नरेश देवांगन की ख़ास रिपोर्ट
जगदलपुर, शौर्यपथ।
बस्तर का किसान आज फिर से ठगा गया है। जिन कंधों पर देश की खाद्य सुरक्षा टिकी है, उन्हीं किसानों को खाद के नाम पर लूटा जा रहा है। मानसून दस्तक दे चुका है, खेतों में बुवाई का समय है, मगर किसान को समय पर खाद नहीं मिल रही – और जो मिल रही है, वह भी "ओवररेट" और "जबरन पैकेज" के साथ।
कृषि विभाग की नाक के नीचे बस्तर जिले में खाद माफिया बेलगाम हो चुके हैं। किसान यूरिया की एक बोरी के लिए 100 से 120 रुपये तक अधिक भुगतान कर रहे हैं, और दुकानदारों की मनमानी का यह आलम है कि बिना GST बिल के खाद दी जा रही है।
कहीं विभाग की मिलीभगत तो नहीं?
प्रश्न बड़ा है और गंभीर भी – क्या कृषि विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारी इस गोरखधंधे में साझेदार हैं? किसान तो यही कह रहे हैं। उनकी मानें तो विभागीय अधिकारियों को सब पता है, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं कर रहा।
जबर्दस्ती नेनो यूरिया थोपने की रणनीति
तोकापाल के किसान आयुतु ने आरोप लगाया कि लक्ष्मीनाथ कृषि केंद्र से खाद खरीदते समय दुकानदार ने 480 रुपये वसूले और जब उसने बिल मांगा, तो न केवल मना कर दिया गया बल्कि यूरिया के साथ जबरन 500 ml की नेनो यूरिया की बोतल भी थमा दी गई। इनकार करने पर जवाब मिला – “बिना नेनो लिए यूरिया नहीं मिलेगा।”
सोमारू नाग, जो जगदलपुर ब्लॉक से हैं, ने बताया कि उनके इलाके के महालक्ष्मी कृषि केंद्र में यूरिया की बोरी 410 रुपये में बेची जा रही है, वह भी बिना पक्के बिल के।
जब इस संबंध में महालक्ष्मी कृषि केंद्र के संचालक से बात की गई, तो उन्होंने कबूल किया कि “हमें ऊपर से निर्देश मिले हैं – जितनी बोरी यूरिया देंगे, उतनी नेनो यूरिया देनी ही पड़ेगी।”
विभाग चुप, किसान पस्त
पूरा मामला सीधे तौर पर सरकारी नीति और किसानों के विश्वास के साथ खिलवाड़ है। सत्ताधारी सरकार की नीतियां किसानों के हित में भले हों, लेकिन ज़मीन पर उन्हें पलीता लगाया जा रहा है। सवाल यह भी है कि अगर खाद की कोई कमी नहीं है, तो फिर स्टॉक के बावजूद ब्लैक क्यों हो रही है?
सरकार को देना होगा जवाब
यदि सरकार किसानों के साथ खड़ी है, तो इन माफियाओं और विभागीय मिलीभगत पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई करनी होगी। वरना सुशासन की जगह कुशासन का ठप्पा लगते देर नहीं लगेगी।