती का संदेश दिया गया है। अब शहर यह देखना चाहता है कि यही सख्ती बड़े अतिक्रमण, सफाई व्यवस्था और वित्तीय अनियमितता की शिकायतों पर भी दिखाई देती है या नहीं।
क्योंकि सुशासन की असली परीक्षा प्रेस विज्ञप्ति में नहीं, बल्कि शहर की सड़कों और आम जनता को मिलने वाली व्यवस्था में होती है।