रायपुर, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों को आजीविका का साधन बनाने की पहल के तहत धमतरी जिले में महिलाओं को मत्स्य पालन से जोड़ा जा रहा है। वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत सीएसआर सहयोग से 55 आजीविका डबरियों के माध्यम से महिलाओं को मछली और झींगा उत्पादन की गतिविधियों से जोड़ा गया है। इसके अलावा 90 नई आजीविका डबरियां बनाई जा रही हैं।
भूखापारा, माडमशिल्ली, बिन्द्रापाली, डबरीनाला, चनागांव और छिन्दौरी सहित जिले के विभिन्न गांवों में यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। आजीविका डबरियों में वर्षा जल का संरक्षण करने के साथ मत्स्य पालन और जरूरत के अनुसार सिंचाई में पानी का उपयोग भी किया जा सकता है।
एक डबरी में 1,600 झींगा और 320 मछली बीज
योजना के तहत प्रत्येक डबरी में 1,600 झींगा तथा 320 भारतीय प्रमुख कार्प मछलियों के बीज डाले गए हैं। आगामी छह माह में प्रति डबरी औसतन 50 हजार रुपये लाभ मिलने का अनुमान है। हालांकि, वास्तविक लाभ उत्पादन, जल की गुणवत्ता, देखरेख और बाजार मूल्य पर निर्भर करेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मछलियों की वृद्धि 800 ग्राम से एक किलोग्राम तक दर्ज की गई है।
महिलाओं को गांव में ही रोजगार का अवसर
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को पारंपरिक आजीविका के साथ आय का अतिरिक्त साधन उपलब्ध कराना है। मत्स्य पालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की संभावनाएं हैं। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, उचित आहार, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार तक पहुंच महत्वपूर्ण होगी।
धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जल संसाधनों के योजनाबद्ध उपयोग से महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने तकनीकी मार्गदर्शन, नियमित निगरानी और बेहतर विपणन व्यवस्था पर जोर दिया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने भी कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित ऐसी गतिविधियां ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं।