भिलाई। 45-46 डिग्री की भीषण गर्मी के बीच लगभग 90 से अधिक बच्चों ने अनुशासन, संस्कार और आत्मविकास का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए गीता परिवार, छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित छह दिवसीय ‘बाल संस्कार सिंचन शिविर’ को सफल बनाया। शनिवार को शिविर का समापन “संस्कृति गौरव एवं आशीर्वाद समारोह” के रूप में भव्यता के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल ने कहा कि आज के दौर में संस्कार शिविरों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान केवल अधिकारों की मांग में नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों के निष्ठापूर्वक पालन और समाधानमूलक जीवन दृष्टि अपनाने में है।
25 से 30 मई तक मां शारदा पब्लिक स्कूल, सेक्टर-9 में आयोजित इस निःशुल्क शिविर में बच्चों को योग, आत्मरक्षा, लाठी-काठी चालन, स्मरण शक्ति विकास, नेतृत्व, अनुशासन, संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों का प्रशिक्षण दिया गया। पुणे से आए प्रशिक्षक कुमारी गौरी और श्री श्रीधर ने बच्चों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया।
समारोह के प्रमुख आकर्षण
- गोपुरम निर्माण का सामूहिक प्रदर्शन
- लाठी-काठी चालन के माध्यम से आत्मरक्षा का प्रदर्शन
- संगीतमय योगासन की मनोहारी प्रस्तुति
- बच्चों की सांस्कृतिक एवं प्रेरक प्रस्तुतियां
मातृ-पितृ पूजन बना भावनात्मक केंद्र
शिविर के दौरान आयोजित मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम ने सभी को भावुक कर दिया। बच्चों ने माता-पिता का तिलक कर, आरती उतारकर और चरण पूजन कर भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी आस्था और सम्मान का परिचय दिया। इस अवसर पर कई अभिभावकों की आंखें नम हो गईं।
संस्कारों के नए युग की शुरुआत
गीता परिवार पिछले 39 वर्षों से बाल संस्कार, गीता ज्ञान और वेदोत्थान के कार्यों में सक्रिय है तथा वर्तमान में अपने 40वें स्थापना वर्ष में प्रवेश कर चुका है। संस्था ने देशभर में 40 हजार कार्यकर्ता तैयार करने और 40 लाख लोगों तक गीता का संदेश पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
गीता परिवार छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष गीत गोविंद साहू, मध्यांचल प्रमुख प्रमिला ताई माहेश्वरी, दुर्ग-भिलाई इकाई की अध्यक्षा भूमिजा बेंडाले तथा उनकी टीम के प्रयासों से आयोजित यह शिविर भिलाई में संस्कार, संस्कृति और नैतिक चेतना के एक नए अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
संस्कार, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश देने वाला यह शिविर बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल साबित हुआ।