भिलाई। शौर्यपथ /
भिलाई नगर इस वर्ष भगवान श्रीजगन्नाथ की रथ यात्रा के ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बना। श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर यह आयोजन नगर की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण बना। सेक्टर-6 और सेक्टर-4 स्थित जगन्नाथ मंदिरों से प्रारंभ हुई रथ यात्रा में हजारों श्रद्धालु जनसैलाब के रूप में शामिल हुए। मार्गभर "जय जगन्नाथ" के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया।
रथ यात्रा में नगर के जनप्रतिनिधि भी भावपूर्वक सम्मिलित हुए। भिलाई नगर विधायक माननीय देवेंद्र यादव पारंपरिक धोती-कुर्ता में रथ यात्रा में पहुंचे और भगवान श्रीजगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने महापौर नीरज पाल के साथ मिलकर रथ खींचा और नगरवासियों की सुख-समृद्धि के लिए प्रभु से कामना की।
समर्पण और सेवा से सज्जित रहा आयोजन
इस रथ यात्रा का आयोजन युवा खेल एवं सांस्कृतिक मंडल द्वारा किया गया, जिसने पूरे समर्पण और योजनाबद्ध तरीके से तैयारियां की थीं। आयोजन में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, छाया, प्राथमिक उपचार और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की गई थी। स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन और नगर निगम का योगदान सराहनीय रहा।
झांकियों और भक्ति संगीत ने बांधा समां
यात्रा में रंग-बिरंगी झांकियाँ, लोकनृत्य, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ सभी को मंत्रमुग्ध करती रहीं। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने जगह-जगह भंडारा, शीतल पेय, प्रसाद वितरण और स्वागत द्वार की व्यवस्था की, जिससे श्रद्धालुओं को सहूलियत मिली और यात्रा में उत्साह बना रहा। फूलों की वर्षा से सजा यात्रा मार्ग श्रद्धा और सौंदर्य का अनुपम दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।
धार्मिकता के साथ सामाजिक समरसता का संदेश
विधायक देवेंद्र यादव ने कहा, "यह आयोजन न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह सामाजिक एकता, सहयोग और भाईचारे का प्रतीक भी है। रथ यात्रा जैसी परंपराएं समाज में सेवा, श्रद्धा और समर्पण की भावना को प्रबल करती हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि इस आयोजन में जनसहभागिता ने यह सिद्ध किया है कि भिलाई नगर धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से सजग और जागरूक नगर है।
समापन आरती और महाप्रसाद वितरण के साथ
रथ यात्रा का समापन भव्य आरती और महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ। भक्तों ने पूरे भाव से प्रभु श्रीजगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह दिन भिलाईवासियों के लिए न केवल भक्ति और आनंद का पर्व रहा, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव का उत्सव भी बन गया।