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दुर्ग । शौर्यपथ । छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती 2026 को लेकर अभ्यर्थियों की मांगें अब तेज होती नजर आ रही हैं। विज्ञान शिक्षक, जीव विज्ञान व्याख्याता और रसायन विज्ञान व्याख्याता के पदों पर भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को ज्ञापन सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन करने और अधिक से अधिक पात्र अभ्यर्थियों को अवसर देने की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्तमान रिक्त पदों, पात्रता शर्तों और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के कारण प्रदेश के हजारों अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं।
विज्ञान शिक्षक के पद बढ़ाने की मांग
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग शिक्षक भर्ती 2026 में विज्ञान शिक्षक के पर्याप्त पद जोड़कर संशोधित भर्ती विज्ञापन जारी करने की की गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि विज्ञान विषय में बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवार उपलब्ध हैं, ऐसे में पदों की संख्या बढ़ाकर उन्हें रोजगार का अवसर दिया जाना चाहिए।
जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान में भी पद सृजित करने की मांग
अभ्यर्थियों ने जीव विज्ञान व्याख्याता एवं रसायन विज्ञान व्याख्याता के आवश्यक/रिक्त पद सृजित कर भर्ती में शामिल करने की मांग रखी है। उनका तर्क है कि इन विषयों के भी बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी हैं और रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी।
6 सितंबर की CTET परीक्षा देने वालों को भी मिले मौका
ज्ञापन में एक महत्वपूर्ण मांग 6 सितंबर 2026 को होने वाली CTET परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को भी शिक्षक भर्ती 2026 में आवेदन का अवसर देने की है। अभ्यर्थियों ने कहा है कि ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में CTET Application Number के लिए अलग कॉलम रखा जाए तथा केवल Roll Number उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी पात्र अभ्यर्थी को अवसर से वंचित न किया जाए।
50 प्रतिशत की अनिवार्यता में 5 प्रतिशत छूट की मांग
अभ्यर्थियों ने स्नातक स्तर पर निर्धारित 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता में 5 प्रतिशत की छूट सभी पात्र अभ्यर्थियों को देने की मांग भी की है। उनका कहना है कि पात्रता मानदंड में व्यवहारिक और न्यायसंगत संशोधन से बड़ी संख्या में उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।
अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष करने की मांग
ज्ञापन में शिक्षक भर्ती की उच्चतम आयु सीमा 40 वर्ष के स्थान पर 45 वर्ष किए जाने की मांग की गई है। साथ ही नियमानुसार मिलने वाली आयु सीमा में छूट को भी लागू करने की बात कही गई है।
स्वामी आत्मानंद स्कूलों में हिंदी-अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों को समान अवसर
अभ्यर्थियों ने स्वामी आत्मानंद विद्यालयों की भर्ती में हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों माध्यमों के योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर देने की मांग की है। उनका कहना है कि माध्यम के आधार पर योग्य उम्मीदवारों के अवसर सीमित नहीं किए जाने चाहिए।
‘टकराव नहीं, संवाद और समाधान’ की अपील
ज्ञापन के अंत में अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें किसी टकराव के उद्देश्य से नहीं, बल्कि संवाद, समाधान और न्यायपूर्ण अवसर की अपेक्षा से रखी गई हैं। उन्होंने स्कूल शिक्षा मंत्री से हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती विज्ञापन में आवश्यक संशोधन, अतिरिक्त पदों का समावेश, CTET अभ्यर्थियों को अवसर तथा पात्रता एवं आयु सीमा में राहत मिलने से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया अधिक व्यापक और न्यायसंगत बन सकेगी। अब सभी की निगाहें स्कूल शिक्षा विभाग और शासन के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।
एक माह से स्थायी आयुक्त का इंतजार, भुगतान प्रक्रिया पर विराम की चर्चा; वेतन और ठेकेदारों के भुगतान को लेकर बढ़ी चिंता, 'आयुक्त किसकी पसंद का?Ó बनी सियासी बहस
शौर्यपथ विशेष
दुर्ग नगर निगम में करीब एक माह से स्थायी आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। जुलाई के दूसरे सप्ताह में तत्कालीन आयुक्त सुमित अग्रवाल के स्थानांतरण के बाद उपायुक्त मोहेंद्र साहू कार्यवाहक आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अगस्त का दूसरा सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन स्थायी आयुक्त की नियुक्ति अब तक नहीं हुई है।
भुगतान और वेतन को लेकर चिंता
निगम से जुड़े सूत्रों और कर्मचारियों के बीच विभिन्न भुगतान प्रक्रियाओं के प्रभावित होने की चर्चा है। हालांकि निगम प्रशासन ने इस संबंध में अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इसी बीच अगस्त का वेतन समय पर मिलने को लेकर भी कर्मचारियों में चिंता की चर्चा है।
सावन, तीज-त्योहार और रक्षाबंधन के बीच वेतन में देरी कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। ठेकेदारों की चिंता भी भुगतान प्रक्रिया को लेकर बढ़ी हुई है। विकास कार्यों में बिल परीक्षण और भुगतान की प्रक्रिया स्थायी आयुक्त की नियुक्ति के बाद गति पकडऩे की उम्मीद जताई जा रही है।
'आयुक्त किसकी पसंद का?"
स्थायी आयुक्त की नियुक्ति में देरी अब राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गई है। दुर्ग की राजनीति में महापौर अलका बाघमार और विधायक एवं स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से जुड़े खेमों के बीच मतभेदों की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि अगला आयुक्त किसकी पसंद का होगा?
निगम और राजनीतिक गलियारों में अधिकारियों के नाम को लेकर सहमति-असहमति की चर्चाएं हैं। हालांकि इन चर्चाओं की वास्तविकता संबंधित राजनीतिक नेतृत्व ही स्पष्ट कर सकता है।
एक ही दल की सरकार, फिर देरी क्यों?
दुर्ग की स्थिति इसलिए भी सवाल खड़े करती है क्योंकि महापौर अलका बाघमार और विधायक गजेंद्र यादव भाजपा से हैं। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा जिले के प्रभारी मंत्री और उपमुख्यमंत्री अरुण साव नगरीय प्रशासन विभाग के मंत्री हैं। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे भी दुर्ग से जुड़ी प्रमुख राजनीतिक हस्ती हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है—
"जब सरकार से लेकर नगर निगम तक सत्ता एक ही दल की है, तो स्थायी आयुक्त की नियुक्ति में इतनी देरी क्यों?"
भूमिपूजन की रफ्तार, प्रशासनिक नियुक्ति में सुस्ती
शहर में विकास कार्यों के भूमिपूजन और लोकार्पण जारी हैं, लेकिन निगम की प्रशासनिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण पद पर स्थायी अधिकारी नहीं है। विकास केवल भूमिपूजन से नहीं, बल्कि कार्यादेश, निर्माण, बिल परीक्षण और भुगतान की सुचारू व्यवस्था से पूरा होता है।
फिलहाल निगम में चार सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में हैं—
आयुक्त कब आएगा?
भुगतान कब होगा?
वेतन समय पर मिलेगा या नहीं?
और अगला आयुक्त किसकी पसंद का होगा?
अब निगाहें शासन और नगरीय प्रशासन विभाग पर हैं कि दुर्ग निगम को स्थायी आयुक्त कब मिलता है।
क्योंकि सवाल सिर्फ आयुक्त की नियुक्ति का नहीं, बल्कि यह भी है कि 'ट्रिपल इंजनÓ सरकार में दुर्ग निगम की प्रशासनिक गाड़ी आखिर कब रफ्तार पकड़ेगी?
दुर्ग / शौर्यपथ / जिला दंडाधिकारी श्री अभिजीत सिंह ने पुलिस अधीक्षक दुर्ग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 की धारा 3 उपधारा (2) सह पठित उपधारा 3 के अंतर्गत दिनांक 6 अगस्त 2026 को आदेश पारित कर अनावेदक शुभम तागड़े उर्फ मराठा पिता दिनेश तागड़े को तीन माह की कालावधि के लिये केंद्रीय जेल दुर्ग में निरुद्ध करने के आदेश दिए है। जिला दंडाधिकारी के आदेश के अनुपालन में पुलिस अधीक्षक दुर्ग द्वारा शुभम तागड़े को 8 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर केंद्रीय जेल दुर्ग में निरुद्ध किया गया है।
ज्ञात हो कि पुलिस अधीक्षक जिला दुर्ग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन अनुसार अनावेदक शुभम तागड़े उर्फ मराठा पिता दिनेश तागड़े (उम्र-29 वर्ष), निवासी-मिलन चौक, कैम्प-02 भिलाई, थाना-छावनी, तहसील व जिला-दुर्ग (छ.ग.) थाना छावनी क्षेत्र का गुंडा-बदमाश है। वर्ष 2015 से लगातार आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण उसे निगरानी बदमाश की श्रेणी में लाया गया है। अनावेदक के विरुद्ध दुर्ग जिले के विभिन्न थानों में कुल 26 अपराध पंजीबद्ध हैं। इनमें मारपीट, गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी के 06 अपराध, साथियों के साथ मिलकर अवैध राशि की मांग व मारपीट का अपराध, आर्म्स एक्ट के 07 अपराध, चोरी व नकबजनी के 10 अपराध, आबकारी एक्ट का अपराध, नाबालिग बच्ची से छेड़छाड़ और लूट का प्रकरण दर्ज है। विभिन्न थानों के अंतर्गत उसके विरुद्ध थाना छावनी में 17 अपराध, थाना जामुल में 03 अपराध, थाना खुर्सीपार में 03 अपराध, थाना नंदिनी में 01 अपराध, थाना दुर्ग कोतवाली में 01 अपराध तथा थाना भिलाई भट्टी में 01 अपराध पंजीबद्ध किए गए हैं।
दुर्ग । शौर्यपथ / शहर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर नगर पालिक निगम दुर्ग की महापौर अलका बाघमार ने सख्त रुख अपनाया है। रायपुर नाका स्थित 42 एमएलडी फिल्टर प्लांट में लगातार हुई आगजनी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए महापौर ने जल विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर जलापूर्ति जल्द सामान्य करने और फिल्टर प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।
महापौर ने अपने शासकीय आवास एफ-4 में आयोजित बैठक में अधिकारियों से आगजनी की घटनाओं के कारणों की गंभीरता से जांच करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित ठेकेदार द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री की गुणवत्ता में कमी अथवा विभागीय स्तर पर किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बीआईटी दुर्ग और आईआईटी भिलाई में होगी जांच
दो दिन पूर्व आगजनी की घटना में जले ब्लीचिंग पावडर के नमूनों की गुणवत्ता जांच कराने के निर्देश महापौर ने दिए हैं। निष्पक्ष जांच के लिए ब्लीचिंग पावडर के सैंपल बीआईटी दुर्ग और आईआईटी भिलाई की लैब में भेजे जाएंगे।
महापौर ने बाजार मूल्य की तुलना में अत्यधिक कम दर पर उपलब्ध कराए गए ब्लीचिंग पावडर की गुणवत्ता की भी जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
ज्वलनशील सामग्री के लिए अलग सुरक्षित भंडारण
महापौर ने कहा कि ब्लीचिंग पावडर, एलम सहित अन्य ज्वलनशील अथवा संवेदनशील सामग्रियों को फिल्टर प्लांट परिसर में एक साथ रखने के बजाय प्लांट से कुछ दूरी पर अलग-अलग सुरक्षित भंडारण केंद्र विकसित किए जाएं। इससे भविष्य में आगजनी जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलेगी।
बाढ़ के बाद सफाई कार्य में तेजी के निर्देश
बारिश के कारण नदी में आई बाढ़ से इंटकवेल और फिल्टर प्लांट में जमा गाद एवं कचरे की सफाई को भी महापौर ने प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आवश्यक संसाधन लगाकर सफाई कार्य शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि शहर के सभी वार्डों में पेयजल आपूर्ति जल्द से जल्द सामान्य हो सके।
बैठक में जल कार्य प्रभारी लीना दिनेश देवांगन, लोक कर्म विभाग प्रभारी देवनारायण चंद्राकर, प्रभारी आयुक्त मानेंद्र साहू, जल विभाग के कार्यपालन अभियंता प्रकाश थवानी, सहायक कार्यपालन अभियंता राजेंद्र ढवाले, सब इंजीनियर विनोद मांझी, जल निरीक्षक नारायण ठाकुर सहित जल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
“विवाद बढ़ाएँ नहीं, संवाद से समाधान करें” के संदेश के साथ निकली जन-जागरूकता रैली
दुर्ग / शौर्यपथ / न्याय केवल अदालत की चौखट तक सीमित नहीं है, बल्कि संवाद, सहमति और आपसी विश्वास के माध्यम से गांव की चौपाल तक भी पहुंच सकता है। इसी सोच को साकार करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की टीम ने ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता शिविर, विधिक जागरूकता कार्यक्रम एवं जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया। कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश रहा—“विवाद बढ़ाएँ नहीं, संवाद से समाधान करें।”
माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष श्रीमती सुषमा लकड़ा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री भूपेश कुमार बसंत एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश कुमार भागवतकर ने ग्रामीणों को सामुदायिक मध्यस्थता और विधिक अधिकारों की जानकारी दी।
अदालत पहुंचने से पहले संवाद से समाधान
कार्यक्रम में बताया गया कि छोटे-छोटे सामाजिक, पारिवारिक और स्थानीय विवादों को न्यायालय तक ले जाने से पहले आपसी बातचीत, विश्वास और सहमति के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। सामुदायिक मध्यस्थता न केवल विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने का प्रभावी माध्यम है, बल्कि इससे रिश्तों और सामाजिक सौहार्द को भी बनाए रखने में मदद मिलती है।
ग्रामीणों को मीडिएशन 3.0 के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि मध्यस्थता अब केवल वैकल्पिक विवाद समाधान की प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि यह तकनीक-सक्षम, समयबद्ध और नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। प्रशिक्षित सामुदायिक मध्यस्थ ग्राम स्तर पर विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कानूनी जागरूकता के साथ सामाजिक सरोकारों पर भी जोर
शिविर में केवल न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि ग्रामीण जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर भी जागरूक किया गया। अपराधमुक्त ग्राम, नशामुक्ति, टोनही प्रथा उन्मूलन, बाल संरक्षण, गुड टच-बैड टच, साइबर अपराध एवं डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों को सरल भाषा में समझाया गया।
बच्चों और युवाओं को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने, शिक्षा को प्राथमिकता देने, सकारात्मक जीवनशैली अपनाने और नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।
चौपाल से बाजार तक गूंजा न्याय और जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम के बाद ग्राम पंचायत से बाजार क्षेत्र तक जन-जागरूकता रैली निकाली गई। प्रचार वाहन के माध्यम से सामुदायिक मध्यस्थता, मीडिएशन 3.0, विधिक अधिकार, अपराध नियंत्रण और सामाजिक समरसता से जुड़े संदेश प्रसारित किए गए। ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक रैली में सहभागिता करते हुए एक स्वर में कहा—
“विवाद बढ़ाएँ नहीं, संवाद से समाधान करें।”
विशेष बात यह रही कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा, उद्देश्य और उपयोगिता को ग्रामीणों तक सहज तरीके से पहुंचाने के लिए विशेष रूप से तैयार छत्तीसगढ़ी गीत भी प्रचार वाहन के माध्यम से प्रसारित किया गया। स्थानीय भाषा में दिए गए इस संदेश ने ग्रामीणों को संवाद, सहमति और आपसी समझ के जरिए विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए प्रेरित किया।
न्याय को चौपाल तक पहुंचाने की सार्थक पहल
कुथरेल में आयोजित यह कार्यक्रम महज एक विधिक जागरूकता शिविर तक सीमित नहीं रहा। इसने न्याय को गांव की चौपाल तक पहुंचाने, समुदाय को न्याय प्रक्रिया का सहभागी बनाने और विवादों के स्थान पर संवाद की संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।
सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से गांवों में छोटे विवादों को समय रहते सुलझाने की पहल न केवल न्यायालयों पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ कम कर सकती है, बल्कि सामाजिक रिश्तों और आपसी सौहार्द को भी मजबूत कर सकती है।
कुथरेल से उठी यह पहल एक ऐसे ग्रामीण भारत की तस्वीर प्रस्तुत करती है, जहां न्याय केवल फैसला नहीं, बल्कि संवाद, सहमति और सामाजिक समरसता का माध्यम बने—और यही विवाद-मुक्त, जागरूक एवं न्याय-सशक्त विकसित भारत की मजबूत नींव है।
समय पर वेतन भुगतान, जीपीएफ-सीपीएफ राशि तत्काल जमा कराने और महिला कर्मचारियों के सम्मान में तीज उपहार देने की उठाई मांग
दुर्ग / शौर्यपथ /
हरेली पर्व से पूर्व नगर पालिक निगम दुर्ग के कर्मचारियों के हितों को लेकर नवयुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ एक बार फिर सक्रिय हो गया है। संघ के जिला अध्यक्ष राजूलाल चंद्राकर ने कर्मचारियों के आर्थिक, सामाजिक एवं सेवा संबंधी अधिकारों से जुड़े तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयुक्त, महापौर एवं राज्य शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
संघ ने छत्तीसगढ़ शासन के पत्र क्रमांक एफ-4-16/2009/18, दिनांक 10 अक्टूबर 2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन द्वारा प्रत्येक माह की 01 तारीख को वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं, इसके बावजूद नगर पालिक निगम दुर्ग के नियमित अधिकारियों, कर्मचारियों तथा प्लेसमेंट कर्मचारियों का जुलाई 2026 (देय अगस्त 2026) का वेतन आज तक भुगतान नहीं किया गया है। हरेली जैसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्व से पहले वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने शासन के निर्देशों का पालन करते हुए तत्काल वेतन भुगतान की मांग की है।
इसके साथ ही संघ ने जून एवं जुलाई 2026 के कर्मचारियों के वेतन से काटी गई जीपीएफ एवं सीपीएफ की राशि तत्काल संबंधित खातों में जमा कराने की मांग करते हुए कहा कि कर्मचारियों के वेतन से कटौती की गई राशि समय पर जमा करना निगम प्रशासन की वैधानिक एवं वित्तीय जिम्मेदारी है। इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही कर्मचारियों के अधिकारों के साथ न्यायसंगत नहीं है।
महिला कर्मचारियों के सम्मान एवं कल्याण को प्राथमिकता देते हुए संघ ने माननीय महापौर महोदया को ज्ञापन सौंपकर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी हरितालिका तीज पर्व के अवसर पर महिला अधिकारियों एवं कर्मचारियों को साड़ी, ब्लाउज एवं पेटीकोट प्रदान किए जाने की मांग की है। संघ ने कहा कि यह केवल परंपरा नहीं बल्कि महिला कर्मचारियों के सम्मान और उनके योगदान के प्रति निगम की सकारात्मक भावना का प्रतीक है।
जिला अध्यक्ष राजूलाल चंद्राकर ने कहा—
> "कर्मचारी केवल वेतन पाने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि नगर की जनसेवा व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी हैं। यदि कर्मचारियों के वैधानिक अधिकार, समय पर वेतन, भविष्य निधि की राशि और सम्मान की रक्षा नहीं होगी तो किसी भी संस्था की कार्यक्षमता प्रभावित होगी। नवयुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ कर्मचारियों के प्रत्येक न्यायोचित अधिकार के लिए नियम एवं कानून के दायरे में रहकर निरंतर संघर्ष करता रहेगा।"
उन्होंने आगे कहा—
> "हमारा उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि कर्मचारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान कराना है। शासन के आदेशों का पालन होना चाहिए और कर्मचारियों को उनका अधिकार समय पर मिलना चाहिए। कर्मचारी हित सर्वोपरि हैं और संगठन इस दिशा में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।"
संघ ने विश्वास व्यक्त किया कि निगम प्रशासन एवं राज्य शासन कर्मचारी हितों से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगा, जिससे कर्मचारियों में विश्वास और कार्य के प्रति उत्साह बना रहेगा।
मोर बिजली ऐप से हर घंटे की खपत पर नजर, दुर्ग के रितेश सोनी को मिली राहत
दुर्ग। बिजली बिल आने का इंतजार और अधिक खपत की चिंता अब कई उपभोक्ताओं के लिए पुरानी बात होती जा रही है। स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप जैसी आधुनिक सुविधाओं ने बिजली उपयोग को पारदर्शी और आसान बना दिया है। इसका अनुभव दुर्ग शहर के वार्ड क्रमांक-9, गिरधारी नगर निवासी रितेश कुमार सोनी कर रहे हैं।
रितेश सोनी बताते हैं कि स्मार्ट मीटर लगने से पहले उन्हें पूरे महीने बिजली खपत का सही अंदाजा नहीं होता था। बिल आने के बाद ही पता चलता था कि कितनी बिजली खर्च हुई है। कई बार अपेक्षा से अधिक बिल आने पर परेशानी भी होती थी। लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद अब वे मोबाइल ऐप के माध्यम से हर दिन और हर घंटे बिजली खपत की जानकारी देख पा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मोर बिजली ऐप में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि किस समय बिजली की खपत ज्यादा हुई और कब कम। इससे अनावश्यक बिजली उपयोग को पहचानना और नियंत्रित करना आसान हो गया है।
“अब बिजली बिल को लेकर चिंता नहीं रहती”
रितेश सोनी कहते हैं, “स्मार्ट मीटर लगने के बाद सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि अब हमें पहले से पता रहता है कि बिजली की खपत कितनी हो रही है और अनुमानित बिल कितना आएगा। इससे हम अपने उपयोग को नियंत्रित कर पाते हैं।”
स्मार्ट मीटर की एक खास सुविधा यह भी है कि इसमें पिछले वर्ष की समान अवधि की बिजली खपत की तुलना की जा सकती है। इससे उपभोक्ता यह समझ सकते हैं कि उनका बिजली उपयोग बढ़ा है या कम हुआ है और उसी के अनुसार ऊर्जा बचत के उपाय अपना सकते हैं।
परिवार में बढ़ी बिजली बचत की आदत
रितेश सोनी के परिवार में भी अब बिजली बचाने को लेकर जागरूकता बढ़ी है। अनावश्यक लाइट बंद रखना, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करना और जरूरत के अनुसार बिजली खर्च करना परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि उपभोक्ता को जागरूक बनाने का माध्यम है। वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी मिलने से उपभोक्ता अपने खर्च को नियंत्रित कर सकता है और ऊर्जा संरक्षण में योगदान दे सकता है।
स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप का यह अनुभव बताता है कि तकनीक के सही उपयोग से बिजली प्रबंधन आसान हो सकता है। रितेश सोनी जैसे उपभोक्ताओं की कहानी अन्य लोगों के लिए भी संदेश है कि जागरूकता और आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से बिजली बिल की चिंता को कम किया जा सकता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल, रैगिंग रोकथाम, महिला अधिकार और ट्रैफिक नियमों पर किया जागरूक
दुर्ग। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा युवाओं में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नशामुक्त समाज के निर्माण के उद्देश्य से छत्रपति शिवाजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दुर्ग में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उनके संवैधानिक अधिकारों, कानूनी कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी दी गई।
माननीय अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में व्यवहार न्यायाधीश (वरिष्ठ श्रेणी) श्रीमती श्वेता पटेल, श्री रवि कश्यप तथा व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) श्रीमती महिमा शर्मा ने विद्यार्थियों को विभिन्न विधिक विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने रैगिंग की रोकथाम, उसके कानूनी परिणाम और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश का प्रेरक संदेश भी विद्यार्थियों को सुनाया गया, जिसमें शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग करने और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी गई।
शिविर के दौरान मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान, महिलाओं के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकार, उनकी सुरक्षा से जुड़े कानून तथा यातायात नियमों के पालन के महत्व पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) के अधिवक्ताओं ने विद्यार्थियों को ई-चालान से संबंधित कानूनी प्रावधानों और अधिकारों से भी अवगत कराया।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण विषय नशामुक्ति भी रहा। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए स्वयं नशे से दूर रहने तथा परिवार और समाज को भी नशामुक्ति के प्रति जागरूक करने का संकल्प दिलाया।
शिविर में पैरालीगल वॉलेंटियर्स ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पात्र नागरिकों को उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी परामर्श और विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। अंत में विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को उपयोगी और प्रेरणादायी बताते हुए ऐसे जागरूकता शिविरों का नियमित आयोजन करने की मांग की।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं में कानून के प्रति सम्मान, सामाजिक उत्तरदायित्व और जागरूक नागरिक बनने की भावना विकसित करना है, ताकि न्यायपूर्ण, सुरक्षित और नशामुक्त समाज के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
दुर्ग। जिले में मानसून की सक्रियता के बीच 1 जून से 5 अगस्त 2026 तक 501.0 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। कलेक्टर कार्यालय की भू-अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अवधि में पाटन तहसील में सबसे अधिक 620.7 मिमी तथा धमधा तहसील में सबसे कम 346.1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
आंकड़ों के अनुसार दुर्ग तहसील में 564.0 मिमी, बोरी में 561.1 मिमी, भिलाई-3 में 517.1 मिमी तथा अहिवारा में 396.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। जिले में अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की मात्रा में स्पष्ट अंतर देखने को मिला है।
5 अगस्त 2026 को हुई वर्षा की बात करें तो भिलाई-3 में सर्वाधिक 28.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा धमधा में 24.9 मिमी, दुर्ग में 14.1 मिमी, बोरी में 2.0 मिमी, अहिवारा में 1.2 मिमी वर्षा हुई, जबकि पाटन तहसील में वर्षा दर्ज नहीं की गई।
जिला प्रशासन ने बताया कि मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा वर्षा से संबंधित आंकड़ों का नियमित संकलन किया जा रहा है। किसानों एवं आम नागरिकों को मौसम की ताजा जानकारी पर ध्यान देने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
