दुर्ग। शौर्यपथ।
अंजुमन इस्लाहुल मुस्लिमीन कमेटी, दुर्ग की ओर से आयोजित होने वाला ऐतिहासिक सालाना जलसा (प्रवचन महफिल) इस वर्ष अपने 60वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह 10 दिवसीय कार्यक्रम 27 जून (शुक्रवार) से प्रारंभ होकर 6 जुलाई (रविवार) तक चलेगा। प्रतिवर्ष मोहर्रम के अवसर पर आयोजित होने वाले इस आयोजन को लेकर शहर के धार्मिक और सामाजिक वातावरण में उत्साह का माहौल है।
अंजुमन के प्रतिनिधि जुनैद लाल आज़मी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह जलसा पिछले 59 वर्षों से निरंतर आयोजित किया जा रहा है और इस वर्ष इसे हीरक जयंती वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन तकिया पारा ईदगाह मैदान, दुर्ग में होगा, जहाँ हर दिन शाम को तकरीरें होंगी।
? देशभर से आएंगे मज़हबी विद्वान
इस वर्ष के जलसे में प्रमुख रूप से हजरत मौलाना मुफ्ती जाकिर हुसैन नईमी साहब (मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश) 1 से 10 मोहर्रम तक रोज़ाना तकरीर करेंगे। इनके साथ-साथ पैग़म्बर ए इस्लाम के वंशज और हुजूर ताजुल औलिया, हजरत सैय्यद मोहम्मद पीर जलालुद्दीन अशरफ अशरफी उल जिलानी (क़ादरी मियां), कीछौछा शरीफ, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश से 9 और 10 मोहर्रम (5 व 6 जुलाई) को विशेष प्रवचन के लिए पधार रहे हैं।
? हजरत सैय्यद साहब की वापसी बनी शहर की चर्चा
हजरत सैय्यद साहब की दुर्ग में उपस्थिति कई वर्षों के बाद हो रही है, जिसकी खबर से शहर में श्रद्धा और उल्लास की लहर दौड़ गई है। हजरत साहब के अनुयायी केवल मुस्लिम समाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सभी समुदायों में श्रद्धा और सम्मान के पात्र हैं। उनकी तकरीरें सामाजिक सद्भाव, इंसानियत और आध्यात्मिकता का सन्देश देती हैं।
? महिलाओं के लिए विशेष प्रबंध
कमेटी की ओर से महिलाओं के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की गई है ताकि वे भी इस धार्मिक आयोजन में पूरी सुविधा के साथ शरीक हो सकें।
? समापन पर विशेष दुआ और हुसैनी पैग़ाम
6 जुलाई को जलसे का समापन होगा, जिसमें विशेष दुआ-ए-खैर और हुसैन-ए-आज़म की याद में भावभीनी तकरीरें होंगी। अंजुमन ने समस्त शहरवासियों से अपील की है कि वे धर्म, जाति से ऊपर उठकर इस आयोजन में शरीक हों और हुसैनी पैग़ाम को आत्मसात करें।