Print this page

“टेप से पेवर ब्लॉक नापे जा रहे, मगर अवैध कब्जे अनाप-शनाप! दुर्ग में ‘माप-तौल’ का दोहरा खेल?”

AI GENERATED AI GENERATED
  • rounak group

महापौर अलका बाघमार के सख्त निर्देश कागजों तक सीमित? रसूखदारों पर खामोशी, गरीबों पर कार्रवाई तेज—निगम की कार्यशैली पर उठे सवाल


दुर्ग | शौर्यपथ

दुर्ग नगर निगम की कार्यप्रणाली अब सिर्फ सवालों के घेरे में नहीं, बल्कि कटाक्ष का विषय बनती जा रही है। एक ओर जहां महापौर श्रीमती अलका बाघमार खुद इंच-टेप लेकर पेवर ब्लॉक के काम की नाप-जोख कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर शहर में रसूखदारों द्वारा किए गए अवैध कब्जे बिना नापे-तौले ही फल-फूल रहे हैं।


इंच-टेप का ‘चयनात्मक इस्तेमाल’?

हाल ही में सामने आए दृश्य में महापौर
? ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए सख्त निर्देश देती नजर आईं,
? इंच-टेप से काम की बारीकी जांच करती दिखीं।

लेकिन बड़ा सवाल यही है—
क्या यही इंच-टेप अवैध कब्जों की नाप-जोख के लिए कभी इस्तेमाल होगी?


अवैध कब्जों पर क्यों नहीं चलती ‘माप-तौल’?

शहर में कई ऐसे मामले हैं जहां

  • बिना अनुमति दो मंजिला इमारतें खड़ी हो गईं
  • सरकारी जमीन पर खुलेआम व्यवसाय शुरू होने की तैयारी
  • नोटिस के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं

आदिनाथ केयर सेंटर का मामला इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है।


गरीबों पर बुलडोजर, अमीरों पर ‘मौन व्रत’?

आरोप यह है कि
? ठेला-गुमटी वालों पर तत्काल कार्रवाई,
? लेकिन बड़े अतिक्रमणकारियों पर सिर्फ नोटिस और खामोशी

यह “चयनात्मक सख्ती” अब आम जनता की नजरों से छिपी नहीं है।


प्रेस विज्ञप्ति बनाम जमीनी सच्चाई

निगम द्वारा समय-समय पर जारी
? “सख्त प्रशासन” की प्रेस विज्ञप्तियां,
जमीनी हकीकत से मेल नहीं खातीं।

हकीकत यह है कि
? छोटे कार्यों को उपलब्धि बताकर प्रचार किया जा रहा है,
? जबकि बड़े अवैध कब्जे जस के तस खड़े हैं।


सुशासन पर सवाल खड़े करती तस्वीर

प्रदेश स्तर पर जहां
मुख्यमंत्री सुशासन और पारदर्शिता की बात कर रहे हैं,
वहीं दुर्ग में
? नीतियों पर अमल में भेदभाव के आरोप
उन दावों को कमजोर करते नजर आ रहे हैं।


जनता पूछ रही—“नाप कब होगी?”

अब शहर में एक ही सवाल गूंज रहा है—

  • क्या इंच-टेप सिर्फ पेवर ब्लॉक के लिए है?
  • क्या रसूखदारों के अवैध कब्जे “माप” से बाहर हैं?
  • क्या बुलडोजर सिर्फ गरीबों के लिए आरक्षित है?

दुर्ग में अब मुद्दा सिर्फ अतिक्रमण का नहीं, बल्कि न्याय और निष्पक्षता का बन चुका है।
यदि शहरी सरकार सच में “सख्त प्रशासन” दिखाना चाहती है, तो
? इंच-टेप और बुलडोजर दोनों का इस्तेमाल समान रूप से करना होगा।


अब देखना यह होगा कि महापौर अलका बाघमार ‘माप-तौल’ की इस राजनीति से बाहर निकलकर निष्पक्ष कार्रवाई करती हैं या फिर यह मामला भी केवल सवाल बनकर रह जाएगा।

Rate this item
(0 votes)
Last modified on Tuesday, 07 April 2026 13:26
शौर्यपथ

Latest from शौर्यपथ