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Shourya Path News - क्या बड़े हादसे का इंतजार कर रही है शहरी सरकार? सभापति के वार्ड स्थित इंदिरा मार्केट में मौत को दावत देता जर्जर ढांचा, जिम्मेदार मौन

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क्या बड़े हादसे का इंतजार कर रही है शहरी सरकार? सभापति के वार्ड स्थित इंदिरा मार्केट में मौत को दावत देता जर्जर ढांचा, जिम्मेदार मौन

  • rounak group

टूटे खंभे के सहारे टिका प्रवेश द्वार, हजारों लोगों की जान जोखिम में; गंदगी, अव्यवस्था और लापरवाही पर उठे सवाल

दुर्ग। शहर के मध्य स्थित इंदिरा मार्केट इन दिनों नगर निगम की कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। जिस बाजार में प्रतिदिन हजारों नागरिक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं, वहां मुख्य प्रवेश द्वार की छत को एक टूटे हुए खंभे के सहारे टिकाकर रखा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जर्जर संरचना कभी भी धराशायी हो सकती है और किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

विडंबना यह है कि यह पूरा मामला नगर निगम के सभापति श्याम शर्मा के वार्ड का है। सभापति को निगम की कार्यवाही, पार्षदों के कार्यों की समीक्षा और जनहित से जुड़े मुद्दों पर निगरानी रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन उनके ही वार्ड में स्थित शहर के प्रमुख बाजार की ऐसी स्थिति आम जनता को सोचने पर मजबूर कर रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि यह खंभा या उससे सहारा प्राप्त संरचना अचानक गिरती है तो बाजार में मौजूद लोगों की जान पर बन सकती है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन, बाजार विभाग के जिम्मेदार पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और प्रतिदिन क्षेत्र का निरीक्षण करने वाले अधिकारी इस गंभीर खतरे से अनजान बने हुए हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं।

केवल जर्जर ढांचा ही नहीं, बल्कि इंदिरा मार्केट का सार्वजनिक मूत्रालय भी बदहाल स्थिति में है। पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण वहां हमेशा गंदगी और दुर्गंध बनी रहती है। इससे बाजार आने वाले नागरिकों, व्यापारियों और महिलाओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्वच्छता के दावे करने वाली शहरी सरकार के लिए यह स्थिति किसी आईने से कम नहीं है।

जनता यह भी सवाल उठा रही है कि जब भीषण गर्मी के दौरान मीना बाजार क्षेत्र में वाटर एटीएम से पानी बेचे जाने का मामला सामने आया था, तब भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी। जनहित से जुड़े ऐसे मामलों पर लगातार चुप्पी कहीं न कहीं जनता की अपेक्षाओं और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाती है।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या नगर निगम और उसके जनप्रतिनिधि किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जागेंगे? क्या किसी निर्दोष नागरिक की जान जाने के बाद ही मरम्मत और सुरक्षा उपायों की याद आएगी? आखिर जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है?

शहर की जनता अब यह जानना चाहती है कि जिन जनप्रतिनिधियों को विकास, सुरक्षा और व्यवस्था सुधारने के लिए चुना गया था, वे इन मूलभूत समस्याओं पर कब जवाब देंगे। यदि शहर के मध्य स्थित सबसे व्यस्त बाजार की यह स्थिति है तो अन्य क्षेत्रों की हालत का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।

जनहित में आवश्यक है कि नगर निगम तत्काल तकनीकी जांच कराए, जर्जर संरचना को सुरक्षित बनाए, सार्वजनिक सुविधाओं की व्यवस्था सुधारे और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित विभागों की जवाबदेही भी तय करे। क्योंकि प्रशासन की पहली जिम्मेदारी विकास नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा होती है।


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