कर्नाटक / शौर्यपथ / 18 मई को कर्नाटक में सीएम पद की शपथ होने वाली है किन्तु अभी तक प्रदेश का मुखिया कौन होगा इस पर संशय बांकी है . कर्नाटक कांग्रेस के इस बड़ी जीइत के हीरो डीके शिवकुमार ही है जिन्होंने कांग्रेस को बड़ी जीत दिलाने में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई किन्तु इसी के साथ डीके के खिलाफ ईडी के मामलो की लम्बी फेहरिस्त उन्हें सीएम की खुर्सी से दूर ले जा रही है डीके और सीएम की खुर्सी के बीच ईडी के लंबित मामले मजबूत दीवार बने हुए है साल २०१९ से चल रहे मामलो के कारण कांग्रेस हाई कमान डीके के फेवर में इतना बड़ा रिस्क नहीं ले सकती . गिरफ्तारी की तलवार हमेशा डीके के सर पर लटक रही है . कर्नाटक कांग्रेस के सबसे ज्यादा पूंजीपति नेताओ में डीके शिवकुमार का नाम आता है 1400 करोड़ के साम्राज्य के मालिक डीके शिव कुमार की भले ही जीत में अहम् भूमिका हो किन्तु भ्रष्टाचार के मुद्दों पर चुनावी मैदान में उतारी कांग्रेस ने बजरंगबली जी के इम्तिहान को पास करते हुए सत्ता के द्वारा में पहुंची ऐसे में कांग्रेस का हर कदम आगे के लोकसभा चुनाव की स्थिति .
बता दे कि डीके शिवकुमार ने जब पहला चुनाव लड़ा था तब अपनी जमीन गिरवी राखी थी और आज लगभग 1400 करोड़ की समाप्ति के मालिक है जिन पर ईडी एवं अन्य एजेंसियों के कई मामलो में जाच जारी है साल २०१९ में ५० दिनों तक जेल में भी रहे डीके शिवकुमार की मजबूत दावेदारी कमजोर बना रही और कांग्रेस इतनी बड़ी जीत के बाद किसी भ्रष्टाचार मुद्दे पर अपने बड़े नेता को देखना चुनावी साल में स्वीकार नहीं कर पाएगी .
आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है असर
डीके शिवकुमार को अगर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बना दिया और उनके खिलाफ चल रहे मामलों में गिरफ्तारी की तलवार लटकी तो ये पार्टी के लिए एक बड़ा दाग होगा, जिसे आने वाले चुनावों तक साफ कर पाना काफी मुश्किल साबित होगा. यानी सीएम रहते अगर डीके गिरफ्तार होते हैं तो बीजेपी आने वाले चुनावों में इसे जमकर भुना सकती है, जो कांग्रेस कतई नहीं चाहेगी. क्योंकि 2024 से पहले राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे हिंदी बेल्ट वाले राज्यों में चुनाव होने हैं, जहां कांग्रेस को जीत की उम्मीद है. इनमें से दो राज्यों में कांग्रेस सत्ता में भी है. ऐसे में कांग्रेस डीके को सीएम बनाकर कोई भी रिस्क नहीं उठाना चाहेगी. अब कर्नाटक में सीएम के ऐलान से ठीक पहले एक और चीज हुई है, यहां के डीजीपी प्रवीण सूद को केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई का डायरेक्टर बना दिया गया है. जिनका डीके शिवकुमार के साथ 36 का आंकड़ा है. डीके ने सूद के खिलाफ जमकर बयानबाजी की थी, यहां तक कि उनकी गिरफ्तारी तक की मांग भी कर दी थी, वही सूद अब सीबीआई डायरेक्टर के पद पर बैठ गए हैं. वही सीबीआई जो डीके शिवकुमार के खिलाफ जांच कर रही है. ऐसे में ये भी कांग्रेस के लिए एक बड़ा फैक्टर हो सकता है. जिसे समझने के लिए हमने पॉलिटिकल एक्सपर्ट से बात की.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रदीप सिंह ने इस मामले को लेकर कहा, डीके शिवकुमार को सीबीआई और ईडी के मामलों को लेकर सीएम नहीं बनाया जाएगा, ये मैं नहीं मानता हूं. क्योंकि सिद्धारमैया के खिलाफ भी दो केस हैं, जिनमें चार्जशीट भी दायर हो चुकी है. फर्क ये है कि डीके का केस काफी प्रचारित हुआ है. रही बात नए सीबीआई डायरेक्टर की तो अगर डीके के खिलाफ सबूत होंगे, तभी वो उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई कर पाएंगे. कांग्रेस का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो वो पहले भी भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद जनाधार वाले नेता को चुन चुकी है. हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह पर करप्शन के खूब आरोप लगे थे, कांग्रेस ने उन्हें नहीं हटाया. जिसका पार्टी को नुकसान नहीं बल्कि फायदा हुआ. नेता के करप्शन को लोग कोई बड़ा मुद्दा नहीं मानते हैं, लोग अपने नेता को बाकी चीजों को लेकर पसंद करते हैं.
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
साल 2019 में बीएस येदियुरप्पा सरकार ने डीके शिवकुमार के खिलाफ सीबीआई जांच को हरी झंडी दी थी. राज्य सरकार की तरफ से की गई सिफारिश के बाद डीके के खिलाफ सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया और जांच शुरू की गई, इसके बाद डीके कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचे और इस फैसले को चुनौती दी. उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच के लिए कर्नाटक सरकार का आदेश गलत है. हालांकि कर्नाटक हाईकोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली. चुनाव से ठीक पहले अप्रैल 2023 में हाईकोर्ट ने डीके की याचिका को खारिज कर दिया.
कांग्रेस के लिए दो धारी तलवार
राजनीतिक जानकार प्रदीप सिंह ने आगे कहा, अगर डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री रहते हुए गिरफ्तार होते हैं तो कांग्रेस को इसका फायदा भी हो सकता है और नुकसान भी... ये दो धारी तलवार की तरह है. अगर सीएम गिरफ्तार होते हैं तो कांग्रेस इसे बदले की राजनीति के तहत भुना सकती है. वहीं बीजेपी भ्रष्टाचार को मुद्दा बना सकती है. हालांकि आखिर में पब्लिक परसेप्शन ही तय करेगा कि नतीजे क्या होंगे. लोगों में ये राय भी बन सकती है कि ये गलत कर रहे थे, इसीलिए इन्हें गिरफ्तार किया गया, वहीं ये भावना भी बन सकती है कि इन्हें राजनीतिक साजिश के चलते फंसाया जा रहा है. प्रदीप सिंह आगे कहते हैं कि कांग्रेस के पास डीके शिवकुमार को सीएम नहीं बनाने का ये एक बहाना हो सकता है, लेकिन अगर डीके सीएम नहीं बने तो वो पार्टी तोड़ सकते हैं. क्योंकि 2019 में उन्होंने कहा था कि बीजेपी ने उन्हें डिप्टी सीएम का ऑफर दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया. जिसके बाद वो जेल भी गए. यानी पार्टी के लिए उन्होंने काफी कुछ किया. इसके बावजूद अगर उन्हें सीएम नहीं बनाया गया तो डीके नाराज हो सकते हैं.