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किताबों से निकलकर प्रकृति के बीच पहुंचे भूगोल के विद्यार्थी, नुक्कड़ नाटक से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

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साइंस कॉलेज दुर्ग के 42 विद्यार्थियों ने घुंचापाली, बारनवापारा अभयारण्य और सिरपुर का किया शैक्षणिक भ्रमण
सिरपुर एवं कुहारी में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों पर जनजागरूकता, ग्रामीणों को दिलाई पर्यावरण संरक्षण की शपथ

   दुर्ग / शौर्यपथ / शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय (साइंस कॉलेज), दुर्ग के भूगोल विभाग द्वारा विस्तार गतिविधि के अंतर्गत घुंचापाली, बारनवापारा अभयारण्य एवं ऐतिहासिक स्थल सिरपुर का शैक्षणिक एवं भौगोलिक भ्रमण आयोजित किया गया। इसमें विभाग के 42 विद्यार्थियों ने सहभागिता कर प्राकृतिक पर्यावरण, जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण और ऐतिहासिक विरासत का प्रत्यक्ष अध्ययन किया।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने बारनवापारा अभयारण्य की वनस्पतियों, वन्यजीवों और पारिस्थितिकीय विशेषताओं का अवलोकन किया। वहीं सिरपुर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के साथ क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं को समझा।

नुक्कड़ नाटक से ग्रामीणों को किया जागरूक

इस शैक्षणिक भ्रमण का विशेष आकर्षण सिरपुर एवं कुहारी ग्राम में आयोजित नुक्कड़ नाटक रहा। विद्यार्थियों ने जलवायु परिवर्तन के कारणों, पर्यावरण पर इसके प्रभावों और मानव जीवन के लिए उत्पन्न चुनौतियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश देते हुए स्थानीय नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। ग्रामीणों ने विद्यार्थियों की इस पहल की सराहना करते हुए पर्यावरण बचाने में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों के शैक्षणिक ज्ञान के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और सर्वांगीण विकास की भावना को मजबूत करती हैं। भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने प्रत्यक्ष क्षेत्रीय अध्ययन को भौगोलिक शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होता है।

इस गतिविधि में प्राध्यापक डॉ. प्रशांत दुबे, डॉ. कीर्ति पांडेय एवं डॉ. ओम कुमारी वर्मा सहित 42 विद्यार्थियों ने भाग लिया। यह भ्रमण शैक्षणिक अध्ययन के साथ पर्यावरणीय चेतना और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने की सार्थक पहल साबित हुआ।

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शौर्यपथ