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विद्यालय की बगिया से थाली तक: बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार

  • devendra yadav birth day

रायपुर/शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला अंतर्गत रामानुजनगर के विद्यालयों में “विद्यालय की बगिया से थाली तक” पहल बच्चों के पोषण और व्यवहारिक शिक्षा का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है। किचन गार्डन की यह अनूठी पहल न केवल छात्रों को ताज़ी और जैविक सब्जियाँ उपलब्ध करा रही है, बल्कि उन्हें खेती, श्रम और पर्यावरण संरक्षण का व्यावहारिक ज्ञान भी दे रही है।

विकासखंड के अंतर्गत माध्यमिक शाला पतरापाली का किचन गार्डन पोषण सुदृढ़ीकरण का प्रेरक उदाहरण बन चुका है। जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशन एवं विकास खंड शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना के तहत विद्यालय परिसर में शिक्षकों की देखरेख में सब्जियों की खेती की जा रही है।

इसी क्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक बगीचे से लगभग 4 किलोग्राम ताज़ी सेमी (फली) की तुड़ाई की, जिसे सीधे मध्यान्ह भोजन में शामिल किया गया। इससे बच्चों को अतिरिक्त पोषण मिल रहा है और भोजन की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

सीख के साथ पोषण

बच्चे स्वयं पौधों की देखभाल, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और तुड़ाई जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। इस प्रक्रिया से वे श्रम का महत्व समझ रहे हैं और कृषि एवं पर्यावरण के प्रति व्यावहारिक ज्ञान अर्जित कर रहे हैं।

विद्यालय के शिक्षक योगेश साहू ने बताया कि योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ जैविक खेती के प्रति जागरूक बनाना है। ताज़ी सब्जियों के उपयोग से मध्यान्ह भोजन की पौष्टिकता बढ़ी है, जिसका सकारात्मक प्रभाव बच्चों के स्वास्थ्य में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।

आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी का पाठ

विद्यालय परिवार का मानना है कि इस तरह की गतिविधियाँ बच्चों में प्रकृति प्रेम, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करती हैं।

इस अवसर पर शिक्षक कृष्णकुमार यादव, अनिता सिंह, योगेश साहू, रघुनाथ जायसवाल सहित अभिभावक एवं स्थानीय समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएँ बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

विद्यालय प्रशासन ने संकल्प लिया है कि किचन गार्डन में आगे भी विभिन्न मौसमी सब्जियों की खेती जारी रखी जाएगी, ताकि बच्चों को निरंतर पौष्टिक आहार और व्यवहारिक शिक्षा मिलती रहे।

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शौर्यपथ

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