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भिलाई इस्पात संयंत्र में पहली बार ड्राई आइस ब्लास्टिंग से डीप क्लीनिंग, 8.4 मेगावाट मोटर की दक्षता बढ़ाने की नई पहल

  • rounak group

दुर्ग  / शौर्यपथ /
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) ने अनुरक्षण कार्यों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सिंटर संयंत्र–3 में 8.4 मेगावाट क्षमता वाले वेस्ट गैस फैन (WGF) मोटर की डीप क्लीनिंग के लिए पहली बार ड्राई आइस ब्लास्टिंग तकनीक का सफल उपयोग किया गया है। यह पहल पारंपरिक सफाई पद्धतियों से आगे बढ़ते हुए सुरक्षित, उन्नत और पर्यावरण अनुकूल तकनीक अपनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

यह कार्य प्लेट मिल में वेस्ट गैस फैन मोटर के इन-हाउस रिपेयर के दौरान प्लेट मिल टीम के सहयोग से पूरा किया गया। वेस्ट गैस फैन मोटर सिंटर उत्पादन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसकी सुचारू कार्यप्रणाली उत्पादन की निरंतरता सुनिश्चित करती है।

ड्राई आइस ब्लास्टिंग तकनीक के माध्यम से मोटर के स्टेटर और रोटर में जमी धूल, गंदगी और सूक्ष्म कणों को बिना किसी यांत्रिक क्षति के प्रभावी रूप से हटाया गया। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें न पानी का उपयोग होता है और न ही किसी रासायनिक पदार्थ का, जिससे यह संवेदनशील विद्युत उपकरणों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल साबित होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस आधुनिक तकनीक के उपयोग से मोटर के प्रदर्शन में सुधार, आयु में वृद्धि और विश्वसनीयता में मजबूती आएगी, जिससे दीर्घकालिक परिचालन दक्षता सुनिश्चित होगी।

इस कार्य का सफल क्रियान्वयन मुख्य महाप्रबंधक (ओएचपी एवं सिंटर संयंत्र–3) सजीव वर्गीस और विभागाध्यक्ष (सिंटर संयंत्र–3) राहुल बिजुरकर के नेतृत्व में सिंटर संयंत्र–3 की विद्युत टीम द्वारा किया गया। इस दौरान मुख्य महाप्रबंधक (मेंटेनेंस एवं यूटिलिटीज) बी. के. बेहरा, मुख्य महाप्रबंधक (विद्युत) टी. के. कृष्णा कुमार और मुख्य महाप्रबंधक (प्लेट मिल) कार्तिकेय बेहरा ने मार्गदर्शन प्रदान किया।

इस उपलब्धि में भदेव टुडू, विवेक श्रीवास्तव, दीपक गुप्ता, राजेश साहू, एस. सी. साहू और अरुणेश शर्मा सहित अन्य कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा। संपूर्ण कार्य की निगरानी एचएमई, ईआरएस और ए एंड डी टीम द्वारा ए. के. डे, पी. के. पाढ़ी, के. बघेल, यू. एस. बरवाल और धीरेंद्र के नेतृत्व में की गई, जिसमें संतोष कुमार साहू, नरेंद्र राव और अतुल भादे का भी अहम सहयोग रहा।

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शौर्यपथ

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