नई दिल्ली / जनवरी माह से भारत की महिला रेसलरो द्वारा बृजभूषण शरण सिंह पर सेक्सुअल हेरेस्मेंट का आरोप लगाया जा रहा है किन्तु केंद्र सरकार की जाँच की धीमी रफ़्तार आज आम जनता देख रही है साथ ही पूरा विश्व देख रहा है बृज भूषण सिंह पर महिला प्रताड़ना के दो दो आरोप लगने के बाद सुप्रीम कोर्ट की दखलंदाजी के बाद आखिर कार #fir भी दर्ज हो गयी किन्तु केंद्र सरकार के अधीन #delhipolice दिल्ली पुलिस ने अभी तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया क्या भारत का कानून आम जनता के लिए और सत्ता धारी नेताओ के लिए अलग अलग है एक तरफ पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष #rahulgandhi के मामले में निचली अदालत में एक माह में सुनवाई हो गयी और सज़ा भी दे दी गयी वही देश का मान विदेशो में बढ़ाने वाली #womenwrestler महिला पहलवानों को अभी तक न्याय ही नहीं मिला न्याय तो दूर की बात अभी तक भाजपा नेता की गिरफ्तारी नहीं हुई . आज नहीं तो कल भाजपा नेता की गिरफ्तारी होगी ही जिस तरह से विश्व पटल पर भारतीय खिलाडियों का समर्थन बढ़ रहा है और कार्यवाही में देरी हो रही है उस्ससे केंद्र सरकार की छवि ही खराब हो रही है ये अलग बात है कि अंधभक्तो की टोली अब सरकार के बचाव में महिला पहलवानों पर ही आरोप लगाने लगी है . इन सबमे एक बात बड़ी है जो वर्तमान वक्त में दब जा रही है महिला पहलवानों के साथ पूर्व अंतर्राष्ट्रीय खिलाडियों , कई दिग्गजों , किसान संगठनो के आने के बाद अब केंद्र सरकार के पास ये अच्छा अवसर मिल गया कि सभी का ध्यान सिर्फ पहलवानों की तरफ खिंच लिया गया . जिसके कारण भारत के कई अन्य ज्वलंत मुद्दे जैसे बेरोजगारी , महंगाई , स्वास्थ्य , उद्योग , सड़क पानी जैसे मुलभुत आवश्यकताओं की तरफ से सभी का ध्यान हटा कर सिर्फ एक तरफ मोड़ दिया गया अब सब तरफ यही चर्चा हो रही है .
एक तरफ महिला सम्मान की बात होती है किन्तु विश्व मंच पर देश का नाम रोशन करने वालो के साथ ही न्याय की उम्मीद नहीं दिखना बेटियों का सम्मान करने की बात खोखली ही साबित हो रही है . #bjp भाजपा के महिला नेताओ को भी बेटियों के सम्मान की ज्यादा चिंता नहीं दिख रही उन्हें तो बस कही से किसी कोने से कोई लव जिहाद का मामला दिख जाए बस फिर क्या कूद पड़ती है विपक्षी सरकार पर आरोप लगाने में .
आज महिला पहलवानों के पक्ष में गवाही के रूप में सवा सौ से ज्यादा गवाह मौजूद होने के बाद भी गिरफ्तारी ना करना भी सरकार की ही कोई निति होगी . किसान संगठन ने एक बार फिर आन्दोलन की बात कह दी है आन्दोलन भी होगा और यह सब न्याय और जांच का खेल भी अभी कई दिनों चलेगा जब तक सब इसी में व्यस्त रहेंगे . तब तक केंद्र सरकार पर पक्षपात का आरोप लगता रहेगा और आम जनता की मुलभुत आवश्यकताओ पर मांगो पर निकलने वाली आवाज धीमी पड़ जाएँगी आखिर यही तो निति है लोकतंत्र में कि छोटे से मामले को भी खूब उछालो और मुख्य समस्याओ को दबा दो आज महिला पहलवानों के लिए सभी आगे बढे हुए है और हर तरफ यही चर्चा है जो आने वाले कुछ महीनो तक और रहेगी और इनके खेल जीवन पर , इनके द्वारा मिली उपलब्धि पर वो लोग बहस करेंगे जिन्होंने कभी खेल की दुनिया में मोहल्ले से आगे का सफ़र तय नहीं किया है यही है लोकतंत्र का सुन्दर स्वरुप जहां देश के रियल हीरो के भाग्य का फैसला अनपढ़ और अज्ञानी राजनेता करते है आखिर कब तक यही स्थिति रहेगी आखिर इस तरह के भेदभाव की निति कब तक जारी रहेगी क्या ऐसे ही समाज के साथ नव निर्माण की बात हो रही है जहां विरोधियो को कुचलने की प्रथा शुरू हो गयी क्या लोकतंत्र कही राजतन्त्र की तरफ तो नहीं जा रहा ...