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राष्ट्रपति भवन में इतिहास रचा: सी.पी. राधाकृष्णन ने ली 15वें उपराष्ट्रपति पद की शपथ Featured

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ, समारोह में देश के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी - पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी रहे उपस्थित

    नई दिल्ली । एजेंसी ।
भारतीय लोकतंत्र के संवैधानिक इतिहास में शुक्रवार का दिन एक नया अध्याय जोड़ गया। वरिष्ठ नेता सी.पी. राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल में देश के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह अवसर गौरव और संवैधानिक गरिमा का अद्वितीय संगम बन गया, जहाँ देश की लोकतांत्रिक यात्रा का नया पड़ाव दर्ज हुआ।

शपथ ग्रहण समारोह में कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री, संसद के दोनों सदनों के सदस्य, मुख्य न्यायाधीश, संवैधानिक संस्थाओं के प्रमुख और अनेक राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक रंग दिया। आयोजन स्थल पर देश-विदेश के राजनयिक प्रतिनिधियों और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने इसे और अधिक महत्त्वपूर्ण बना दिया। समारोह में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी मौजूद रहे, जिन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।

संविधान और संवाद की जिम्मेदारी
सी.पी. राधाकृष्णन ने शपथ लेने के बाद अपनी संक्षिप्त अभिव्यक्ति दी और कहा कि वे संविधान की गरिमा बनाए रखने तथा लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा, “मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि उच्च सदन में संवाद, सहमति और सकारात्मक बहस की परंपरा को और सशक्त बनाया जाए।”

उपराष्ट्रपति बनने के साथ ही राधाकृष्णन राज्यसभा के सभापति के संवैधानिक पद पर भी आसीन हो गए हैं। अब उनके सामने उच्च सदन की कार्यवाही को गरिमा और संयम के साथ संचालित करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

भव्य लेकिन संयमित आयोजन
राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित यह आयोजन परंपरागत गरिमा और सादगी का अद्भुत समन्वय था। राष्ट्रीय गान और औपचारिकताओं के बीच पूरा वातावरण लोकतांत्रिक गरिमा से परिपूर्ण दिखाई दिया। देश की राजनीति, न्यायपालिका और प्रशासन के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति ने इसे ऐसा अवसर बना दिया, जिसे आने वाले वर्षों तक याद किया जाएगा।

राजनीतिक सफर और अनुभव
सी.पी. राधाकृष्णन का सार्वजनिक जीवन लंबा और विविध रूप से सक्रिय रहा है। विभिन्न संसदीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने अपनी सादगी और संगठनात्मक क्षमता से विशेष पहचान बनाई। उन्हें अब उच्च सदन में संवाद को सार्थक दिशा देने और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करनी होगी।

देश की निगाहें अब राज्यसभा पर
विशेषज्ञों का मत है कि उपराष्ट्रपति के रूप में राधाकृष्णन की भूमिका संसद की दिशा तय करने में निर्णायक होगी। देश की निगाहें अब राज्यसभा पर टिकी हैं, जहाँ वे संवाद की नई संस्कृति और लोकतंत्र की मजबूती की राह प्रशस्त करेंगे।

इस प्रकार देश के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में सी.पी. राधाकृष्णन का पदभार ग्रहण भारतीय लोकतंत्र के लिए एक नए संकल्प और नई ऊर्जा का प्रतीक बन गया है।

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