नई दिल्ली / २०१४ में सत्ता में आने के बाद केंद्र सरकार ने नमामि गंगे योजना बना कर गंगा नदी की सफाई की बात कही थी जिसमे 21 हजार करोड़ का बजट भी रखा गया किन्तु वर्तमान स्थिति यह है कि गंगा की सफाई की योजना की गति कछुवे की चाल की तरह चल रही है जबकि इस पर मिली जानकारी के अनुसार अब तक 13 हजार करोड़ खर्च भी हो चुके है वही समय सीमा भी २०२१ में समाप्त हो गयी . नमामि गंगे प्रोजेक्ट को 5 वर्ष का अतिरिक्त समय दे दिया गया है और उस समय में भी दो वर्ष बीत चुके है किन्तु जिस रफ़्तार से कार्य प्रगति पर है उससे यह नहीं लगता कि बचे हुए अतिरिक्त समय पर भी यह प्रोजेक्ट पूरा हो जायेगा .
बता दे कि केंद्र सरकार ने भारत में मां के नाम से पूजे जाने वाली गंगा नदी की सफाई के लिए आज से 8 साल पहले नमामि गंगे की पहल की थी. इसका मकसद नदी की सफाई और उसे उसके पुराने पावन-निर्मल रूप में लौटा लाने का था. किन्तु करोड़ों रुपये भी पड़ गए कम और मां गंगा अब भी रह गई मैली.स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन के तहत गंगा की सफाई के लिए 13000 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं.
पापियों के पाप धोने वाली मोक्षदायिनी गंगा को खुद ही सफाई की पुरजोर दरकार होगी. 9 साल पहले देश के पीएम मोदी द्वारा तब इस प्रोजेक्ट को लेकर कई बाते कही गई थी किन्तु आज इस विषय पर ना तो पीएम मोदी कोई बात कह रहे है और ना ही सरकार के मंत्री .इंसान की हर तरह की गंदगी, अपशिष्ट जैसे पापों को धोते-धोते गंगा नदी दम तोड़ने के कगार पर खड़ी है. यही वजह रही कि भारत सरकार ने दम तोड़ती गंगा नदी को जिलाने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन- एनएमसीजी की शुरुआत की थी. लेकिन गंगा आज भी बिलख रही है कि करके गंगा को खराब, देते गंगा की दुहाई, क्या करे बेचारी कि इसे अपने ही लोग डुबोते हैं...
दरअसल गंगा का ये जिक्र हम अचानक ही नहीं कर रहे हैं. पिछले साल 30 दिसंबर को राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक इसकी एक वजह है. इसमें नमामि गंगे पहल को लेकर कई खुलासे हुए और गंगा को साफ करने की कोशिशों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया.
हीरा बेन को आखिरी विदाई और मां गंगे की फिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर २०२२ को मां हीरा बेन को आखिरी विदाई देने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई. उन्होंने इसी तरीके राष्ट्रीय गंगा परिषद की दूसरी बैठक की भी अध्यक्षता की. ये बैठक तब 3 साल बाद हुई, पीएम मोदी इस बैठक के लिए कोलकाता जाने वाले थे, लेकिन अपनी मां के निधन की वजह से उन्होंने वर्चुअली ही इसमें शिरकत की. इस दौरान नमामि गंगे पहल को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई. किन्तु छह माह बीत गए बैठक को आज भी स्थिति की रफ़्तार सुस्त .
योजना के तहत छोटे शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के विस्तार और गंगा और उसकी सहायक नदियों में सफाई की कोशिशों को बढ़ाने को लेकर बात हुई. गंगा के किनारे हर्बल खेती को बढ़ाने के तरीकों पर भी जोर दिया गया. इसके साथ ही नदी किनारे पर्यटन के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी बल दिया गया.इससे कई लोगों को रोजी-रोटी कमाने के मौके मिल सकते हैं. इस बैठक में सबसे बड़ी बात निकल कर सामने आई कि सरकार साल 2014 से लेकर अब तक गंगा की सफाई पर 13000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है.इसमें सबसे अधिक खर्चा उत्तर प्रदेश को दिया गया.
सफाई पर 9 साल में करोड़ों रुपये खर्च
सरकार के महत्वाकांक्षी नमामि गंगे कार्यक्रम को अमलीजामा पहनाने के लिए जवाबदेह राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन- एनएमसीजी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय गंगा परिषद को इस कार्यक्रम में साल 2014 से अब-तक हुए खर्चे के बारे में जानकारी दी. दरअसल सरकार ने गंगा और उसकी सहायक नदियों का "कायाकल्प" करने के लिए 31 मार्च, 2021 तक की अवधि के लिए 2014-15 में नमामि गंगे की शुरुआत की थी. हालांकि बाद में इस कार्यक्रम को 31 मार्च, 2026 तक 5 साल के लिए और बढ़ा दिया गया था.
जानकारी के मुताबिक केंद्र ने वित्तीय वर्ष 2014-15 से 31 अक्टूबर, 2022 तक एनएमसीजी को कुल 13,709.72 करोड़ रुपये जारी किए हैं. एनएमसीजी ने 13,046.81 करोड़ रुपये की इस रकम में से अधिकांश राज्य सरकारों, स्वच्छ गंगा राज्य मिशनों (एसएमसीजी) और इस कार्यक्रम के तहत परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए अन्य एजेंसियों को खर्च के लिए जारी किए थे. इसमें सबसे अधिक रुपये नदियों को सफाई के लिए उत्तर प्रदेश को दिए गए.
गंगा में व्याप्त गंदगी को लेकर एबीपी न्यूज़ ने खबर प्रकाशित की थी जिसमे कई स्थानों पर गंगा का जल नहाने लायक भी नहीं होने की बात कही थी साथ में एक फोटो भी टैग किया गया था
न्यूज़ की हेड लाइन कुछ ऐसी थी ...
दो साल में 10 गुना गंदी हुई गंगा, बक्सर से लेकर कहलगांव का पानी तो नहाने लायक भी नहीं