September 30, 2026
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    दुर्ग

    दुर्ग (5050)

    दुर्ग / शौर्यपथ / महिला एवं बाल विकास विभाग दुर्ग द्वारा सेवा संकल्प योजना के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 10 स्थित शंकर नगर नौखोरिया बस्ती में जागरूकता एवं विविध गतिविधियों से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, एएनएम एवं मितानिन शामिल हुईं।

    कार्यक्रम में पार्षद खालिद रिजवी शेरू, महिला मोर्चा अध्यक्ष दिनेश्वरी पुरकर, पार्षद चंद्रशेखर चंद्राकर (वार्ड-10), अजीत वैद्य (वार्ड-12), ज्योति चौहान, छाया सोनी, बब्बीता चौधरी, जाकिर खोखर, वसीम कुरैशी एवं लक्ष्मता कुशरे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे। एएनएम श्रीमती पुष्पा धनकर और मितानिन कविता यादव ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

    सेवा संकल्प योजना के तहत बलून रेस, मेहंदी और रंगोली प्रतियोगिता सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम के दौरान स्वस्थ शिशुओं का चयन कर उन्हें सम्मानित किया गया। वहीं विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।

    कार्यक्रम में 2 स्वस्थ शिशु, 2 गोदभराई की महिलाएं, 2 अन्नप्राशन कार्यक्रम, 10 किशोरियां और 29 अन्य महिलाएं सहित हितग्राहियों ने सहभागिता की। इस दौरान महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

    मेहंदी एवं रंगोली प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले हितग्राहियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों में स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करना रहा।

    स्मार्ट मीटर, बढ़े बिजली बिल और पंचायत भवनों के कटे कनेक्शन पर जनपद सदस्य ढालेश साहू ने खोला मोर्चा; 30 सितंबर को अंडा चौक में प्रस्तावित कार्यक्रम

    दुर्ग / शौर्यपथ। दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाता नजर आ रहा है। अघोषित बिजली कटौती, पंचायत भवनों के बिजली कनेक्शन काटे जाने, स्मार्ट मीटर से जुड़े बढ़े हुए बिल और ग्रामीण उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर जनपद पंचायत दुर्ग के क्षेत्र क्रमांक-24 के सदस्य एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी ढालेश साहू ने क्षेत्रीय विधायक ललित चंद्राकर के खिलाफ विरोध का ऐलान किया है। साहू द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गए आवेदन के अनुसार 30 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे अंडा चौक में विधायक का शांतिपूर्ण पुतला दहन कार्यक्रम प्रस्तावित है। हालांकि यह कार्यक्रम जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद ही आयोजित किए जाने की बात आवेदन में कही गई है।

    छत्तीसगढ़ विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में ललित चंद्राकर को दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित सदस्य और भारतीय जनता पार्टी का विधायक दर्ज किया गया है।

    मचांदूर से नगपुरा तक बिजली कटौती का मुद्दा

    ढालेश साहू का आरोप है कि मचांदूर से निकुम, अंडा से उतई और कुथरेल से नगपुरा तक विभिन्न गांवों में घरेलू बिजली के साथ-साथ मोटर पंपों की बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर ग्रामीण परिवारों, विद्यार्थियों, किसानों और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है।

    साहू के मुताबिक, बिजली संकट केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। कई ग्राम पंचायत भवनों के बिजली कनेक्शन कथित तौर पर बकाया बिल के कारण काटे जाने से पंचायतों के शासकीय कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने और बढ़े हुए बिजली बिलों की वसूली को लेकर भी असंतोष की बात उन्होंने कही है।

    इन्हीं मुद्दों को लेकर उन्होंने क्षेत्रीय विधायक से अपेक्षित हस्तक्षेप नहीं होने का आरोप लगाते हुए विरोध कार्यक्रम की घोषणा की है।

    विधायक से मुलाकात के लिए मुख्यालय तक पहुंचने का मुद्दा भी चर्चा में

    बिजली के मुद्दे के साथ-साथ दुर्ग ग्रामीण में विधायक की स्थानीय जनसुलभता और क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनने लगी है। क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि किसी ग्रामीण को विधायक से व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपनी समस्या रखना हो तो उसे दुर्ग मुख्यालय स्थित शासकीय निवास कार्यालय तक पहुंचना पड़ता है। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में विधायक का कोई स्पष्ट रूप से सक्रिय एवं नियमित स्थानीय जनसंपर्क कार्यालय नहीं होना भी सवालों के घेरे में बताया जा रहा है।

    क्षेत्रीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि अनेक मामलों में ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं को विधायक से सीधे संपर्क के बजाय विधायक प्रतिनिधियों अथवा कार्यालयीन स्टाफ के माध्यम से अपनी बात पहुंचानी पड़ती है। कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा विधायक के पीए से संपर्क करने पर कथित तौर पर टालमटोल वाले जवाब मिलने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विधायक पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

    'प्रतिनिधियों के भरोसे क्षेत्रÓ का सवाल

    राजनीतिक दृष्टि से देखें तो दुर्ग ग्रामीण जैसा विस्तृत विधानसभा क्षेत्र लगातार जनसंपर्क और स्थानीय स्तर पर शिकायतों के त्वरित निराकरण की अपेक्षा रखता है। ऐसे में स्थानीय विधायक कार्यालय की सक्रियता, नियमित जनदर्शन और आम नागरिकों की विधायक तक सीधी पहुंच जैसे मुद्दे अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।

    विपक्ष अथवा स्थानीय असंतुष्ट राजनीतिक समूहों के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि बिजली जैसी रोजमर्रा की समस्या सीधे किसान, विद्यार्थी, घरेलू उपभोक्ता और छोटे व्यवसायी वर्ग को प्रभावित करती है। ऐसे में बिजली कटौती के साथ विधायक तक पहुंच की शिकायतें जुडऩे से विरोध का राजनीतिक स्वर और मुखर होता दिख रहा है।

    30 सितंबर को अंडा चौक पर नजर

    ढालेश साहू ने जिला कलेक्टर को दिए आवेदन में स्पष्ट किया है कि 30 सितंबर, बुधवार को दोपहर 12 बजे अंडा चौक, दुर्ग ग्रामीण में कार्यक्रम प्रस्तावित है। आवेदन में प्रशासन से अनुमति देने का अनुरोध किया गया है तथा यह भी कहा गया है कि अनुमति मिलने पर ही कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं कानून-व्यवस्था संबंधी निर्देशों का पालन किया जाएगा।

    अब निगाहें जिला प्रशासन के निर्णय और विधायक ललित चंद्राकर की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि अनुमति मिलती है तो 30 सितंबर को अंडा चौक में होने वाला प्रस्तावित पुतला दहन दुर्ग ग्रामीण की बिजली व्यवस्था और स्थानीय जनप्रतिनिधि की जवाबदेही को लेकर एक प्रमुख राजनीतिक विरोध कार्यक्रम के रूप में सामने आ सकता है।

    फिलहाल मुख्य सवाल यही है—बिजली कटौती और बिलों की शिकायतों से जूझ रहे ग्रामीणों की आवाज विधायक तक सीधे पहुंचेगी या फिर यह मुद्दा विरोध-प्रदर्शन के जरिए ही आगे बढ़ेगा?

    केंद्रीय राज्यमंत्री ने दुर्ग के सखी वन स्टॉप सेंटर का किया निरीक्षण, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

    रायपुर। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने दुर्ग प्रवास के दौरान सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने संकटग्रस्त महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही काउंसलिंग, कानूनी सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास सुविधाओं की जानकारी ली।

    हर जरूरतमंद महिला तक पहुंचे मदद
    अधिकारियों ने राज्यमंत्री को सेंटर में दर्ज प्रकरणों और महिलाओं को दी जा रही सेवाओं की जानकारी दी। राज्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संकटग्रस्त महिलाओं को समय पर सुरक्षा, अस्थायी आवास, कानूनी सहायता और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने सेंटर में संचालित परामर्श, विधिक सहायता, चिकित्सा एवं पुलिस सहायता तथा अस्थायी आश्रय की व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया।

    व्यवस्थाओं की सराहना
    निरीक्षण के दौरान उन्होंने सेंटर की व्यवस्थाओं, साफ-सफाई और स्टाफ द्वारा किए जा रहे कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए केंद्र की सराहना की। सखी वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद सहित विभिन्न समस्याओं से पीड़ित महिलाओं को काउंसलिंग के साथ आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।
    इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास अधिकारी अशोक शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी अजय साहू सहित वन स्टॉप सेंटर के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

    मोंगरा बैराज से 8 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद बढ़ा जलस्तर, जेवरा-सिरसा पुलिस ने दोनों ओर की बेरिकेडिंग

    दुर्ग। मोंगरा बैराज से 8 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने और अन्य बैराजों से पानी की आवक बढ़ने के बाद शिवनाथ नदी उफान पर आ गई है। नदी का जलस्तर बढ़ने से समोदा नाला पर दुर्ग-बेमेतरा मार्ग की पुलिया पानी में डूब गई, जिसके चलते इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जेवरा-सिरसा चौकी पुलिस ने सड़क के दोनों ओर बेरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है। पुलिस द्वारा वाहन चालकों को मार्ग पर आगे नहीं बढ़ने तथा वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करने की अपील की गई है।

    जलस्तर बढ़ने से बढ़ी सतर्कता

    शिवनाथ नदी सहित आसपास के नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने के बाद पुलिस और प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। विशेष रूप से लोगों को नदी और नालों के आसपास जाने से बचने तथा पानी के तेज बहाव वाले स्थानों पर किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाने की सलाह दी गई है।

    पुलिस द्वारा मार्ग पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि जलभराव और तेज बहाव के बीच कोई वाहन या व्यक्ति जोखिम में न पड़े। फिलहाल दुर्ग-बेमेतरा मार्ग पर समोदा नाला की पुलिया से आवागमन बंद है।

    जुनवानी के सूर्या रेजिडेंसी में कार्रवाई; मुनादी के बाद तहसीलदार और पुलिस की मौजूदगी में सीलिंग

       भिलाई / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला घोटाला मामले से जुड़े कारोबारी सूर्यकांत तिवारी से संबंधित संपत्ति पर आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीम ने मंगलवार को भिलाई के जुनवानी स्थित सूर्या रेजिडेंसी में एक मकान को सील कर दिया।
    जानकारी के मुताबिक, उक्त मकान की रजिस्ट्री मनीष उपाध्याय के नाम पर होने की बात सामने आई है। हालांकि, आयकर विभाग की कार्रवाई के पीछे संपत्ति से संबंधित वास्तविक कारण और कानूनी आधार की आधिकारिक विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने आना बाकी है।
    बताया जा रहा है कि आयकर विभाग की टीम ढोल-नगाड़े के साथ सूर्या रेजिडेंसी पहुंची और वहां मुनादी कराई गई। इसके बाद तहसीलदार एवं पुलिस की मौजूदगी में मकान को सील करने की कार्रवाई की गई।
    कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है। आयकर विभाग की ओर से संपत्ति को सील किए जाने के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कार्रवाई किस प्रकरण, आदेश अथवा संपत्ति संबंधी जांच के तहत की गई है।
    फिलहाल कार्रवाई को लेकर विभागीय स्तर पर आगे की जानकारी का इंतजार है।

    वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान घोषित संपत्ति और आय का ब्यौरा सामने आया

    भिलाई। वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रिकेश सेन ने 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के समक्ष दाखिल शपथ पत्र में अपनी संपत्ति, आय और देनदारियों का विवरण प्रस्तुत किया था। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के MyNeta पर उपलब्ध हलफनामे के अनुसार उनकी कुल घोषित संपत्ति ₹1,23,74,351, यानी करीब ₹1.24 करोड़ थी।

    हलफनामे के आंकड़ों पर नजर डालें तो रिकेश सेन की चल संपत्ति करीब ₹13.74 लाख और अचल संपत्ति ₹1.10 करोड़ दर्ज थी। अचल संपत्ति में भिलाई के वैशाली नगर क्षेत्र स्थित आवासीय भवन भी शामिल बताया गया है।

    चल संपत्ति ₹13.74 लाख, अचल संपत्ति ₹1.10 करोड़

    चुनावी शपथ पत्र के अनुसार रिकेश सेन के नाम एवं परिवार/आश्रितों से संबंधित विवरणों को मिलाकर करीब ₹13.74 लाख की चल संपत्ति घोषित की गई थी। वहीं उनकी अचल संपत्ति का मूल्य करीब ₹1.10 करोड़ दर्ज किया गया था।

    इस तरह दोनों को मिलाकर कुल घोषित संपत्ति का आंकड़ा करीब ₹1.24 करोड़ तक पहुंचता है।

    ₹7.9 लाख की देनदारी भी दर्ज

    हलफनामे में संपत्ति के साथ देनदारियों का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार रिकेश सेन पर करीब ₹7.9 लाख की देनदारी घोषित थी।

    यानी चुनाव के समय प्रस्तुत दस्तावेज में संपत्ति के साथ-साथ उनके ऊपर मौजूद वित्तीय दायित्वों का विवरण भी चुनाव आयोग के समक्ष दर्ज किया गया था।

    वार्षिक आय करीब ₹12.4 लाख

    आय के विवरण में उनकी कुल वार्षिक आय करीब ₹12.4 लाख दर्शाई गई थी। इसमें उनकी व्यक्तिगत आय लगभग ₹7.1 लाख बताई गई थी।

    यह आंकड़े महत्वपूर्ण इसलिए हैं क्योंकि चुनावी हलफनामा किसी उम्मीदवार द्वारा चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसमें उम्मीदवार अपनी संपत्ति, आय, देनदारी और अन्य निर्धारित जानकारियां घोषित करता है।

    सवाल संपत्ति का नहीं, पारदर्शिता के दस्तावेज का है

    रिकेश सेन की संपत्ति को लेकर उपलब्ध आंकड़े अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं हैं। चुनावी हलफनामे का उद्देश्य ही उम्मीदवार की आर्थिक स्थिति को सार्वजनिक करना है, ताकि मतदाता उम्मीदवार की घोषित संपत्ति, आय और देनदारियों की जानकारी के आधार पर अपना आकलन कर सकें।

    2023 के चुनावी शपथ पत्र का यह ब्यौरा उस समय की घोषित वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। वर्तमान संपत्ति या वर्तमान आय का आकलन केवल बाद के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही किया जा सकता है।

    स्रोत: चुनावी हलफनामा/ADR-Myneta एवं News18 में प्रकाशित उम्मीदवार संबंधी विवरण।

       दुर्ग / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष- सेवा, सुशासन, समर्पण और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में उल्लेखित किए जाते हैं। प्रधानमंत्री की मंशानुरूप समाज के हर वर्ग के विकास और कल्याण के प्रयासों की इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आम नागरिकों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसी सेवा संकल्प के तहत संचालित Óप्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजनाÓ से दुर्ग जिले के ग्राम धनोरा निवासी वरुणी साहू के जीवन में भी बड़ा बदलाव आया है।
    दुर्ग जिले के ग्राम धनोरा में रहने वाली वरुणी साहू एक आम गृहिणी हैं। उनका परिवार काफी बड़ा है, और बड़े परिवार के साथ बिजली का बिल भी बड़ा ही आता था। वरुणी जी बताती हैं कि हर महीने आने वाला भारी-भरकम बिजली का बिल उनके घर के बजट पर एक बड़ा बोझ था। उनकी चिंता जायज थी, आखिर इतनी बिजली की खपत का खर्च उठाना किसी के लिए भी आसान नहीं होता। वरुणी जी को Óप्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजनाÓ के बारे में पता चला। यह योजना उन जैसे लाखों परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर आई है, जो बिजली के बढ़ते खर्च से परेशान हैं। बिना देर किए, उन्होंने इस योजना के तहत अपने घर की छत पर रूफ टॉप सोलर पैनल लगवाने का फैसला किया। जनवरी 2025 में यह सपना साकार हुआ और उनके घर की छत पर सूरज की रोशनी को बिजली में बदलने वाले पैनल स्थापित हो गए।
    सोलर पैनल लगने के बाद वरुणी जी के घर का बिजली का बिल लगभग आधा हो गया है। पहले जहां उन्हें पूरी बिजली के लिए भुगतान करना पड़ता था, अब तस्वीर बदल चुकी है। उन्होंने बताया कि उनके यहाँ कुल 2662 यूनिट बिजली की खपत हुई, जबकि उनके सोलर पैनल से 1283 यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ। जिससे अब उन्हें केवल शेष 1379 यूनिट बिजली का ही भुगतान करना पड़ता है। 2.5 लाख रुपये की लागत से लगे इस सोलर पैनल के लिए उन्हें सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी भी मिली है, जिससे यह निवेश उनके लिए और भी आसान हो गया। वरुणी साहू कहती हैं, ÓÓयह मेरे लिए सिर्फ पैसों की बचत नहीं, बल्कि एक नई आजादी है। प्रधानमंत्री जी के 25 वर्षों के सेवा, सुशासन और समर्पण का ही नतीजा है कि आज हम जैसे साधारण परिवार भी सौर ऊर्जा से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।ÓÓ Óप्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजनाÓ सिर्फ बिजली का बिल कम करने की योजना नहीं है, यह परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण को बचाने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। वरुणी जी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि इस योजना ने उनके जीवन में सचमुच रोशनी भर दी है।

    सेवा संकल्प अभियान में जल संरक्षण और जनभागीदारी का संदेश, 6,991 समूहों की 78,501 दीदियों के घर भी रोशन

    दुर्ग / शौर्यपथ / सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले में जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और जनभागीदारी का संदेश देते हुए 126 अमृत सरोवरों में 'आशीर्वाद का दीयाÓ जलाया गया। दुर्ग के 38, धमधा के 50 और पाटन के 38 अमृत सरोवरों में ग्रामीणों ने दीप प्रज्ज्वलित कर जलस्रोतों के संरक्षण और इनके सतत उपयोग का संकल्प लिया।

    अमृत सरोवरों के किनारे आयोजित कार्यक्रमों में ग्रामीणों ने दीप जलाकर जल परिसंपत्तियों को स्वच्छ रखने, पानी के सदुपयोग और जल संरक्षण को जन-अभियान बनाने का संदेश दिया। इस पहल में 6,991 स्व-सहायता समूहों से जुड़ी 78,501 दीदियों के घरों में भी 'आशीर्वाद के दीयेÓ जलाए गए, जिससे अभियान को महिला सहभागिता और सामुदायिक भागीदारी से जोड़ा गया।

    थनौद में भी जला आशीर्वाद का दीया

    ग्राम पंचायत थनौद, जनपद पंचायत दुर्ग में निर्मित अमृत सरोवर के किनारे भी दीप प्रज्ज्वलित किया गया। सरपंच मोनका देशमुख, सचिव रेखा साहू और पंच धनराज देवांगन की मौजूदगी में ग्रामीणों ने जल संरक्षण एवं अमृत सरोवर के सतत रख-रखाव का संकल्प लिया।

    ग्रामीणों ने कहा कि अमृत सरोवर गांव की महत्वपूर्ण जल परिसंपत्ति है। इसके संरक्षण से जल उपलब्धता बढ़ाने के साथ खेती और ग्रामीण आजीविका को भी सहारा मिलता है। दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से ग्रामीणों ने जलस्रोतों को स्वच्छ रखने और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश दिया।

    कार्यक्रम में उत्तम देवांगन, बैशखू देवांगन, श्यायलू देशमुख, पार्वती सिन्हा, चंदीका सिन्हा, लीला यादव, कुलेश्वरी ढीमर, टेकसिंग साहू, शकुन देशमुख, उषा साहू, मैना साहू, सुनीता साहू, कमलेश्वरी एवं गणेश राम देशमुख सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता की।

    अमृत सरोवरों में एक साथ दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से सेवा संकल्प अभियान ने जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखते हुए सामुदायिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी से जोडऩे का संदेश दिया।

    चार दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं, पीड़ितों के आरोप और चौकी प्रभारी के बयान में फर्क; मजदूरों में डर, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

    दुर्ग ग्रामीण। अंजोरा चौकी क्षेत्र के महमरा में करीब चार दिन पहले हुई चाकूबाजी और कथित लूट की घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है, लेकिन वारदात में शामिल बताए जा रहे आरोपी की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों है?

    पीड़ित पक्ष का आरोप है कि वारदात के दौरान बंदूक की नोक पर चाकूबाजी और लूटपाट की गई। पीड़ितों के मुताबिक मोबाइल, नगदी और बाइक की चाबी ले जाने की बात भी सामने आई है। दूसरी ओर अंजोरा चौकी प्रभारी चंद्रशेखर सोनी का कहना है कि पीड़ितों को शायद भ्रम हुआ हो और घटना में बंदूक नहीं बल्कि उंगली की नोक जैसी स्थिति रही होगी। बंदूक थी या नहीं, यह जांच का विषय है, लेकिन घटना में चाकूबाजी और कथित लूट के आरोपों की जांच पुलिस के सामने अहम चुनौती है।

    अनुभवी प्रभारी, फिर गिरफ्तारी में देरी क्यों?

    अंजोरा चौकी की जिम्मेदारी फिलहाल चंद्रशेखर सोनी संभाल रहे हैं। पुलिस विभाग में लंबे अनुभव के साथ वे क्राइम ब्रांच में भी सेवाएं दे चुके हैं। ऐसे में गंभीर घटना के चार दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्रवाई की गति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    सवाल यह भी है कि यदि पुलिस के पास घटना से संबंधित पर्याप्त जानकारी और सुराग हैं, तो आरोपी तक पहुंचने में आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या पुलिस की जांच किसी खास बिंदु पर अटकी हुई है, या आरोपी की तलाश के लिए अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई चल रही है?

    क्राइम ब्रांच की भूमिका भी सवालों के घेरे में

    घटना की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच की भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। यदि वारदात में हथियार के इस्तेमाल और लूट के आरोप सामने आए हैं, तो आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कार्रवाई कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है—इसका जवाब क्षेत्र के लोग जानना चाहते हैं।

    मजदूरों में डर, शाम ढलते ही सुरक्षा की चिंता

    महमरा और आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे मजदूर और गरीब परिवार हैं, जो रोज सुबह काम की तलाश में घर से निकलते हैं और देर शाम वापस लौटते हैं। ऐसे में चाकूबाजी और कथित लूट की घटना की चर्चा ने उनके बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    लोगों का सवाल सीधा है—जब आम आदमी रोजी-रोटी के लिए सुबह घर से निकलता है और देर रात लौटता है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

    अब पुलिस से तीन सीधे सवाल

    पहला— घटना के चार दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?

    दूसरा— पीड़ितों के बंदूक के आरोप और चौकी प्रभारी के “भ्रम” वाले बयान की पुलिस जांच किस निष्कर्ष तक पहुंची?

    तीसरा— चाकूबाजी और कथित लूट की इस घटना का पुलिस खुलासा आखिर कब करेगी?

    फिलहाल बंदूक थी या नहीं, यह जांच का विषय है, लेकिन चाकूबाजी और कथित लूट की घटना ने क्षेत्र में डर जरूर पैदा किया है। अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं। आरोपी कब पकड़ा जाएगा और मामले का पूरा सच कब सामने आएगा—यह सवाल महमरा के लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

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