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जिले के सबसे बड़े अस्पताल पर उठे गंभीर सवाल, रेफर संस्कृति और अव्यवस्था से मरीज बेहाल
दुर्ग। जिले का सबसे बड़ा शासकीय स्वास्थ्य संस्थान कहलाने वाला जिला अस्पताल दुर्ग आज स्वयं गंभीर सवालों के घेरे में खड़ा नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये की शासकीय सुविधाओं, संसाधनों और योजनाओं के बावजूद मरीजों को राहत मिलने की बजाय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि यदि किसी मरीज को सामान्य आंख का उपचार भी कराना हो और उसे शुगर अथवा बीपी जैसी सामान्य बीमारी हो, तो जिला अस्पताल के कई चिकित्सक तत्काल “हायर सेंटर रेफर” का रास्ता दिखाने लगते हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि जब प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है, तब जिला मुख्यालय के सबसे बड़े अस्पताल में आखिर मरीजों को उपचार देने की इच्छाशक्ति क्यों दिखाई नहीं दे रही?
क्या सिर्फ “सामान्य मरीजों” का अस्पताल बनकर रह गया जिला अस्पताल?
सूत्रों और मरीजों की शिकायतों के अनुसार अस्पताल में ऐसी स्थिति बन चुकी है मानो यहां केवल वही मरीज स्वीकार्य हों जो “पर्ची से ठीक हो जाएं।” शुगर और बीपी जैसी बीमारियां आज लगभग हर तीसरे-चौथे व्यक्ति में सामान्य रूप से पाई जाती हैं, जिन्हें नियंत्रित कर उपचार देना चिकित्सा प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा माना जाता है। निजी चिकित्सकों का भी मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में मरीजों का इलाज संभव है।
लेकिन आरोप यह है कि जिला अस्पताल के कई चिकित्सक मरीजों को संभालने और जोखिम लेकर उपचार करने की बजाय तत्काल रायपुर रेफर करना अधिक आसान समझते हैं।
टेस्ट कराओ, मेडिकल फिटनेस लो… फिर भी इलाज नहीं!
सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर सामने आ रही है कि मरीजों से पहले अनेक प्रकार की जांचें करवाई जाती हैं, मेडिकल फिटनेस दस्तावेज भी लिए जाते हैं, लेकिन अंत में इलाज से मना कर दिया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि उपचार करना ही नहीं था, तो मरीजों को दिनों तक जांच और कागजी प्रक्रिया में क्यों उलझाया गया?
ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी उम्मीद लेकर आने वाले मरीज आर्थिक, मानसिक और शारीरिक रूप से टूटते नजर आ रहे हैं।
सिविल सर्जन की भूमिका पर भी सवाल
वर्तमान में डॉ. मिंज जिला अस्पताल में सिविल सर्जन के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन अस्पताल परिसर की व्यवस्थाओं, मरीजों की परेशानियों और चिकित्सकीय मनमानी पर उनकी प्रशासनिक पकड़ को लेकर भी अब गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।
जब इस विषय पर चर्चा की गई तो जवाब “मामले को देखते हैं” तक सीमित बताया गया। इससे यह धारणा और मजबूत हो रही है कि अस्पताल प्रशासन या तो समस्याओं से अनभिज्ञ है या फिर कार्रवाई की इच्छाशक्ति नहीं दिखा रहा।
जच्चा-बच्चा केंद्र में भी रेफर संस्कृति?
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार जिले के सबसे बड़े जच्चा-बच्चा केंद्र में भी बीपी और शुगर का हवाला देकर गर्भवती महिलाओं को बाहर रेफर किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। जबकि कई मामलों में वही मरीज बाद में दुर्ग शहर के छोटे निजी नर्सिंग होम में उपचार लेकर स्वस्थ हो जाते हैं।
यदि यह स्थिति सही है तो यह केवल चिकित्सा व्यवस्था पर नहीं, बल्कि शासन द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे करोड़ों रुपये के खर्च पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
अस्पताल परिसर में अव्यवस्था का अंबार
जिला अस्पताल परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
अस्पताल परिसर में बाहरी एजेंटों की सक्रियता
मरीजों को निजी नर्सिंग होम की ओर मोड़ने की चर्चाएं
दवाइयों के लिए बाहर भटकते मरीज
परिसर के भीतर अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियां
इन सबके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता लोगों को हैरान कर रही है।
लिफ्ट तक नहीं, मरीज सीढ़ियों के सहारे
इतने बड़े अस्पताल में आज भी समुचित लिफ्ट सुविधा का अभाव मरीजों की परेशानी बढ़ा रहा है। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज बार-बार जांच एवं उपचार के लिए सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर हैं।
विडंबना यह है कि निजी नर्सिंग होम के लिए जहां लिफ्ट जैसी सुविधाएं आवश्यक मानी जाती हैं, वहीं जिले के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल में यह मूलभूत सुविधा तक प्रभावी रूप में नजर नहीं आती।
सुशासन तिहार बनाम जमीनी हकीकत
एक ओर प्रदेश में सुशासन और जनकल्याण के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुर्ग जिला अस्पताल की स्थिति उन दावों को खुली चुनौती देती दिखाई दे रही है। जिले में कैबिनेट मंत्री, दर्जा प्राप्त मंत्री और राष्ट्रीय स्तर के जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद यदि जिला अस्पताल की स्थिति ऐसी है, तो ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे अस्पतालों की हालत क्या होगी, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
सबसे बड़ा सवाल… जवाबदेह कौन?
जिला अस्पताल आखिर मरीजों के उपचार के लिए है या सिर्फ रेफर करने के लिए?
क्या सरकारी अस्पतालों में जिम्मेदारी से ज्यादा “औपचारिकता” हावी हो चुकी है?
क्या करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मरीजों को भरोसेमंद इलाज नहीं मिल पाएगा?
और सबसे बड़ा प्रश्न — क्या जिला अस्पताल प्रशासन एवं सिविल सर्जन इस पूरी व्यवस्था की नैतिक जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं?
दुर्ग की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि व्यवस्था में ठोस सुधार और जिम्मेदारों पर कार्रवाई चाहती है।
बालोद संवाददाता की ख़ास रिपोर्ट
बालोद/शौर्यपथ।
जिले में अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन पर रोक लगाने प्रशासन लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी क्रम में विकासखंड डोंडी के ग्राम पंचायत घोठिया से प्राप्त शिकायत के आधार पर पुलिस एवं खनिज विभाग ने संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रेत परिवहन कर रहे दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त किए हैं। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध रेत कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार डोंडी थाना प्रभारी उमा ठाकुर के निर्देश पर आज सुबह पुलिस टीम द्वारा औचक एवं सघन जांच अभियान चलाया गया। जांच के दौरान दो ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना किसी वैध अनुमति के रेत परिवहन करते पाए गए। पुलिस ने तत्काल दोनों वाहनों को मौके पर ही जब्त कर अभिरक्षा में सुरक्षित रखा। मामले में नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय की खनिज शाखा को प्रेषित किया जा रहा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनन एवं परिवहन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लगातार की जा रही ऐसी कार्रवाइयों का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना तथा शासन को होने वाली राजस्व हानि को रोकना है।
खनिज अधिकारी प्रवीण चंद्राकर ने कहा कि जिला प्रशासन अवैध खनिज परिवहन के मामलों में “शून्य सहिष्णुता” की नीति पर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित विभागों को सतत निगरानी एवं कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
ग्राम पंचायत घोठिया की सरपंच ममता मंडावी ने बताया कि गांव में लंबे समय से मना करने के बावजूद कुछ लोग लगातार रेत निकाल रहे थे। ग्रामीणों द्वारा कई बार विरोध जताने के बाद अब प्रशासन ने कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि आगे भी अवैध खनन के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
इस संबंध में विधायक प्रतिनिधि कैलाश राजपूत ने कहा कि बालोद जिले में लंबे समय से अवैध रेत परिवहन एवं उत्खनन के कई मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से लगातार निगरानी और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक वाहन अवैध खनन एवं परिवहन में लगे हुए थे, लेकिन कार्रवाई के समय केवल दो वाहन ही मौके पर मिले। ऐसे में क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं से कार्रवाई की सूचना पहले ही लीक हो गई, जिसके चलते अन्य वाहन मौके से फरार हो गए।
हालांकि विभागीय तत्परता से दो वाहनों पर कार्रवाई होने के बाद प्रशासन की सख्ती साफ दिखाई दी, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठने लगे हैं कि कहीं अंदरखाने “विभीषण” की भूमिका निभाने वाले लोग अवैध कारोबारियों को संरक्षण तो नहीं दे रहे।
फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई को जिले में अवैध खनन और परिवहन पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।
पिथौरा। गुरु घासीदास स्टेडियम सपोस ग़बोद में आयोजित प्रदेश स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता का शुभारंभ मुख्य अतिथि जनपद पंचायत अध्यक्ष ऊषा पुरषोत्तम घृतलहरे ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद पटेल ने की। वहीं विशेष अतिथि के रूप में भाजपा जिला प्रवक्ता स्वप्निल तिवारी, जनपद सभापति कवलजीत छाबड़ा, जनपद सदस्य पुरषोत्तम घृतलहरे, सरपंच किशोर बघेल, बसना विधायक के निज सहायक नरेंद्र बोरे उपस्थित रहे। अतिथियों ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर पूजन-अर्चन के साथ प्रतियोगिता का शुभारंभ कराया।
मुख्य अतिथि ऊषा पुरषोत्तम घृतलहरे ने खिलाड़ियों एवं उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि सपोस गांव हमेशा से विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए जाना जाता रहा है। अब प्रदेश स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन भी इस गांव की पहचान बनता जा रहा है। उन्होंने आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को आगे लाने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं, जिसके चलते ग्रामीण खिलाड़ियों की खेल प्रतियोगिताओं में सहभागिता लगातार बढ़ रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जनपद उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद पटेल ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए खेल अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में खेल को शामिल करना चाहिए तथा प्रतिदिन कुछ समय खेल गतिविधियों के लिए अवश्य निकालना चाहिए।
विशेष अतिथि भाजपा जिला प्रवक्ता स्वप्निल तिवारी ने कहा कि सपोस का यह मैदान वर्षों से सैकड़ों खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर प्रदान करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रतियोगिता निश्चित रूप से ग्रामीण खेल प्रतिभाओं के लिए एक बेहतर मंच तैयार करेगी।
जनपद सदस्य पुरषोत्तम घृतलहरे ने कहा कि वर्तमान भागदौड़ और प्रतिस्पर्धा के दौर में इस प्रकार के आयोजन सराहनीय हैं। कार्यक्रम में स्वागत भाषण सरपंच किशोर बघेल ने दिया तथा संचालन विजय बघेल ने किया।
प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों एवं दर्शकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से हरिचरण प्रधान, गुलापी धुबई साहू, संतोष ठाकुर, अश्वनी विशाल, बबीता बघेल, पूजा सिंह ठाकुर, नरोत्तम साहू, पुनीत टंडन, मनोहर दीवान, विकास बघेल, त्रिलोक ठाकुर, जीवन लाल दाता, रवि बंजारा, सुबई साहू, ताम्रध्वज साहू, कमल रात्रे, छगन बेनर्जी रवि बंजारा मोतीलाल ध्रुव दुलमानी यादव एसडीओ यसहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
बालोद - सगाई में गए परिवार के सूने घर पर हाथ साफ करने वाले तीन चोर पुलिस के हत्थे चढ़ गए। देवरी थाना पुलिस ने 6 लाख से ज्यादा के सोने-चांदी के गहनों और नगदी के साथ तीनों आरोपियों को धर दबोचा।
26 अप्रैल की रात परसुली गांव में कमलेश केशरिया अपने पूरे परिवार के साथ अर्जुनी सगाई कार्यक्रम में गया था। पीछे से चोरों ने मौका देखकर घर का कुंदा तोड़ा और अलमारी में रखा सोने का रानी हार, मंगलसूत्र, चांदी की पायल, करधन और 51 हजार नगद पार कर दिया। सुबह घर लौटे परिजनों के होश उड़ गए।
एसपी योगेश पटेल के निर्देश पर थाना प्रभारी मनीष शेण्डे की टीम ने जाल बिछाया। मुखबिर की सूचना पर गांव के ही भीखम लाल सिन्हा, रामेश्वर उर्फ झम्मन सोनकर और जितेश उर्फ जीतू सोनकर को उठाया। सख्ती से पूछताछ में तीनों टूट गए।
चोरों ने सारा माल खरखरा नंदी के श्मशान घाट में गड्ढा खोदकर छिपा रखा था। पुलिस ने मौके से 1 किलो 650 ग्राम चांदी, 27 ग्राम से ज्यादा सोना और 34 हजार नगद बरामद कर लिया। कुल 6,02,709 रुपये का माल जब्त हुआ।
फिलहाल तीनों सलाखों के पीछे हैं। इस पूरी कार्रवाई में देवरी थाना और साइबर सेल बालोद की टीम ने बाजी मारी।
ब्यूरो चीफ: प्रवीण गुप्ता
कवर्धा।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित नेशनल लोक अदालत ने कबीरधाम जिले में न्याय को सरल, त्वरित और मानवीय स्वरूप देने का उदाहरण प्रस्तुत किया। जिले में आयोजित इस महाअभियान में 31 हजार से अधिक प्रकरणों का सफल निराकरण किया गया, वहीं वर्षों से बिखरे परिवारों में भी खुशियां लौट आईं।
छत्तीसगढ़ में आयोजित इस नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने वर्चुअल माध्यम से किया। इसके पश्चात जिला कबीरधाम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष कु. संघरत्ना भतपहरी ने लोक अदालत का विधिवत शुभारंभ किया।
नेशनल लोक अदालत को यादगार बनाने के लिए जिला न्यायालय परिसर में विशेष सेल्फी प्वाइंट बनाया गया था, जहां पक्षकारों ने तस्वीरें लेकर इस अवसर को यादगार बनाया। इसके साथ ही आयोजित स्वास्थ्य शिविर में पहुंचे लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श का लाभ भी लिया। न्यायालय परिसर का सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण वातावरण लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करता नजर आया।
जिले में कुल 11 खण्डपीठ गठित की गई थीं, जिनमें 10 खण्डपीठ जिला मुख्यालय कवर्धा तथा 1 खण्डपीठ व्यवहार न्यायालय पंडरिया में संचालित की गई।
इन खण्डपीठों में निम्न प्रकार के प्रकरण रखे गए थे—
नेशनल लोक अदालत के दौरान विभिन्न खण्डपीठों में उल्लेखनीय निराकरण हुए—
इस प्रकार जिले में कुल 31,734 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 10 करोड़ 77 लाख 03 हजार 433 रुपये की राशि से जुड़े मामलों का समाधान किया गया।
परिवार न्यायालय में पहुंचे एक मामले में पति की शराब की लत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया था। पति अपनी आय का अधिकांश हिस्सा शराब में खर्च कर पत्नी और दो बच्चों को प्रताड़ित करता था। परेशान होकर पत्नी ने अलग रहकर भरण-पोषण की मांग करते हुए न्यायालय की शरण ली थी।
लोक अदालत में पीठासीन अधिकारी द्वारा दोनों पक्षों को समझाइश और परामर्श दिया गया। अंततः पति-पत्नी ने आपसी सहमति से फिर साथ रहने और परिवार को दोबारा बसाने का निर्णय लिया। इस समझौते ने न केवल एक परिवार को टूटने से बचाया बल्कि बच्चों के भविष्य को भी नई उम्मीद दी।
एक अन्य प्रकरण में वर्ष 2025 में विवाह करने वाले नवविवाहित दंपत्ति शादी के महज 20-25 दिनों बाद विवाद के कारण अलग हो गए थे। मामला परिवार न्यायालय तक पहुंच गया था।
परिवार न्यायालय में हुई परामर्श प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों ने अपने मतभेद भुलाकर पुनः साथ रहने की सहमति दी। इस समझौते के साथ उनके दाम्पत्य जीवन में फिर से खुशियों की शुरुआत हुई।
कबीरधाम में आयोजित नेशनल लोक अदालत केवल प्रकरणों के निराकरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने समाज में संवाद, समझौता और पारिवारिक एकता का मजबूत संदेश भी दिया। त्वरित एवं सुलभ न्याय व्यवस्था के माध्यम से हजारों लोगों को राहत मिली और कई परिवारों के जीवन में नई शुरुआत संभव हो सकी।
ब्यूरो चीफ: प्रवीण गुप्ता
कवर्धा।
छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर भोरमदेव मंदिर परिसर को पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में निर्माण कार्य तेज़ी से जारी है। निर्माणाधीन भोरमदेव पर्यटन कॉरिडोर की प्रगति की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सभी निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना के बेस स्ट्रक्चर और ग्राउंड वर्क को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तय समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए।
भोरमदेव मंदिर प्रांगण में आयोजित समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री ने अब तक हुए कार्यों, फील्ड प्रोग्रेस और आगामी कार्ययोजना की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान है, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि पिछली समीक्षा के बाद से प्रत्येक सोमवार को प्रोग्रेस मॉनिटरिंग की जा रही है। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि निर्माण एजेंसियां पर्याप्त संख्या में मजदूर, तकनीकी स्टाफ और मशीनरी तैनात करें ताकि कार्यों की गति प्रभावित न हो।
उन्होंने पर्यटन विभाग के इंजीनियरों को भी निर्देशित किया कि वे निर्माण कार्यों में तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करें और गुणवत्ता मानकों की सतत निगरानी करें।
समीक्षा बैठक में भोरमदेव मंदिर परिसर, सरोवर, मड़वा महल, छेरकी महल और सरोदा डैम से जुड़े विकास कार्यों की प्रगति पर विस्तृत चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री ने आगामी बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से सरोवर क्षेत्र में निर्माण कार्यों की कार्ययोजना व्यवस्थित ढंग से तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सरोदा डैम क्षेत्र में प्रस्तावित कैफेटेरिया को केवल खानपान केंद्र नहीं बल्कि आकर्षक “व्यू पॉइंट” के रूप में विकसित करने की बात कही, जहां पर्यटकों के बैठने और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने की बेहतर व्यवस्था हो।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने निर्देश दिए कि भोरमदेव पर्यटन कॉरिडोर के खंभों, प्रवेश द्वारों और दीवारों में फणी नागवंशी स्थापत्य शैली की कलाकृतियों को प्रमुखता से शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल आधुनिक सुविधाओं तक सीमित न रहे, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को भी महसूस कर सकें।
उन्होंने निर्माण एजेंसियों को पारंपरिक स्थापत्य शैली की मौलिकता बनाए रखने के लिए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए।
बैठक में पूरे भोरमदेव परिसर में जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए केंद्रीकृत पानी टंकी निर्माण के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इसके लिए उपयुक्त स्थल का चयन कर आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना पूर्ण होने के बाद यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। शासन की मंशा है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहचान का भी जीवंत अनुभव मिल सके।
कोंडागांव /
मदर्स डे के पावन अवसर पर शांति फाउंडेशन में आयोजित एक भावनात्मक सम्मान समारोह ने मानवता, सेवा और मातृत्व के प्रति सम्मान का अनूठा संदेश दिया। इस विशेष अवसर पर उन माताओं का सम्मान किया गया, जिन्हें कभी सड़क से रेस्क्यू कर शांति फाउंडेशन के पुनर्वास केंद्र में लाया गया था और आज उपचार, देखभाल एवं अपनत्व के सहारे उन्हें नई जिंदगी मिली है।
कार्यक्रम में शांति फाउंडेशन के संचालक यतेंद्र “छोटू” सलाम एवं फाउंडेशन की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तुषार जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। दोनों ने माताओं के साथ समय बिताया और उन्हें सम्मानित कर मदर्स डे की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के दौरान सभी माताओं के साथ केक काटा गया। पूरा परिसर खुशी, आत्मीयता और सम्मान के भाव से सराबोर दिखाई दिया। माताओं के चेहरों पर मुस्कान और आंखों में छलकती भावनाएं वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर रही थीं।
इस आयोजन को सफल बनाने में मोनी, मदन कुमारी, आशा खान, फूल कुंवर साहू, बिंद्राबाई, सरला, दशा बाई, कांतम, केशवम सहित शांति फाउंडेशन के समस्त स्टाफ एवं प्रभुजनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के दौरान राजस्थान निवासी मदन कुमारी उर्फ मोनी अम्मा जी की कहानी ने सभी को भावुक कर दिया। उन्हें शांति फाउंडेशन द्वारा रेस्क्यू कर पुनर्वास केंद्र लाया गया था, जहां लगातार उनका उपचार कराया गया।
स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद काउंसलिंग के दौरान उन्होंने अपना घर राजस्थान में बताया। फाउंडेशन की टीम ने उनके बेटे से संपर्क किया, लेकिन बेटे ने अपनी मां को साथ रखने में असमर्थता जताते हुए कहा कि उसकी जिम्मेदारी अब पत्नी और बेटी हैं।
यह घटना वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद मार्मिक पल बन गई और समाज में बढ़ती संवेदनहीनता पर कई सवाल छोड़ गई।
शांति फाउंडेशन में रह रहीं आयशा खान अम्मा जी की कहानी भी लोगों की आंखें नम कर गई। मानसिक रूप से अस्वस्थ अवस्था में उन्हें रेस्क्यू कर पुनर्वास केंद्र लाया गया था। लगातार इलाज और देखभाल के बाद जब उनकी स्थिति में सुधार हुआ तो उन्होंने अपने गांव का नाम दुर्ग बताया।
इसके बाद से शांति फाउंडेशन की टीम उनके परिवार की तलाश में लगातार जुटी हुई है। आयशा खान अक्सर अपने बच्चों को याद कर भावुक हो जाती हैं। लगभग सात वर्षों से वह शांति फाउंडेशन में रहकर जीवन बिता रही हैं और आज भी अपने परिवार से मिलने की उम्मीद लगाए बैठी हैं।
कार्यक्रम के दौरान शांति फाउंडेशन परिवार ने कहा—
“मां केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि भगवान का सबसे सुंदर रूप होती है। मां पूरी जिंदगी अपने बच्चों के लिए त्याग करती है, लेकिन वृद्धावस्था में उन्हें सबसे ज्यादा अपनापन और सहारे की जरूरत होती है।”
फाउंडेशन ने समाज से अपील करते हुए कहा कि अपने माता-पिता और परिवारजनों को कभी बेसहारा न छोड़ें।
शांति फाउंडेशन लगातार असहाय, बेसहारा और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की सेवा एवं पुनर्वास के लिए कार्य कर रहा है। मदर्स डे पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज को संवेदनशीलता, सेवा और पारिवारिक मूल्यों का संदेश देने वाला प्रेरणादायी आयोजन बन गया।
भिलाई।
भिलाई नगर थाना क्षेत्र के माया नगर एचएससीएल कॉलोनी में घरेलू विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया, जहां छोटे भाई ने गुस्से में अपने बड़े भाई पर धारदार लोहे के रापा से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल बड़े भाई की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। घटना के बाद भिलाई नगर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लेकर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार घटना 10 मई 2026 की है। माया नगर एचएससीएल कॉलोनी, रुआबांधा सेक्टर में रहने वाले दो सगे भाइयों के बीच घरेलू बात को लेकर विवाद और मारपीट की सूचना पुलिस को प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही भिलाई नगर पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी मनोज यादव ने अपने बड़े भाई अशोक यादव पर घर में रखे धारदार लोहे के रापा से हमला कर दिया। आरोपी ने अशोक यादव के सिर और कनपटी पर वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर लहूलुहान हो गया।
घायल अशोक यादव को तत्काल जिला चिकित्सालय दुर्ग ले जाया गया, जहां हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे बेहतर उपचार के लिए मेकाहारा अस्पताल रायपुर रेफर कर दिया। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई।
मामले में थाना भिलाई नगर में अपराध क्रमांक 249/2026 के तहत प्रारंभ में धारा 109(1) बीएनएस के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया था। पीड़ित की मृत्यु के बाद प्रकरण में धारा 103(1) बीएनएस (हत्या) जोड़ी गई। पुलिस ने आरोपी मनोज यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की और विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।
पुलिस ने घटना में प्रयुक्त धारदार लोहे का रापा भी जप्त कर लिया है। प्रारंभिक जांच में घटना का कारण घरेलू एवं पारिवारिक विवाद बताया जा रहा है।
भिलाई नगर पुलिस की इस मामले में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की सराहना की जा रही है। वहीं दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि घरेलू या आपसी विवाद की स्थिति में कानून को अपने हाथ में न लें तथा किसी भी विवाद की सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस ने स्पष्ट कहा है कि हिंसात्मक गतिविधियों में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
दुर्ग, 11 मई।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत वर्षों से अधूरे पड़े आवास निर्माण कार्य को लेकर नगर पालिक निगम दुर्ग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ठेका एजेंसी मेसर्स अशोक कुमार मित्तल, कोरबा का अनुबंध निरस्त कर दिया है। निगम प्रशासन ने अनुबंध की कंडिका 1.15 के तहत कार्यादेश समाप्त करते हुए एजेंसी की धरोहर एवं सुरक्षा राशि राजसात करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार गोकुल नगर एवं गणपति विहार परियोजना में कुल 444 आवासों तथा बाह्य विकास कार्य के लिए वर्ष 2018 में उक्त एजेंसी को कार्यादेश जारी किया गया था। निर्धारित शर्तों के अनुसार एजेंसी को 18 माह के भीतर निर्माण कार्य पूर्ण करना था, लेकिन लगभग सात वर्ष बीत जाने के बाद भी परियोजना अधूरी बनी हुई है।
निगम प्रशासन ने बताया कि निर्माण कार्य की धीमी प्रगति और लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए अधिकारियों द्वारा समय-समय पर स्थल निरीक्षण किया गया। इस दौरान निर्माण में गंभीर कमियां पाए जाने पर एजेंसी को कुल 13 नोटिस जारी किए गए।
इसके अलावा कई बार समयवृद्धि भी दी गई, ताकि परियोजना को पूरा किया जा सके। कोविड-19 महामारी के बाद भी विभाग की ओर से भुगतान और आवश्यक निर्देश जारी किए जाते रहे, लेकिन एजेंसी ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की लगातार अनदेखी की और कार्य की गति में सुधार नहीं किया।
गोकुल नगर परियोजना में प्रस्तावित 336 आवासों में से अब तक केवल 35 हितग्राहियों को आवास आबंटित किए जा सके हैं। लेकिन निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण अधिकांश हितग्राही आवास ग्रहण करने और किश्त जमा करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
वहीं गणपति विहार परियोजना के 108 आवास भी अधूरे पाए गए हैं। निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शेष निर्माण कार्य एजेंसी की सुरक्षा निधि एवं धरोहर राशि से पूरा कराया जाएगा।
विभागीय निरीक्षण के बाद फरवरी 2026 में एजेंसी को एक माह के भीतर आंतरिक फिनिशिंग, विद्युतीकरण, पेंटिंग, सैनिटरी कार्य, सम्पवेल एवं सेप्टिक टैंक निर्माण पूर्ण करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद स्थल पर पर्याप्त श्रमिक एवं संसाधन नहीं लगाए गए, जिससे परियोजना की प्रगति लगभग ठप रही।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा परियोजना को 30 सितंबर 2026 तक हर हाल में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए लक्ष्य समय पर पूरा होना संभव नहीं माना गया। इसके बाद नगर निगम दुर्ग ने सख्त कदम उठाते हुए मेसर्स अशोक कुमार मित्तल, कोरबा के साथ निष्पादित अनुबंध समाप्त कर कार्यादेश निरस्त कर दिया।
इसके साथ ही एजेंसी की धरोहर एवं सुरक्षा राशि राजसात करने तथा भविष्य में निगम की निविदाओं में भाग लेने से वंचित करने की कार्रवाई भी की गई है।
नगर निगम की इस कार्रवाई को वर्षों से अधूरी परियोजना से परेशान हितग्राहियों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि शेष कार्य शीघ्र पूरा कर पात्र हितग्राहियों को उनका आवास उपलब्ध कराया जा सकेगा।
पुलिस के अनुसार आरोपी मोबाइल फोन और ऑनलाइन एप के माध्यम से आईपीएल मैचों में हार-जीत पर दांव लगाकर अवैध रूप से सट्टा संचालित कर रहे थे। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, नगदी रकम और सट्टा लेखा-जोखा से जुड़ी सामग्री जप्त की गई है।
मामले की शुरुआत 12 अप्रैल 2026 को हुई, जब थाना सिटी कोतवाली क्षेत्र के कंडरापारा इलाके में मुखबिर से सूचना मिली कि ऋषभ नगर निवासी विकास जैन अपने घर से आईपीएल टी-20 मैच चेन्नई और दिल्ली के बीच खेले जा रहे मुकाबले पर ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहा है।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल घेराबंदी कर कार्रवाई की। मौके पर तीन व्यक्तियों को मोबाइल फोन के जरिए ऑनलाइन सट्टा संचालित करते पकड़ा गया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम विकास जैन, रौनक ताम्रकार और प्रवीण ताम्रकार बताए।
पुलिस ने उनके कब्जे से मोबाइल फोन, पॉकेट डायरी, नगदी रकम और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से संबंधित सामग्री जप्त की थी।
प्रकरण में थाना सिटी कोतवाली दुर्ग में अपराध क्रमांक 187/2026 के तहत छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 4, 6, 7 एवं बीएनएस की धारा 112(2) के अंतर्गत अपराध दर्ज किया गया था।
विवेचना के दौरान गिरफ्तार आरोपियों के मेमोरेंडम कथन के आधार पर पुलिस को अन्य आरोपियों की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने अक्षत बोहरे, मोहम्मद आदिल, मोहम्मद अय्युब और प्रकाश सोनी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। आरोपियों द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने पर उनके कब्जे से चार अलग-अलग कंपनियों के मोबाइल फोन जप्त किए गए।
सभी आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। मामले की विवेचना अभी जारी है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से—
जप्त किए हैं। कुल जप्त सामग्री की अनुमानित कीमत लगभग 89,810 रुपये बताई गई है।
इस कार्रवाई में थाना सिटी कोतवाली एवं एसीसीयू टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों और जवानों की सतर्कता एवं त्वरित कार्रवाई से संगठित ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का खुलासा हो सका।
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के अवैध सट्टा, जुआ अथवा ऑनलाइन अवैध गतिविधियों से दूर रहें। पुलिस ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को दें। अवैध सट्टा संचालन में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
