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आईईडी विस्फोटों की पीड़ा से बाहर आएगा बस्तर, पीड़ितों को मिलेंगे कृत्रिम हाथ-पैर : विजय शर्मा

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जगदलपुर में 5 से 7 और दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक निःशुल्क दिव्यांग सेवा शिविर

आईईडी से दिव्यांग हुए लोगों को विशेष प्राथमिकता; जयपुर फुट, कृत्रिम हाथ, कैलिपर्स समेत मिलेंगे सहायक उपकरण

रायपुर / शौर्यपथ। वर्षों तक नक्सल हिंसा और आईईडी विस्फोटों की त्रासदी झेल चुके बस्तर में अब पीड़ितों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा है कि बस्तर आईईडी विस्फोटों की पीड़ा से बाहर निकलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और सरकार उन लोगों के साथ खड़ी है, जिन्होंने इन विस्फोटों में अपने हाथ-पैर गंवाए हैं।

बस्तर संभाग के दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए दो चरणों में विशाल निःशुल्क दिव्यांग सेवा शिविर आयोजित किए जाएंगे। पहला तीन दिवसीय शिविर 5, 6 और 7 अक्टूबर को जगदलपुर में तथा दूसरा 15, 16 और 17 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में आयोजित होगा। शिविरों में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।

इन शिविरों में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर के तकनीकी सहयोग से जरूरत के अनुसार जयपुर फुट, कृत्रिम हाथ, कैलिपर्स सहित विभिन्न कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

जगदलपुर शिविर के लिए 2,953 दिव्यांगजन चिन्हांकित

जगदलपुर में आयोजित होने वाले शिविर के लिए बस्तर संभाग के चार जिलों में कुल 2,953 दिव्यांगजनों को चिन्हांकित किया गया है। इनमें बस्तर जिले के 1,570, कोंडागांव के 1,080, कांकेर के 236 और नारायणपुर के 67 दिव्यांगजन शामिल हैं।

जगदलपुर शिविर में बस्तर, कांकेर, नारायणपुर और कोंडागांव जिले के हितग्राही शामिल होंगे। वहीं दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर में दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के दिव्यांगजनों को लाभ मिलेगा।

समाज कल्याण विभाग के सहयोग से शिविरों में कृत्रिम अंगों के अलावा श्रवण यंत्र, वैशाखी, स्मार्ट छड़ी, वॉकिंग स्टिक, छड़ी, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, कैलिपर्स तथा दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के लिए उपयोगी अन्य सहायक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

आईईडी पीड़ितों को कृत्रिम अंग देकर आसान किया जाएगा जीवन

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि आईईडी विस्फोटों ने कभी जवानों, कभी आम नागरिकों और कभी बेजुबान पशुओं को अपनी चपेट में लिया। कई नागरिकों ने इन विस्फोटों में अपने हाथ या पैर गंवाए। जीवन बच जाने के बावजूद उन्हें वर्षों से दिव्यांगता के साथ कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि ऐसे प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम अंग उपलब्ध कराया जाए। विशेषज्ञ हितग्राहियों का परीक्षण और नाप लेकर उनकी जरूरत के अनुरूप कृत्रिम अंग तैयार करेंगे। पुराने अथवा क्षतिग्रस्त कृत्रिम अंगों की मरम्मत की व्यवस्था भी शिविर में रखी जाएगी।

आईईडी मुक्त बस्तर के साथ पीड़ितों के पुनर्वास पर भी जोर

श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का प्रयास बस्तर को नक्सल हिंसा और आईईडी के भय से मुक्त करने के साथ-साथ उन परिवारों और नागरिकों तक सहायता पहुंचाना भी है, जो इस हिंसा से प्रभावित हुए हैं।

शिविरों में आईईडी विस्फोट से दिव्यांग हुए नागरिकों को विशेष रूप से चिन्हांकित कर उनकी आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम पैर (जयपुर फुट), कृत्रिम हाथ और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही अन्य कारणों से दिव्यांग हुए लोग भी शिविर का लाभ ले सकेंगे।

ग्राम पंचायत से जिला स्तर तक पंजीयन की व्यवस्था

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बस्तर संभाग के दिव्यांगजनों और विशेष रूप से आईईडी विस्फोट पीड़ितों से शिविर का लाभ उठाने की अपील की है। हितग्राही अपने जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अथवा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

ग्राम सभाओं के माध्यम से भी जरूरतमंद हितग्राहियों के नाम ग्राम पंचायत सचिव के जरिए पंजीकृत कर जनपद एवं जिला पंचायत स्तर तक भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश किसी जरूरतमंद का पूर्व पंजीयन नहीं हो पाया हो, तो वह सीधे शिविर में पहुंचकर भी आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकता है। शिविर में आने वाले हितग्राहियों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था भी की जाएगी।

वर्षों की पीड़ा कम करने की पहल

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि दोनों शिविरों के माध्यम से प्रयास है कि बस्तर में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए अधिक से अधिक लोगों तक सहायता पहुंचाई जा सके। कृत्रिम अंग और आवश्यक सहायक उपकरण मिलने से उनके दैनिक जीवन की कठिनाइयों को कम करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि बस्तर में आईईडी विस्फोटों के दंश को समाप्त करना है और इसके साथ ही उन लोगों के जीवन में भी राहत पहुंचानी है, जिन्होंने इस त्रासदी की कीमत अपने अंग गंवाकर चुकाई है।

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