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इंदिरा मार्केट में 'रसूखदारों' पर मेहरबान निगम प्रशासन: महापौर अलका बाघमार और बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल Featured

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दुर्ग। दुर्ग नगर पालिक निगम क्षेत्र के सबसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्र 'इंदिरा मार्केट' में अव्यवस्था का आलम चरम पर है। हैरत की बात यह है कि निगम के सुशासन का ढोल पीटने वाले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की चाबुक केवल गरीब पसरा (रेहड़ी-पटरी) वालों पर ही चलती है, जबकि रसूखदार और बड़े व्यापारी खुलेआम बरामदों से लेकर पूरी सड़क पर कब्जा जमाए बैठे हैं। इस दोहरे रवैये से महापौर श्रीमती अलका बाघमार और बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की कार्यप्रणाली पूरी तरह कटघरे में खड़ी हो गई है।

पसरा वालों पर सख्ती, बड़े रसूखदारों पर 'मौन' स्वीकृति!

महापौर अलका बाघमार द्वारा समय-समय पर इंदिरा मार्केट का दौरा किया जाता है और प्रेस विज्ञप्तियों में पसरा व्यवसायियों को हटाने एवं दुकानदारों को बरामदे के बाहर सामान न फैलाने की सख्त हिदायत दी जाती है। परंतु जमीनी धरातल पर निगम की कार्रवाई सिर्फ छोटे गरीबों और पसरा व्यवसायियों तक सिमट कर रह जाती है। बीते 18 महीनों के कार्यकाल में निगम प्रशासन द्वारा किसी बड़े रसूखदार व्यापारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का एक भी उदाहरण सामने नहीं आया है।

जनता बूट हाउस, बजाज बूट हाउस और ओम ज्वैलर्स का बढ़ा 'दायरा'

इंदिरा मार्केट में जनता बूट हाउस और बजाज बूट हाउस जैसी दुकानों ने बरामदे पर पक्का कब्जा जमा रखा है, जिससे राहगीरों और खरीदारों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

लेकिन सबसे भयावह स्थिति 'ओम ज्वैलर्स' की है। तस्वीरों (दुकान खुलने से पहले, बाद में और साइड व्यू) में स्पष्ट देखा जा सकता है कि किस प्रकार ओम ज्वैलर्स द्वारा बरामदे पर बड़ा निर्माण कर सड़क तक परोक्ष रूप से कब्जा जमा लिया गया है। दुकान खुलते ही व्यस्त चौक की सड़क के दोनों किनारों पर निजी वाहनों को इस कदर पार्क करा दिया जाता है कि सड़क का एक बड़ा भूभाग उनके कब्जे में चला जाता है। छोटी सी दुकान को सड़क हड़पकर बड़ा बनाने का अनूठा हुनर ओम ज्वैलर्स ने दिखा दिया है।

'सवालों के घेरे में निष्पक्षता: क्या विज्ञापनों और उपहारों का खेल है?'

आश्चर्य इस बात का है कि ओम ज्वैलर्स के इस खुलेआम अतिक्रमण पर महापौर अलका बाघमार, बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा और अतिक्रमण दस्ता पूरी तरह मौन धारण किए हुए हैं।

क्या बड़े विज्ञापनों के कारण जिम्मेदार एजेंसियों के हाथ बंधे हैं?

क्या संविधान की शपथ लेने वाली महापौर के पास इन रसूखदारों के खिलाफ कार्रवाई की इच्छाशक्ति नहीं है?

या फिर रसूखदार व्यापारियों के 'उपहारों की झोली' महापौर की दहलीज और बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा के दफ्तर तक पहुंच रही है?

कारण जो भी हो, परंतु ओम ज्वैलर्स जैसे व्यापारी दुर्ग नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था और शहर में सुशासन के दावों को सरेआम आईना दिखा रहे हैं।

शनिवार का अवैध बाजार और सड़कों पर बढ़ती फौज

शहर की इस बदहाल और बदरंग व्यवस्था के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदारी बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की नजर आती है। पिछले एक साल में सड़कों के किनारे बिना किसी योजना के ठेले वालों की फौज खड़ी हो गई है। इतना ही नहीं, शनिवार को लगने वाला अवैध बाजार महापौर अलका बाघमार की प्रशासनिक विफलता और कमजोर कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

शहर की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि नियम-कानून क्या सिर्फ गरीब पसरा वालों के लिए हैं, या महापौर और बाजार अधिकारी रसूखदार ओम ज्वैलर्स जैसे व्यापारियों पर भी बुलडोजर चलाने की हिम्मत दिखाएंगे?

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