February 05, 2026
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राजनीति (1178)

अभियान चलाकर 15 दिन और धान खरीदी की जाये -कांग्रेस

   रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बंद कर दिया है। लेकिन अभी भी प्रदेश के लाखों किसान अपना धान नहीं बेच पाये है। इस साल सरकार ने मात्र 53 दिन ही धान खरीदा। अंतिम तिथि भी 31 जनवरी थी, लेकिन अंतिम 2 दिन शनिवार और रविवार होने के कारण खरीदी नहीं हुई। पूर्व में घोषित 75 दिन भी पूरी खरीदी नहीं किया गया। इस वर्ष सरकार के द्वारा घोषित लक्ष्य 165 लाख मीट्रिक टन था, लेकिन सरकार ने मात्र 139 लाख 85 हजार मीट्रिक टन ही धान खरीदी किया गया। लक्ष्य से 25 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदी किया गया। पिछले साल सरकार ने 149 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा था, इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले 9 लाख 15 हजार मीट्रिक टन कम की खरीदी की गयी।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कुल 27 लाख किसानों का पंजीयन हुआ था, जिसमें से 2.5 लाख किसान अपना धान नहीं बेच पाये। लगभग 5 लाख किसानो का एग्रीस्टेक पोर्टल की परेशानी के कारण पंजीयन नहीं हुआ। किसानों को धान बेचने से रोकने बिना सहमति जबरिया रकबा सरेंडर करवा दिया गया। पूर्व से जारी टोकन को निरस्त करवाया गया। हजारो किसान सरकार के इस षडयंत्र का शिकार हुये। धान का टोकन नहीं मिलने, धान की खरीदी नहीं होने के कारण प्रदेश के महासमुंद, कवर्धा, कोरबा, जैसे स्थानों पर अनेको किसानों ने आत्महत्या का प्रयास किया। एक ने आत्महत्या भी किया। यह बताता है कि प्रदेश में धान खरीदी के कारण किसान परेशान हुये। सिर्फ नारायणपुर, बलरामपुर, बस्तर में पिछले साल के लगभग बराबर धान की खरीदी हुई, शेष सभी जिलों में 5 प्रतिशत से लेकर 32 प्रतिशत तक कम खरीदी सरकार ने किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार की तरफ से कम खरीदी के लिये जश्न मनाया गया। अपने कर्मचारियो को जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से जिलेवार हुई धान खरीदी के आंकड़े जारी किये गये, जिसमें किस जिले में कितनी खरीदी हुई। पिछले साल से कितने प्रतिशत कमी हुई इसका ब्योरा है। सरकार ने अपने आंकड़े में माना है कि प्रदेश के अधिकांश जिलो में पिछले साल के मुकाबले कम खरीदी हुई इसके लिये खाद विभाग, राजस्व विभाग, सहकारिता विभाग नान एवं जिला तथा ब्लाक के अधिकारियो को एसएमएस के जरिये बधाई दिया गया है। यदि लक्ष्य से कम खरीदी हुई है तो किस बात की बधाई। बधाई दे रहे मतलब साफ है आपका ईरादा कम खरीदी का था, आप उसमें कामयाब हुये। लक्ष्य से कम के लिये फटकार लगानी थी, नहीं लगाये क्यो? मतलब कम खरीदी ही आपका लक्ष्य था।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार अभियान चलाकर धान खरीदी 15 दिनों के लिये फिर शुरू करें ताकि बचे सभी किसानों का धान समर्थन मूल्य में खरीदा जा सके।

गरियाबंद की घटना बिगड़ती कानून व्यवस्था का परिणाम

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि गरियाबंद से बेहद ही दुर्भाग्यजनक खबर आ रही है, वहां के दुतकैया गांव में एक समुदाय के घरों को जला दिया गया। वहां पर एक अपराधी के द्वारा फैलाए जा रहे आतंक के कारण यह घटना घटी। यह घटना पुलिस और सरकार की लापरवाही का परिणाम है। पुलिस सचेत होती अराजक तत्व पर कार्यवाही करती तो शायद यह घटना नहीं होती। मै दोनों पक्षों से शांति की अपील करता हूं तथा घटना की न्यायिक जांच की मांग करता हूं। इसके पहले बलौदाबाजार, कवर्धा, बलरामपुर के बाद गरियाबंद में जनता ने कानून हाथ में लिया है। इससे साफ है लोगों का सरकार और उसके कानून व्यवस्था पर भरोसा नहीं है।

बजट से छत्तीसगढ़ ठगा गया

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कल मोदी सरकार का जो बजट प्रस्तुत हुआ। उसमें एक बार फिर छत्तीसगढ़ का उल्लेख सिर्फ एक जगह है। विशेष कारीडोर में वह भी छत्तीसगढ़ की जनता के लिये नहीं छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा का दोहन उद्योगपति मित्र आसानी से कर सके। इसलिये राज्य के विकास के लिये बस्तर, सरगुजा क विकास के लिये बजट में कुछ नहीं है।

एपस्टीन फाईल को लेकर भाजपा चुप क्यों है

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि एपस्टीन फाइल के बारे में मोदी और भाजपा चुप क्यों है इस मामले में प्रधानमंत्री और भाजपा को स्पष्टीकरण देना चाहिये की एपस्टीन फाइल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम से देश की छवि धूमिल हो रही है।

पत्रकार वार्ता में प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, महामंत्री दीपक मिश्रा, सकलेन कामदार, वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, सुरेन्द्र वर्मा, अशोक राज आहूजा, अमरजीत चावला, प्रवक्ता सत्य प्रकाश सिंह, अजय गंगवानी उपस्थित थे।

   रायपुर/ शौर्यपथ / आम बजट में प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि इस बजट से महिलाएं काफी हताश एवं निराश है। आम बजट में महिलाओं को हर बार की तरह इस बार भी निराशा ही मिला। 2014 में 100 दिन में महंगाई कम करने की बात नरेन्द्र मोदी जी ने कहे थे महिलाओं को समझ नहीं आ रहा है कि नरेन्द्र मोदी के गिनती में 100 दिन आएंगे या नहीं। आम बजट पर महंगाई से निजात मिलेगा आश लगाये महिलाएं बैठी थी लेकिन बेलगाम महंगाई पर वित्त मंत्री भी चुप्पी साध ली है। जब सीतारमण जी वित्त मंत्री बनी तब महिलाओं में खुशी की लहर थी कि महिला वित्त मंत्री है तो हमारा किचन हरा भरा रहेगा, महिला होने के नाते महिलाओं की परेशानी अच्छा से समझेगी लेकिन सब विपरीत हो गया, किचन में संकट छा गया। किचन में लगने वाले चिमनी के दाम बढ़ाये गये है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि बेलगाम महंगाई को कम करने के लिये केंद्र सरकार का कोई प्रयास नही है। आम बजट सिर्फ नाम का रह गया है। 9.6 करोड़ लोगों को मुफ्त गैस कनेक्शन देने की इस बजट में बात कही जा रही है लेकिन इस बात का जिक्र नही किया गया कि मोदी सरकार के गलत नीति के कारण गैस सिलेंडर के दाम 1200 रुपये हो गये है। दैनिक जीवन के आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ती जा रही है। उस पर इस बजट में कुछ भी नही। सोना, चांदी आम व्यक्ति के पहुँच से पहले ही बाहर थी अब इस बजट के बाद से सोना, चांदी को लोग सिर्फ सपने में देखेंगे हकीकत में खरीदने के बारे में सोचेगे भी नहीं। मोदी ने कहा था कि सबके खाते में 15-15 लाख आयेंगे महिलाएं बेसब्री से इंतजार कर रही थी कि इस बजट से 15 लाख मिल जायेंगे लेकिन इस बार भी निराशा ही हाथ लगा।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सीता रमन जी का नवां बजट था इस बजट ने भी पिछले बजट के समान आधी आबादी महिलाओं का बजट में अनदेखी किया गया है। महिला सुरक्षा के नाम पर बजट में कुछ नही। इस बजट से हर वर्ग निराश है। बजट के नाम से जनता के साथ धोखा है।

शौर्यपथ राजनितिक /
प्रयागराज में आयोजित माघी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि अब यह उत्तर प्रदेश की राजनीति का ऐसा केंद्र बन गया है, जहाँ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सत्ता, संगठन और संत-समाज के साथ संबंधों की गहन परीक्षा हो रही है। शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार, प्रशासनिक कार्रवाई और उसके बाद उभरे विरोधाभासी राजनीतिक संकेतों ने सरकार को एक जटिल चक्रव्यूह में खड़ा कर दिया है।
शंकराचार्य बनाम प्रशासन: विवाद की जड़
माघी मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद के पालकी यात्रा को लेकर प्रशासन और संत-समाज के बीच टकराव सामने आया। सरकार की ओर से शंकराचार्य पर “व्यवस्था बाधित करने” जैसे आरोप लगाए गए और लगातार नोटिस भेजे गए। इसके विपरीत, उसी प्रतिबंधित क्षेत्र में ‘सातवाँ बाबा’ का वाहन से प्रवेश—और उस पर किसी प्रकार की रोक-टोक या कार्रवाई का अभाव—प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
संत-समाज में यह संदेश गया कि नियम सबके लिए समान नहीं हैं, और यही असंतोष का मूल बनता चला गया।
संत-समाज में दरार, सनातन में विभाजन
इस घटनाक्रम के बाद साधु-संत दो गुटों में बँटते दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर शंकराचार्य की पदवी और वैधता तक पर सवाल उठने लगे—जो किसी भी सरकार के लिए बेहद संवेदनशील स्थिति है।
भारत के चार शंकराचार्यों में से कुछ का खुला समर्थन, तो कुछ का मौन—दोनों ही अलग-अलग अर्थों में देखा जा रहा है। जहाँ समर्थन स्पष्ट संदेश देता है, वहीं मौन को भी कहीं न कहीं समर्थन या रणनीतिक दूरी के रूप में व्याख्यायित किया जा रहा है।
सरकार के भीतर दो स्वर
सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सार्वजनिक रूप से शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद को बारंबार प्रणाम, सम्मान-स्नान और मामला समाप्त करने की अपील कर सरकार के भीतर मौजूद दो अलग-अलग दृष्टिकोणों को उजागर कर दिया।
एक ओर मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रशासनिक सख्ती और नोटिस, दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री का नरम और समन्वयी रुख—यह विरोधाभास केवल संत-समाज ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया।
केंद्रीय नेतृत्व का मौन और संगठनात्मक संकेत
इस पूरे प्रकरण में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की चुप्पी भी कम अर्थपूर्ण नहीं है। न तो खुला समर्थन, न ही स्पष्ट असहमति—यह मौन कई तरह के राजनीतिक संदेश देता है।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी की नियुक्ति—जो कथित तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली पसंद नहीं माने जाते—भी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक संतुलन और शक्ति-वितरण के संकेत देती है।
2027 से पहले योगी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि मामला केवल एक शंकराचार्य या एक मेला-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। यह सनातन समाज की भावनाओं, संतों के सम्मान, और सत्ता-संगठन के समीकरणों से जुड़ा व्यापक प्रश्न बन चुका है।
यह भी चर्चा में है कि केशव प्रसाद मौर्य की दिल्ली से निकटता और योगी आदित्यनाथ की कथित बढ़ती दूरी, भविष्य की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।
निष्कर्ष: परीक्षा की घड़ी
माघी मेले में हुआ यह विवाद उत्तर प्रदेश सरकार के लिए चेतावनी संकेत है। यदि संत-समाज और आम सनातन अनुयायी स्वयं को उपेक्षित या भेदभाव का शिकार महसूस करते हैं, तो इसका प्रभाव सीधे विधानसभा चुनाव 2027 पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है—
क्या वे प्रशासनिक सख्ती, संत-सम्मान और संगठनात्मक संतुलन के बीच इस राजनीतिक चक्रव्यूह को तोड़ पाएँगे?
या फिर यह घटनाक्रम आने वाले समय में उनकी सत्ता-यात्रा का सबसे कठिन मोड़ साबित होगा—यह निर्णय अब उनके अगले कदमों पर निर्भर करता है।

दुर्ग। शौर्यपथ
छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदामों से करोड़ों रुपये मूल्य के धान के कथित रूप से "मुसवा (चूहा)" द्वारा नष्ट किए जाने के भाजपा सरकार के दावे के खिलाफ दुर्ग में कांग्रेस ने ऐसा प्रतीकात्मक और राजनीतिक प्रतिकार किया, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया। किसानों की मेहनत पर पर्दा डालने और धान घोटाले की जिम्मेदारी चूहों पर डालने के आरोपों के बीच जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के नेतृत्व में मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को एक अनोखा "मुसवा प्रदर्शन" आयोजित किया गया।

राजीव भवन से कलेक्टर कार्यालय तक ढोल-नगाड़ों, नारों और प्रतीकात्मक झांकियों के साथ निकली यह रैली पूरी तरह राजनीतिक संदेश से भरी रही। प्रदर्शन का केंद्र बनी "चूहा झांकी", जिसमें चूहे के वेश में सजे कार्यकर्ता नाचते-गाते आगे बढ़े और हाथों में धान लेकर यह जताते रहे कि भाजपा सरकार अपनी नाकामी और भ्रष्टाचार को "चूहा खा गया" कहकर छुपाने की कोशिश कर रही है।

इस प्रदर्शन में दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल की भूमिका सबसे प्रमुख रही। उन्होंने कहा कि धान किसानों की मेहनत का प्रतीक है और उसे चूहों के खाते में डालना सरकार की असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। "यदि सरकार का दावा है कि धान चूहे खा गए, तो आज कांग्रेस वही चूहे सरकार को सौंप रही है। अब जवाब सरकार दे," उन्होंने तीखे शब्दों में कहा। धीरज बाकलीवाल ने इसे केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि किसानों के आत्मसम्मान पर सीधा हमला बताया।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने प्रतीकात्मक रूप से पिंजरे में बंद चूहे प्रशासन को सौंपे। इन चूहों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि असल जिम्मेदारी किसी जानवर की नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की है। कलेक्टर कार्यालय परिसर में भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश और किसान आक्रोश साफ दिखाई दिया।

इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष ने कहा कि सरकार धान खरीदी की समय-सीमा नहीं बढ़ा रही है और टोकन व्यवस्था को सीमित रखकर किसानों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है और बड़ी मात्रा में धान खरीदी से बाहर रह जाने का खतरा है।

प्रदर्शन के बाद दुर्ग कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें करोड़ों के धान घोटाले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों व मंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई, किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित करने, टोकन सीमा बढ़ाने और खरीदी की समय-सीमा में विस्तार की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।

कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार ने किसानों के हित में तुरंत निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेशव्यापी और उग्र रूप लेगा। दुर्ग में निकली यह "मुसवा बारात" अब भाजपा सरकार की कथित विफलता, भ्रष्टाचार और किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ एक मजबूत राजनीतिक प्रतीक बनकर सामने आ गई है।

'वीबीजीरामजीÓ के नाम पर रोजगार गारंटी खत्म करने का आरोप, दुर्ग में उबाल

दुर्ग / शौर्यपथ।
केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का स्वरूप बदलकर वीबीजीरामजी किए जाने के विरोध में कांग्रेस का आक्रोश तेज हो गया है। दुर्ग जिला युवा कांग्रेस (ग्रामीण) के अध्यक्ष जयंत देशमुख के नेतृत्व में युवा कांग्रेस ने दुर्ग सांसद विजय बघेल के निवास का घेराव करने की चेतावनी दी है। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर 7 दिनों के भीतर ठोस निर्णय लेने की मांग की गई है। चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो सांसद निवास का घेराव किया जाएगा।

कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे 'मनरेगा बचाओ संग्रामÓ अभियान के तहत युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मनरेगा में किए गए बदलावों से गरीब मजदूरों की रोजगार गारंटी को कमजोर किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा बजट कैपिंग कर योजना की मांग-आधारित प्रकृति को समाप्त किया जा रहा है, वहीं फंडिंग का बोझ राज्यों पर डालकर केंद्र अपना दायित्व निभाने से पीछे हट रहा है।

दुर्ग ग्रामीण युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष जयंत देशमुख ने कहा कि मनरेगा देश के गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों की जीवनरेखा है, लेकिन केंद्र सरकार इसे योजनाबद्ध तरीके से कमजोर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 100 दिनों की रोजगार गारंटी को 125 दिनों का भ्रम बताकर प्रचार किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में बजट कटौती, बढ़ता केंद्रीकरण और राज्यों पर दबाव डालकर मजदूरों के अधिकार छीने जा रहे हैं।

जयंत देशमुख ने दुर्ग सांसद विजय बघेल से स्पष्ट शब्दों में मांग की कि वे केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर मनरेगा में किए गए बदलावों को वापस करवाएं, अन्यथा नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि यदि 7 दिनों के भीतर कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो युवा कांग्रेस सांसद निवास का घेराव कर आंदोलन को और तेज करेगी।

इस विरोध प्रदर्शन में प्रभारी आस मोहम्मद खान, इंदु वर्मा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष गुरदीप सिंह भाटिया, ब्लॉक अध्यक्ष गोपी वर्मा, यशवंत देशमुख, हेमंत साहू, पंकज सिंह, आशीष वर्मा, शशांक साहू, समीर साहू, नज़रुल इस्लाम, अहमद चौहान, दीपांकर साहू, सूरज, फिरोज खान, विकास साहू, आकाश सेन, राम वर्मा, कय्यूम खान, प्रवीण देवांगन, राकेश निषाद, प्रांजल कुर्रे, शुभम देशमुख, राहुल साहू सहित सैकड़ों युवा कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
युवा कांग्रेस ने दो टूक कहा कि गरीब मजदूरों के हक पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो यह आंदोलन सड़क से संसद तक ले जाया जाएगा।

दुर्ग।
छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदामों से करोड़ों रुपये मूल्य के धान के कथित रूप से “मुसवा (चूहा)” द्वारा नष्ट किए जाने की घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे किसानों की मेहनत और अन्नदाता के सम्मान के साथ खुला मज़ाक करार दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अपनी विफलताओं और भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने के लिए जिम्मेदारी चूहों पर डाल रही है, जबकि असल दोषी सत्ता में बैठे लोग और संरक्षण प्राप्त अधिकारी हैं।

जिला कांग्रेस कमेटी, दुर्ग (ग्रामीण) के जिलाध्यक्ष श्री राकेश ठाकुर ने कहा कि धान किसानों के पसीने, खून और वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उसे “चूहा खा गया” कहना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह भाजपा सरकार, उसके मंत्रियों और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही, भ्रष्टाचार और मिलीभगत को उजागर करता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश की जनता मानती है कि धान मुसवा ने नहीं, बल्कि भाजपा सरकार और उसके मंत्रियों ने हजम किया है।

इसी के विरोध में 20 जनवरी 2026, मंगलवार को कांग्रेस पार्टी द्वारा दुर्ग कलेक्टर कार्यालय के समक्ष एक लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण एवं प्रतीकात्मक प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान भाजपा सरकार के खिलाफ अनोखे और तीखे प्रतीकों के माध्यम से जनाक्रोश व्यक्त किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों की प्रतीकात्मक “बारात” ढोल-नगाड़ों के साथ निकाली जाएगी, वहीं कार्यकर्ता मुसवा (चूहों) के मुखौटे पहनकर धान खिलाते हुए प्रतीकात्मक दृश्य प्रस्तुत करेंगे। इसका उद्देश्य जनता को यह संदेश देना है कि धान चूहों ने नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों ने निगल लिया है।

कांग्रेस की मांग है कि इस पूरे धान घोटाले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और मंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा किसानों के साथ हुए अन्याय का जवाब सरकार दे। प्रदर्शन के पश्चात दुर्ग कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम प्रतीकात्मक रूप से “चूहा” सौंपकर ज्ञापन प्रस्तुत किया जाएगा।

इस संबंध में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा कलेक्टर दुर्ग को पूर्व में ज्ञापन सौंपकर कार्यक्रम की सूचना दी जा चुकी है। ज्ञापन सौंपते समय धीरज बाकलीवाल, नीता लोधी, देवेंद्र देशमुख, रिवेंद्र यादव, नंद कुमार सेन, आनंद ताम्रकार, गुरदीप भाटिया, मनीष बघेल, देवश्री साहू, धर्मेंद्र साहू, जीतू पटेल, हीरेन्द्र साहू, मोहित वालदे, सुनीत घोष, सौरभ ताम्रकार, भीमसेन, प्रीतम देशमुख सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।

कांग्रेस संगठन के भीतर भी नई सक्रियता साफ दिखाई दे रही है। धीरज बाकलीवाल को अध्यक्ष बनाए जाने और युवाओं व नए चेहरों को ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने से संगठन में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। परिवारवाद से दूरी बनाते हुए कांग्रेस अब ज़मीनी मुद्दों पर आक्रामक रूप से सामने आ रही है। दुर्ग में कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता को देखकर जनता भी अब उससे जनहित से जुड़े मुद्दों पर मुखर आवाज़ की उम्मीद कर रही है।

यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान, जवाबदेही और पारदर्शिता की लड़ाई का प्रतीक बनने जा रहा है।

  रायपुर/शौर्यपथ / किसानों को ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था को फिर से बहाल करने की मांग करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन प्रक्रिया में जानबूझ कर बाधित किया जा रहा है, इस खरीफ सीजन के धान खरीदी को पूरा होने में अब एक पखवाड़ा से भी कम समय शेष बचा है, यही वो समय है जब बड़े किसानों का धान मंडी में आता है, ऐसे समय में ऑनलाइन टोकन बंद करना किसानों के साथ अन्याय है। यह सरकार धान की खरीदी को दुर्भावना पूर्वक नियंत्रित करने के लिए बहुत ही अव्यावहारिक शर्ते रोज रोज लागू कर रही है, पहले धान खरीदी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जारी निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि उपार्जन केंद्र में प्रतिदिन काटे गए टोकन और वास्तविक खरीदी में ज्यादा से ज्यादा अंतर लाना है, मतलब जितना टोकन काटा गया है, उतना धान मत खरीदो। धान खरीदी में किसानों को धान बेचने से रोकने की कई तरह से कोशिश की गई है जिसका नतीजा है कि इस बार धान हर सोसाइटियों में अब तक कम खरीदा गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि यह सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों को चोर और तस्कर बता रही है, उनके घरों और खलिहानों में छापे मारे जा रहे हैं, किसानों के मेहनत से उपजाए धान को जप्त कर रही है हकीकत यह है कि प्रदेश में अभी भी करीब 5 लाख ऐसे किसान हैं, जिन्होंने एक बार भी धान नहीं बेचा है। अब अंतिम के 13 दिनों में धान की आवक तेज होगी, इसी को रोकने दुर्भावना पूर्वक किसान विरोधी षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। एक तरफ प्रतिदिन टोकन की मात्रा में यह सरकार कटौती कर रही है, एन आई सी के माध्यम से सोसाइटियों के प्रतिदिन खरीदी की मात्रा को घटाया जा रहा है, दूसरी तरफ सत्यापन के लिए अलग फार्मूला अपनाया जा रहा है ताकि किसानों को अपना पूरा धान बेचने से रोका जा सके। भौतिक सत्यापन के लिए अलग से ऐप बनाया गया है जिसकी ट्रेनिंग पटवारियों को दी जा चुकी है। बिना सत्यापन के किसी भी किसान का धान नहीं खरीदना है। पिछले साल की खरीदी के हिसाब से भौतिक सत्यापन करने का आदेश देकर दबाव बनाया जा रहा है, जिसका विरोध पटवारियों ने किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने रकबा समर्पण के नाम पर धान कम खरीदने का आरोप लगाते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ के किसान जान चुके हैं कि ये डबल इंजन वाली भाजपा सरकार किसानों का पूरा धान नहीं खरीदना चाहती। रायगढ़ जिला पटवारी संघ का ज्ञापन धान खरीदी को लेकर इस सरकार की मंशा को बेहद स्पष्ट करते हैं। पटवारियों ने बड़े ही स्पष्ट रूप से यह कहा है कि राज्य सरकार के उच्चाधिकारियों द्वारा सभी किसानों पर रकबा समर्पण हेतु अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, ये आरोप बेहद ही संगीन है और भाजपा सरकार के किसान विरोधी चेहरे को बेनकाब करने वाला है । कांग्रेस पार्टी यह मांग करती है कि इस प्रकार के किसी भी आदेश को तुरंत ही रोका जाए, ऑनलाइन टोकन व्यवस्था पुनः शुरू करें तथा ऐसे किसान विरोधी मानसिकता वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

10 से 850% बढ़ोतरी से गरीब-किसान-व्यापारी त्रस्त, सरकार को भारी राजस्व नुकसान

रायपुर, 13 जनवरी 2026।
जमीन गाइडलाइन दरों में बेतहाशा वृद्धि और दावा–आपत्ति के बाद भी उसमें कोई सुधार नहीं करने को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने इसे सीधा-सीधा तानाशाही रवैया करार देते हुए कहा कि सरकार जनता की आवाज सुनने को तैयार नहीं है।

धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार ने बिना सर्वे, बिना संवाद और बिना ज़मीनी हकीकत जाने प्रदेशभर में जमीन गाइडलाइन दरों में 10 प्रतिशत से लेकर 850 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी। इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस के साथ-साथ आम जनता, व्यापारी और किसान लगातार विरोध जता रहे हैं।

दावा–आपत्ति सिर्फ दिखावा, जनता को गुमराह किया

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से घबराकर सरकार ने गाइडलाइन दर वृद्धि पर 31 दिसंबर तक दावा–आपत्ति आमंत्रित करने और उसके बाद दरों में सुधार का आश्वासन दिया था। लेकिन दावा–आपत्ति की अवधि समाप्त होने के बाद भी सरकार ने मनमानी बढ़ोतरी पर कोई फैसला नहीं लिया, जो यह साबित करता है कि दावा–आपत्ति की प्रक्रिया सिर्फ जनता को गुमराह करने का जरिया थी।

उन्होंने कहा कि अब जनता सरकार की मंशा समझ चुकी है और एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर है।

हर वर्ग पर मार, रियल एस्टेट ठप

धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि गाइडलाइन दरों में इस तानाशाही बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी पर पड़ रहा है—

  • गरीब परिवार घर बनाने के लिए जमीन नहीं खरीद पा रहे

  • किसान कृषि भूमि लेने में असमर्थ हैं

  • व्यापारी व्यावसायिक संस्थान खोलने से पीछे हट रहे हैं

  • जरूरतमंद लोग जमीन बेच भी नहीं पा रहे

उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री लगभग ठप होने से सरकार को भी भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कांग्रेस सरकार के फैसलों की दिलाई याद

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय—

  • 5 डिसमिल से कम जमीन की रजिस्ट्री शुरू की गई

  • गाइडलाइन दरों में 30 प्रतिशत तक की छूट दी गई

इन्हीं फैसलों से प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर में जान आई और कोरोना जैसे संकट के समय भी छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही।

भाजपा के फैसले से बेरोजगारी और आर्थिक संकट

धनंजय सिंह ठाकुर ने चेतावनी दी कि मौजूदा सरकार के निर्णय से—

  • बेरोजगारी बढ़ेगी

  • रियल एस्टेट सेक्टर में भारी गिरावट आएगी

  • प्रदेश की अर्थव्यवस्था कमजोर होगी

उन्होंने सरकार से मांग की कि जमीन गाइडलाइन दर बढ़ोतरी के खिलाफ आई सभी दावा–आपत्तियों का तत्काल निराकरण किया जाए और बढ़ाई गई दरों को तुरंत वापस लिया जाए, अन्यथा कांग्रेस और जनता का आंदोलन और तेज होगा।

रायपुर ।
चौथी कक्षा की परीक्षा में कुत्ते के नाम से जुड़े प्रश्न के विकल्प में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम का नाम शामिल किए जाने को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने इस पूरे मामले को करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर सीधा प्रहार और सनातन विरोधी षड्यंत्र करार देते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि पहले महासमुंद और फिर गरियाबंद जिले में सामने आए इस मामले ने धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा का राम-द्रोही चेहरा उजागर कर दिया है। इतना संवेदनशील मामला होने के बावजूद न तो अब तक एफआईआर दर्ज की गई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई हुई है, जिससे साफ है कि सरकार दोषियों को संरक्षण दे रही है।

सुरेंद्र वर्मा ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि प्रश्नपत्र प्रिंटर ने अपनी मर्जी से छाप दिया, जबकि प्रश्नपत्र निर्माण की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है—शिक्षकों की समिति द्वारा प्रश्न तैयार किए जाते हैं, अनुमोदन के बाद ही छपाई होती है। इससे स्पष्ट है कि कमीशनखोरी के लालच में अनुभवहीन प्रिंटर को जिम्मेदारी सौंपी गई और पूरा शिक्षा विभाग वसूली गिरोह की तरह काम कर रहा है।

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राम रसोई’ की आड़ में सड़क पर कब्जा, सत्ता-संगठन-प्रशासन तीनों मौन !

उन्होंने मांग की कि इस अक्षम और धर्मद्रोही शिक्षा मंत्री को तत्काल बर्खास्त किया जाए तथा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पूरे प्रदेश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की जन्मभूमि और माता शबरी की तपोभूमि है, जहां प्रभु श्री राम को भांचा स्वरूप में पूजा जाता है। ऐसी पवित्र भूमि में बच्चों की परीक्षा में कुत्ते के नाम के प्रश्न के विकल्प में प्रभु श्री राम का नाम देना अत्यंत आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे भी ज्यादा गंभीर बात यह है कि सरकार का रवैया पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना बना हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है, तब-तब धर्म विरोधी कृत्य हुए हैं—रमन सरकार के कार्यकाल में मंदिरों को तोड़ा गया, एक कथावाचक द्वारा प्रभु श्री राम पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई और सरकार ने उसे संरक्षण दिया। वहीं, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में राम वन गमन पथ का विकास, धार्मिक आयोजन, गौ सेवा और गोठानों की व्यवस्था की गई, जिसे भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही बंद कर दिया।

सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि भाजपा गाय, गोबर और धर्म के नाम पर केवल राजनीतिक पाखंड करती है, रामकाज से उसका कोई वास्तविक सरोकार नहीं है। यह पूरा मामला भाजपा की कथनी और करनी के बीच के गहरे अंतर को उजागर करता है।

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