भाजपा सरकार में अघोषित तौर पर बंद हुआ मनरेगा – 70 प्रतिशत गांवों में नहीं चल रहा कोई कार्य : कांग्रेस
रायपुर / शौर्यपथ /
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता श्री सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा की सरकार आने के बाद से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अपनी मूल भावना से भटक गई है। रोजगार की कानूनी गारंटी देने वाली यह योजना अब प्रदेश में अघोषित रूप से ठप पड़ी है।
श्री वर्मा ने बताया कि प्रदेश के 70 प्रतिशत से अधिक गांवों में मनरेगा का कोई कार्य नहीं चल रहा, जिससे मजदूर परिवार रोजी-रोटी की समस्या से जूझ रहे हैं और उन्हें पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार स्पष्ट करे कि प्रदेश में कितने स्थानों पर मनरेगा के कार्य संचालित हो रहे हैं और पिछले 20 महीनों में कितने परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ में प्रतिवर्ष लगभग 18 करोड़ कार्य दिवस सृजित किए जाते थे। लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद इस योजना पर रोक-टोक और कटौती शुरू हो गई। उन्होंने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के समय प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य को 100 दिन का गारंटेड रोजगार मिलता था, जिसमें सड़क निर्माण, तालाब व कुएं की खुदाई, जल संरक्षण एवं सूखा राहत जैसे कार्य शामिल थे। यदि 15 दिन के भीतर काम नहीं मिलता था तो मजदूरी का भुगतान किया जाता था। लेकिन अब न तो पर्याप्त काम दिया जा रहा है और न ही मजदूरी का समय पर भुगतान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां गरीब विरोधी हैं। पूरे देश में मनरेगा के तहत 27 करोड़ मजदूर पंजीकृत हैं, लेकिन मोदी सरकार एक-तिहाई यानी 9 करोड़ मजदूरों को भी सालभर में पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं करा पा रही है। 100 दिन के रोजगार की गारंटी तो दूर, 30 दिन का काम भी मजदूरों को नहीं मिल पा रहा है।
छत्तीसगढ़ में भाजपा की डबल इंजन सरकार बनने के बाद मजदूरों की स्थिति और भी बदहाल हो गई है। श्री वर्मा ने कहा कि यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है और सरकार को तुरंत प्रभाव से मनरेगा के कार्य प्रारंभ कर मजदूरों को रोजगार और मजदूरी उपलब्ध करानी चाहिए।