दुर्ग / शौर्यपथ /
एक तरफ प्रदेश की भूपेश सरकार किसानो के हित में केंद्र से कर्जा लेकर किसानो को समर्थन मूल्य में धान खरीद रही , बस्तर क्षेत्र के नगर नार स्टील प्लांट को निजी हाथो में ना देकर शासकीय करण कर रही ताकि रोजगार के साथ साथ क्षेत्र के निवासियों की तरक्की हो सके वही विवादित चंदुलाल चंद्राकर मेडिकल कालेज का शासकीयकरण कर आम जनता के हितो और सुविधाओ का ध्यान दे रही है वही दुर्ग की निगम की बाकलीवाल सरकार द्वारा निगम की शासकीय संपत्ति जो आम जनता के सुविधाओ के लिए बनाई गयी थी उसे बेचने का विचार कर रही है .
मामला है निगम के मोती काम्प्लेक्स की दुकानों का जिसका निर्माण निगम ने करवाया और इसे व्यापारियों की लीज पर दे दिया इस खुबसूरत काम्प्लेक्स में निगम ने आम जनता के चलने के लिए बरामदा का भी निर्माण किया है ताकि बाज़ार में यातयात का दबाव कम हो और बाजार एक खुबसूरत बाजार के रूप में अपनी पहचान बना सके किन्तु बाज़ार की खूबसूरती पर उस समय ही दाग लगने शुरू हो गए थे जब बाज़ार के तथाकथित सभी समाज के व्यापारियों द्वारा बरामदे पर भी अवैधानिक रूप से कब्ज़ा जमा लिया . बाज़ार की इसी अव्यवस्था के खिलाफ पूर्व में विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस ने कई बार आन्दोलन एवं धरना भी दिया और लगातार निगम की तात्कालिक सरकार पर व्यापारियों को लाभ देने का आरोप भी लगाया किन्तु साल भर हुए सत्ता में आये व्यापारी वर्ग के महापौर धीरज बाकलीवाल की सरकार ने साल भर में एक बार भी ऐसा कोई कदम उठाया जिससे आम जनता को ये सन्देश जाए कि दुर्ग निगम की सरकार आम जनता के हितो की रक्षा के लिए है .
पूरा शहर जानता है कि दुर्ग इंदिरा मार्केट के निगम के व्यासायिक परिसर में किस तरह दुकानदारों द्वारा सडक तक सामान फैला कर व्यापार किया जाता है किन्तु बाकलीवाल सरकार द्वारा शायद ही कोई पहल की हो जिससे इंदिरा मार्केट सुव्यवस्थित और सुन्दर लगे .इसी कोशिश में जब तात्कालिक बाज़ार प्रभारी द्वारा कड़ाई बरती गयी तो पूरी परिषद् तात्कालिक बाज़ार अधिकारी के विरुद्ध हो गयी निगम इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि पूरी की पूरी परिषद् एक अधिकारी के विरुद्ध हो गयी एकता अच्छी बात है किन्तु जिस प्रदेश में कांग्रेस की सरकार हो जिस निगम में कांग्रेस की सरकार उस जगह एक अधिकारी के विरोध का कारण समझ नहीं आया किन्तु जैसे ही बाजार विभाग अन्य हाथो में गया शहर में अवैध होर्डिंग्स की भरमार हो गयी क्या तात्कालिक बाजार अधिकारी अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ थे ?
वर्तमान में ऐसी खबर आ रही है कि निगम की सरकार के परिषद् अब निगम के व्यावसायिक परिसर में आम जनता के लिए बनाए गए बरामदे का सौदा करने का मसौदा तैयार कर लिए है कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि परदे के पीछे किसी बड़े लेन देन का मसौदा भी तैयार हो गया है . अगर ऐसा होता है तो यातायात का दबाव झेल रही जनता इंदिरा मार्केट की अव्यवस्था की साक्षी बनेगी और ये सोंच कर पछताएगी की काश कांग्रेस के पक्ष में मतदान क्यों की ?
आज निगम की सरकार को ये समझाना होगा कि चंद व्यापारियों के भले के लिए उठाया गया कदम कही भविष्य में उनके लिए ही कांग्रेस के लिए घातक ना बन जाए ?
जिस तरह आज निगम के महापौर गौरव पथ की सुन्दरता के लिए फिक्रमंद होते हुए छोटे व्यापारियों को , ठेले गुमठी वालो को हटाने और गौरव पथ की सुन्दरता को बहाल करने का निर्देश अधिकारियों को देते हुए गौरव पथ का भ्रमण किये ऐसा भ्रमण शहर के बाजारों में क्यों नहीं किये और क्यों नहीं व्यापारियों को समझाइश दे रहे है कि बराम्न्दे को आम जनता के लिए मुक्त कर बाज़ार की सुन्दरता को बनाए रखने में सहयोग करे , व्यापारी वर्ग से आने के कारण बाज़ार के व्यापारियों से उनका पुराना नाता रहा है ऐसे में संबंधो के आधार पर शहर को सुंदर बनाने की सार्थक पहल करने के बजाये बरामदा बेचने की बात कहा तक सही है ...?