संपादकीय समाचार
लेखक – शरद पंसारी | शौर्यपथ समाचार
दुर्ग।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों फिर से हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में मंत्री पद के दो स्थान अभी भी रिक्त हैं, और इसी बीच दुर्ग विधायक गजेंद्र यादव के समर्थकों द्वारा उनके जन्मदिन पर लगाए गए बधाई पोस्टरों ने सियासी चर्चाओं को एक नई दिशा दे दी है।
दुर्ग विधानसभा क्षेत्र के चौक-चौराहों पर लगे इन विशाल बधाई पोस्टरों ने जहां एक ओर विधायक की लोकप्रियता को दिखाने का प्रयास किया है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या यह पोस्टर राजनीति मंत्री पद की दौड़ में कोई असर डाल पाएगी?
गौर करने वाली बात यह है कि पोस्टरों में शामिल कई चेहरे ऐसे लोगों के हैं जो न तो भाजपा संगठन की मूलधारा से जुड़े रहे हैं और न ही पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन काल में किसी विरोध प्रदर्शन या जन आंदोलन में सक्रिय नजर आए। चुनाव के पहले जिन कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर संघर्ष किया, वे चेहरे अब इन बधाई पोस्टरों में कहीं नहीं दिखते।
यह स्थिति केवल दुर्ग तक सीमित नहीं रही है। कुछ महीनों पहले वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन के जन्मदिन पर भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला था, जब उनके पोस्टरों से न केवल वैशाली नगर बल्कि भिलाई नगर क्षेत्र भी पट गया था। उस समय भी राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा थी कि क्या लोकप्रियता का यह दिखावा मंत्रिमंडल तक पहुंच का साधन बन सकता है?
प्रदेश भाजपा में यह सवाल अब प्रमुखता से उभर रहा है कि क्या संगठन की असली शक्ति – वह समर्पित कार्यकर्ता वर्ग जिसने वर्षों तक पार्टी की नींव को सींचा है – को दरकिनार कर, केवल बाहरी समर्थन और पोस्टरबाज़ी के आधार पर किसी को मंत्री बनाया जाएगा?
इस सियासी पटल पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के लिए यह एक महत्वपूर्ण निर्णय होगा कि वह मंत्री पद के लिए चयन में संगठन की गहराई और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की भूमिका को प्राथमिकता दें या फिर सोशल मीडिया और बधाई पोस्टरों में दिखाई दे रही लोकप्रियता को।
फिलहाल, दुर्ग में गजेंद्र यादव के जन्मदिन को भव्य बनाने के लिए समर्थकों की फौज पूरी तरह सक्रिय है। शहर में हर चौराहे पर लगे पोस्टर यही संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि गजेंद्र यादव न केवल जनता के बीच लोकप्रिय हैं, बल्कि अगला मंत्री बनने की दौड़ में भी मजबूत दावेदार हैं।
राजनीति के इस पोस्टर युद्ध में अंतिम निर्णय तो भारतीय जनता पार्टी के संगठन और मुख्यमंत्री के विवेक पर निर्भर करेगा, परंतु यह तय है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की सियासत में यह मुद्दा और भी गर्माने वाला है।
शौर्यपथ समाचार की यह कोशिश हमेशा रहेगी कि वह राजनीतिक घटनाओं के हर पहलू को निष्पक्ष रूप से अपने सम्मानित पाठकों तक पहुंचाए।