नई दिल्ली। साल 2024 में लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं ऐसे में मोदी सरकार ने किसानों के फसल का समर्थन मूल्य में मामूली बढ़ोतरी कर एक बार फिर किसानों को निराश किया है. मोदी सरकार द्वारा समर्थन मूल्य में जो बढ़ोतरी की गई है उसे अगर बारीकी से देखा जाए तो किसी भी फसल पर 10 से 11% से ऊपर की बढ़ोतरी नहीं हुई है. यह अलग बात है कि सोशल मीडिया में भाजपा समर्थित नेताओं के द्वारा इसे 50% की बढ़ोतरी करार दिया जा रहा है किंतु साथ में अगर देखने वाली बात यह है कि 50% की बढ़ोतरी लागत मूल्य पर नहीं मुनाफे के मूल्य पर है मुनाफे की मूल्य कितनी होती है यह सभी को मालूम है 2014 से लेकर अभी तक देखा जाए तो खुले बाजार में अनाजों की कीमत में दुगनी से ढाई गुनी बढ़ोतरी हुई है किंतु किसानों को समर्थन मूल्य पर 10% तक की बढ़ोतरी का मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के अपने वादे पर आखिरकार एक बार फिर असफल हो गई 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 2022 तक के किसानों की आय दुगनी हो जाएगी अगर फसल के मुनाफे की बड़ोती को ही देखा जाए तो वह भी दुगनी नहीं हुई है मोदी सरकार ने एक बार फिर किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया समर्थन मूल्य पर मामूली बढ़ोतरी कर बड़े-बड़े प्रचार कर चाटुकार मीडिया चैनल इस पर चार चांद लगा रहे हैं और आम जनता को शब्दों के जाल में फसा कर बड़े-बड़े कसीदे गढ़े जा रहे हैं क्योंकि जैसा चलन चल रहा है आजकल की चाटुकार मीडिया चैनल आम जनता को समाचार बता नहीं रहे हैं उन पर समाचार थोप रहे हैं.जबकि वास्तविक स्थिति किसानों से ही और उनके द्वारा हो रहा है आंदोलन से ही सामने नजर आ रही है आखिर का किसानों की आय में दोगुनी वृद्धि कब होगी इसका जवाब ना किसी के पास है ना कोई देना चाहता है क्योंकि जिम्मेदार लोगों ने 10% की बढ़ोतरी को भी घुमा फिरा कर 50% की बढ़ोतरी के प्रचार करना सोशल मीडिया पर शुरू कर दिया है यह तो वैसे ही कहावत हो गई है जैसे जनता से ₹10 लो और पांच रूपये वापस कर वाहवाही लूट लो.