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मुल्ला अफरोज की हिरासत रद्द, यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत; कैंसर दवा की खरीद कीमत और MRP में भारी अंतर पर केंद्र से मांगा जवाब
नई दिल्ली / सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान नागरिक अधिकारों और आम मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए। एक ओर अदालत ने संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज की हिरासत रद्द करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत लगाई, वहीं दूसरी ओर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर गंभीर सवाल उठाए।
संभल मामले में हिरासत रद्द, यूपी सरकार पर 10 लाख की लागत
संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की हिरासत को रद्द कर दिया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत भी लगाई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष हुई।
अदालत के इस आदेश का सीधा संबंध मुल्ला अफरोज की हिरासत की वैधानिकता से था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हिरासत रद्द किए जाने और सरकार पर लागत लगाए जाने से संबंधित आदेश को मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कैंसर दवाओं की कीमतों पर अदालत की गंभीर चिंता
इसी दौरान कैंसर और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दवा के खरीद मूल्य और MRP के बीच भारी अंतर पर सवाल उठाए। द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई में एक उदाहरण सामने आया, जिसमें किसी कैंसर दवा की निर्माता से खुदरा स्तर तक कीमत करीब 2,700 रुपये बताई गई, जबकि उसकी MRP करीब 27,000 रुपये थी।
कीमत में इस बड़े अंतर पर अदालत ने गंभीर टिप्पणी की और इसे “carnage” शब्द से संबोधित किया। अदालत ने केंद्र सरकार से दवाओं की कीमतों और इस तरह के मूल्य अंतर से जुड़े मुद्दे पर जवाब मांगा।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों पर महंगी दवाओं के आर्थिक प्रभाव और दवाओं के मूल्य निर्धारण की व्यवस्था से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण रूप से सामने आए। अदालत द्वारा केंद्र से जवाब मांगे जाने के बाद अब सरकार का पक्ष और आगे की न्यायिक कार्यवाही इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
