दुर्ग । मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण अभियान और 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में वरदान साबित हो रही है। दुर्ग जिले के ग्राम सिलोदा (ग्राम पंचायत खपरी) की निवासी गीतांजली साहू की कहानी इस योजना की सफलता का एक जीवंत उदाहरण है, जहाँ सही समय पर मिली आर्थिक सहायता और पोषण परामर्श ने एक मां और बच्चे के जीवन में खुशहाली भर दी।
चुनौतियों भरा था सफर: कम वजन और हीमोग्लोबिन की समस्या
गर्भावस्था के शुरुआती दौर में गीतांजली का स्वास्थ्य चिंता का विषय था। उनका वजन मात्र 38 किलोग्राम था और हीमोग्लोबिन का स्तर भी 10 ग्राम (एनीमिक श्रेणी) था। ऐसी स्थिति में जच्चा-बच्चा दोनों के लिए जोखिम अधिक था।
योजना बनी मददगार: ₹3000 की पहली किस्त से बदला आहार
सेक्टर रसमड़ा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और महिला सशक्तिकरण केंद्र की टीम ने गीतांजली का पंजीयन 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' में कराया।
पोषण सहायता: पांचवें माह में उन्हें योजना के तहत 3000 रुपये की पहली किस्त प्राप्त हुई।
बदलाव: इस राशि का उपयोग गीतांजली ने अपने खान-पान को सुधारने में किया। उन्होंने अपने आहार में अंकुरित अनाज, ताजे फल, सलाद और दूध को शामिल किया।
सकारात्मक परिणाम: स्वस्थ मां, स्वस्थ बच्चा
नियमित देखरेख और संतुलित पोषण का परिणाम सुखद रहा:
वजन में सुधार: नौवें माह तक गीतांजली का वजन 8 किलो बढ़ गया।
हीमोग्लोबिन: रक्त का स्तर बढ़कर 11 ग्राम हो गया।
स्वस्थ प्रसव: 23 नवंबर 2025 को उन्होंने एक स्वस्थ बालक (वजन 2.50 किग्रा) को जन्म दिया।
शिशु विकास: जन्म के बाद उचित स्तनपान से मात्र एक माह में बच्चे का वजन बढ़कर 3.5 किलोग्राम हो गया है।
"शासन की यह मदद मेरे लिए संबल बनी"
गीतांजली साहू ने शासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिली जानकारी और आर्थिक सहायता ने उनके मातृत्व को सुरक्षित बनाया। वह अब अन्य महिलाओं को भी इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
? मुख्य बिंदु: महिला सशक्तिकरण केंद्र दुर्ग की पहल
जागरूकता अभियान: दुर्ग ग्रामीण के सेक्टर रसमड़ा में लगातार महिलाओं को योजनाओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
परामर्श: केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आहार चार्ट और नियमित जांच के लिए भी प्रेरि
त किया जा रहा है।