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भोजराज सिन्हा बोले—SIR समेत प्रमुख फैसलों पर तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति, संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना बंद करे विपक्ष
भिलाई / शौर्यपथ / चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस एवं विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बीच भिलाई जिला भाजपा अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा ने मंगलवार को संयुक्त पत्रकार वार्ता की। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग के हालिया संयुक्त बयान का हवाला देते हुए कांग्रेस के उन दावों पर सवाल उठाए, जिनमें आयोग के भीतर मतभेद होने की बात कही गई थी।
नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों डॉ. एस.एस. संधू एवं डॉ. विवेक जोशी के संयुक्त बयान से स्पष्ट हो गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) सहित प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला है।
सिन्हा ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग की चुनावी प्रक्रिया को लेकर देश और दुनिया में उसकी संस्थागत भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके अनुसार, चुनाव परिणामों के बाद कभी ईवीएम तो कभी चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाना विपक्ष की राजनीति का हिस्सा बन गया है।
अंग्रेजी अखबार में कैबिनेट सचिव को लिखे कथित पत्र के संबंध में सिन्हा ने कहा कि जिस पत्र का उल्लेख किया गया है, वह किसी नीतिगत विषय या SIR से संबंधित नहीं था, बल्कि सामान्य प्रशासनिक विषय से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग सीधे राष्ट्रपति के प्रति संवैधानिक रूप से जिम्मेदार है, इसलिए इसे किसी नीतिगत मामले से जोड़ना उचित नहीं है।
भोजराज सिन्हा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने बैठक के बाद संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी कर प्रमुख निर्णयों पर सर्वसम्मति की स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा SIR प्रक्रिया को लेकर दिए गए आदेश के बावजूद विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन ने भी पत्रकार वार्ता में चुनाव आयोग के संयुक्त बयान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद का केंद्र बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
दोनों नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस नेतृत्व को अपने लगाए गए आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
रिक्त पदों पर समयबद्ध भर्ती और बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की मांग
भिलाई / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या और विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पदों को लेकर आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का शिक्षित युवा डिग्री और हुनर लेकर रोजगार की तलाश में भटक रहा है, जबकि सरकारी विभागों में कर्मचारियों की आवश्यकता के बावजूद अनेक पद रिक्त हैं।
कुरैशी ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायत, नगरीय प्रशासन, महिला एवं बाल विकास, कृषि, वन, पुलिस, तकनीकी सहित अन्य विभागों में मानव संसाधन की जरूरत है। सरकार को विभागवार समीक्षा कर आवश्यक पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करनी चाहिए। उनके अनुसार, सरकारी कार्यालयों में पर्याप्त कर्मचारी नहीं होने से आम जनता के काम प्रभावित होते हैं, वहीं बेरोजगार युवाओं को नौकरी की तलाश में वर्षों इंतजार करना पड़ता है।
पूर्व राज्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर सहित दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों में रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में केवल स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी भवन होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षक, डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्यकर्मी, तकनीकी कर्मचारी और प्रशासनिक अमले की पर्याप्त उपलब्धता भी जरूरी है। उन्होंने योग्य स्थानीय युवाओं को इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर देने की बात कही।
कुरैशी ने कहा कि अनेक शिक्षित युवा केवल निर्धारित मेरिट सूची में स्थान नहीं बना पाने के कारण रोजगार से वंचित रह जाते हैं, जबकि उनके पास संबंधित क्षेत्र का कौशल, तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक दक्षता होती है। उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि जब प्रदेश को कर्मचारियों की जरूरत है और युवा रोजगार के लिए तैयार हैं, तो रिक्त पदों को भरने में देरी क्यों की जा रही है।
उन्होंने सरकार से रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने, बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने तथा योग्य और हुनरमंद युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
दुर्ग। चंडी मंदिर से गया नगर, रामनगर, उरला होते हुए राम मैरिज गार्डन तक लगभग 8 किलोमीटर लंबी जर्जर मुख्य सड़क के तत्काल नवनिर्माण एवं डामरीकरण की मांग को लेकर शहर जिला कांग्रेस कमेटी, दुर्ग द्वारा जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।
कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन में कहा कि सड़क की हालत लंबे समय से खराब है। जगह-जगह बड़े गड्ढे, सड़क का धंसाव और क्षतिग्रस्त हिस्से होने के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खराब सड़क के चलते दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी हुई है।
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई कि 7 दिनों के भीतर सड़क के नवनिर्माण का कार्य प्रारंभ किया जाए। निर्माण शुरू होने तक सड़क पर मौजूद गड्ढों एवं क्षतिग्रस्त हिस्सों की तत्काल मरम्मत कराने की भी मांग की गई है।
कांग्रेस ने कहा कि यह सड़क आसपास के कई प्रमुख इलाकों को जोड़ती है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इसका उपयोग करते हैं। ऐसे में सड़क का शीघ्र निर्माण जनसुविधा और सुरक्षित आवागमन की दृष्टि से आवश्यक है।
ज्ञापन सौंपने वाले कांग्रेस पदाधिकारियों ने कहा कि सड़क की समस्या के समाधान के लिए प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा है और जनहित से जुड़े इस मुद्दे को लेकर आवाज लगातार उठाई जाती रहेगी।
तीजा पर रिकेश सेन की पहल से उठे सवाल
दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के लोकपर्व तीजा के अवसर पर वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने 14 सितंबर को तीजा पर मायके गईं बहनों के भाइयों के लिए नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था कर एक अलग तरह की जनसेवा की पहल की है। इस व्यवस्था में केवल भोजन उपलब्ध कराने की बात नहीं, बल्कि तीजा की पारिवारिक परंपरा, भाई-बहन के रिश्ते और सामाजिक सरोकार को जोडऩे का प्रयास भी दिखाई देता है।
दिन के भोजन की व्यवस्था श्रीराम रसोई, नेहरू नगर, विधायक कार्यालय के सामने तथा राम रसोई, हनुमान मंदिर के पास सुपेला में की गई। वहीं रात्रि भोजन के लिए वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न रेस्टोरेंट में नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था की गई। इसके लिए श्वेतांबर जैन मंदिर के सामने, जीरो रोड, शांतिनगर स्थित विधायक रिकेश सेन के कार्यालय से कूपन वितरित किए गए। इच्छुक भाई कूपन प्राप्त कर निर्धारित रेस्टोरेंट में कूपन दिखाकर रात्रि भोजन का लाभ ले सकते हैं।
रिकेश सेन की इस पहल ने जहां क्षेत्र में चर्चा बटोरी है, वहीं अब इसका राजनीतिक असर पड़ोसी विधानसभा क्षेत्रों तक दिखाई देने लगा है। सवाल यह नहीं कि एक विधायक ने भोजन की व्यवस्था क्यों की, बल्कि सवाल यह भी है कि जब एक जनप्रतिनिधि अपने स्तर पर ऐसी पहल कर सकता है तो दूसरे जनप्रतिनिधियों से भी जनता इसी तरह की संवेदनशीलता की अपेक्षा क्यों न करे?
अब नजर दुर्ग विधानसभा पर
दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं विधायक गजेंद्र यादव के सामने भी अब एक स्वाभाविक राजनीतिक सवाल खड़ा हो गया है। दुर्ग शहर में राम रसोई जैसी व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं। ऐसे में क्या तीजा पर्व की तर्ज पर अथवा आगामी 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में भी जरूरतमंदों और आम नागरिकों के लिए नि:शुल्क भोजन की कोई विशेष व्यवस्था की जाएगी?
यह सवाल किसी विधायक की पहल को कमतर आंकने के लिए नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के बीच सेवा की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के रूप में भी देखा जा सकता है।
दुर्ग ग्रामीण और रिसाली पर भी टिकी नजर
इसी तरह दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश सरकार में दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री ललित चंद्राकर की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। खासकर इसलिए कि आने वाले समय में रिसाली नगर निगम चुनाव होने हैं और रिसाली क्षेत्र दुर्ग ग्रामीण विधानसभा का महत्वपूर्ण शहरी इलाका है।
ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र, विशेषकर रिसाली में भी किसी बड़े स्तर पर नि:शुल्क भोजन अथवा जनसेवा की पहल सामने आएगी?
रिकेश सेन की पहल ने बढ़ाई अपेक्षाएं
रिकेश सेन पिछले कुछ समय से अपने विधानसभा क्षेत्र में ऐसी पहलों को लेकर चर्चा में रहे हैं, जिन्हें उनके समर्थक जनसेवा का नया मॉडल बताते हैं। यही कारण है कि उनकी ताजा भोजन व्यवस्था को भी केवल एक दिन के आयोजन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे जनप्रतिनिधि की व्यक्तिगत सक्रियता और जनता से सीधे जुडऩे की राजनीति के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों की ओर से विधायक द्वारा किए जा रहे खर्च और इन व्यवस्थाओं के आर्थिक स्रोत को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। इन सवालों का उत्तर संबंधित आयोजकों द्वारा दिया जाना ही उचित होगा। बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या संस्था पर आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
सुविधा के साथ जवाबदेही भी जरूरी
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि द्वारा जनता को सुविधा देना निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है। लेकिन इसी के साथ एक दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है—क्या ऐसी सुविधाएं और जनसेवा की पहल सभी क्षेत्रों में जनता तक पहुंच रही हैं?
यदि एक विधायक अपने स्तर पर पर्व-त्योहार को जनसेवा से जोड़कर नई परंपरा शुरू करता है, तो दूसरे विधायकों के सामने भी जनता की अपेक्षाएं बढऩा स्वाभाविक है। यही लोकतांत्रिक जवाबदेही है।
अब निगाहें 17 सितंबर पर रहेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस और सेवा गतिविधियों के बीच क्या दुर्ग विधानसभा में मंत्री गजेंद्र यादव तथा दुर्ग ग्रामीण विधानसभा में ललित चंद्राकर भी इसी तरह नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था करेंगे? क्या वहां भी कूपन बांटे जाएंगे? या फिर इस मुद्दे पर मौन ही कायम रहेगा?
राजनीति में चर्चाओं का दौर लगातार चलता रहता है, लेकिन अंतत: जनता परिणाम देखती है। एक विधायक ने पहल करके सुविधा उपलब्ध कराई है, अब दूसरे जनप्रतिनिधियों की बारी है कि वे इस चुनौती को किस रूप में लेते हैं—सेवा की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, राजनीतिक संदेश या फिर मौन।
आगामी रिसाली नगर निगम चुनाव की पृष्ठभूमि में यह सवाल और भी दिलचस्प हो गया है कि जनसेवा की ऐसी पहल चुनावी राजनीति से कितनी अलग और कितनी जुड़ी हुई है। इसका जवाब आने वाला समय और जनता दोनों देंगे।
40 साल के वोरा प्रभाव से निकलकर संगठन खड़ा कर रही कांग्रेस, लेकिन पूर्व विधायक अरुण वोरा की अलग राह ने बढ़ाई चिंता; जनता के बीच नया चेहरा तलाशने की चर्चा तेज
दुर्ग।
दुर्ग विधानसभा की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल भाजपा से मुकाबले का कम और अपने भीतर की दिशा, नेतृत्व और प्रत्याशी चयन का अधिक नजर आ रहा है। लगभग चार दशक तक दुर्ग कांग्रेस की राजनीति पर वोरा परिवार का प्रभाव रहा। संगठन से लेकर चुनावी राजनीति तक एक समय ऐसा था जब कांग्रेस की अधिकांश राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र वोरा बंगला माना जाता था। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी लंबे समय तक रही कि जिसने वोरा परिवार से दूरी बनाई, उसकी दुर्ग की राजनीति भी धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई।
लेकिन समय बदल चुका है। कांग्रेस के भीतर अब पुराने राजनीतिक ढांचे से बाहर निकलकर संगठन को नए तरीके से खड़ा करने की कोशिश दिखाई दे रही है। यही बदलाव आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
संगठन बनाम व्यक्तिगत राजनीतिक सक्रियता
वर्तमान में दुर्ग शहर जिला कांग्रेस की कमान धीरज बाकलीवाल के हाथों में है। उनके नेतृत्व में कांग्रेस संगठन को सड़क पर उतारने, आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों के माध्यम से जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश लगातार दिखाई दे रही है। लंबे समय से जिस कांग्रेस कार्यालय को लेकर निष्क्रियता की चर्चा होती थी, वह अब कार्यकर्ताओं और आम जनता के लिए अधिक सक्रिय नजर आ रहा है।
कांग्रेस के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव केवल किसी एक नेता की लोकप्रियता से नहीं, बल्कि संगठन, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं, जनसंपर्क और सामूहिक नेतृत्व से लड़ा जाता है।
यहीं से पूर्व विधायक अरुण वोरा की राजनीतिक सक्रियता को लेकर कांग्रेस के भीतर और बाहर चर्चा शुरू होती है। राजनीतिक चर्चाओं में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पूर्व विधायक संगठन की सामूहिक रणनीति के साथ चल रहे हैं या अपनी राजनीतिक राह अलग बनाए हुए हैं।
विपक्षी दल के लिए यह स्थिति निश्चित रूप से राहत देने वाली हो सकती है, क्योंकि किसी भी चुनाव में यदि संगठन और संभावित प्रत्याशी के बीच तालमेल कमजोर दिखाई दे तो उसका सीधा असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
क्या राजनीति का केंद्र अब भी सिर्फ टिकट है?
दुर्ग की राजनीतिक चर्चा में सबसे ज्यादा जिस बात की चर्चा है, वह है आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट की दावेदारी।
राजनीतिक हलकों में यह धारणा तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है कि पूर्व विधायक अरुण वोरा एक बार फिर टिकट के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने की दिशा में सक्रिय हैं। आलोचकों का सवाल है कि यदि पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए सामूहिक रूप से आगे बढ़ रही है, तो संभावित प्रत्याशी को भी उसी संगठनात्मक अभियान का हिस्सा बनकर सामने आना चाहिए।
जनता के बीच चर्चा यह भी है कि केवल प्रेस विज्ञप्तियों, सोशल मीडिया पोस्ट और रीलों के माध्यम से राजनीतिक सक्रियता प्रदर्शित करने से वह जमीनी जुड़ाव पैदा नहीं हो सकता, जिसकी आवश्यकता चुनाव के समय होती है।
बेशक, किसी भी नेता को अपनी राजनीतिक दावेदारी रखने का पूरा अधिकार है। लेकिन सवाल यह है कि क्या व्यक्तिगत राजनीतिक दावेदारी संगठनात्मक एकता से बड़ी हो सकती है?
यही प्रश्न दुर्ग कांग्रेस के सामने आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण हो सकता है।
भाजपा को कमजोर कांग्रेस चाहिए या मजबूत कांग्रेस?
दुर्ग विधानसभा में वर्तमान विधायक गजेंद्र यादव हैं, जो प्रदेश सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री भी हैं। उनके खिलाफ क्षेत्र में राजनीतिक असंतोष या लोकप्रियता में कमी को लेकर चर्चाएं होने का दावा कांग्रेस समर्थक खेमों में किया जाता है। यदि वास्तव में भाजपा के वर्तमान विधायक के खिलाफ जनता के बीच नाराजगी का माहौल बनता है तो यह कांग्रेस के लिए अवसर हो सकता है।
लेकिन अवसर तभी चुनावी लाभ में बदलेगा जब कांग्रेस सही प्रत्याशी, मजबूत संगठन और एकजुट कार्यकर्ताओं के साथ मैदान में उतरे।
यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषकों और आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि कांग्रेस ने फिर से अरुण वोरा को मैदान में उतारा तो क्या पार्टी पिछली परिस्थितियों को बदल पाएगी?
दुर्ग की राजनीतिक चर्चा में एक वर्ग का मानना है कि लंबे समय तक विधायक रहने के बावजूद अब जनता नए चेहरे की तलाश कर रही है। वहीं वोरा समर्थक राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक पहचान को उनकी ताकत मानते हैं।
इस विरोधाभास का फैसला अंततः जनता ही करेगी।
चार दशक की विरासत बनाम बदलती राजनीतिक सोच
अरुण वोरा की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनका लंबा अनुभव और वोरा परिवार की दुर्ग कांग्रेस में रही मजबूत राजनीतिक पहचान है। लेकिन यही विरासत आज उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती भी बनती दिखाई दे रही है।
राजनीति में मतदाता हमेशा पुराने समीकरणों के आधार पर निर्णय नहीं लेता। नई पीढ़ी के मतदाता रोजगार, शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य, शहर के विकास, प्रशासनिक जवाबदेही और स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर अधिक सीधे सवाल पूछ रहे हैं।
ऐसे में केवल पुराना राजनीतिक प्रभाव किसी भी प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित नहीं कर सकता।
दुर्ग की जनता के बीच अब यह सवाल सुनाई देने लगा है कि क्या कांग्रेस इस बार पुराने चेहरे पर भरोसा करेगी या नए नेतृत्व को अवसर देकर भाजपा को वास्तविक चुनौती देगी?
"मैं नहीं तो कोई नहीं" की राजनीति कितनी कारगर?
राजनीतिक गलियारों में पूर्व विधायक को लेकर एक और चर्चा सुनाई देती है—क्या कांग्रेस की राजनीति में अभी भी व्यक्तिगत दावेदारी इतनी मजबूत है कि टिकट किसी एक चेहरे के इर्द-गिर्द केंद्रित हो जाए?
यदि ऐसी स्थिति बनती है और संगठन में मौजूद दूसरे नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को पर्याप्त भूमिका नहीं मिलती, तो चुनाव के समय सामूहिक ऊर्जा कमजोर पड़ सकती है।
इसके विपरीत यदि कांग्रेस नेतृत्व खुले मन से संभावित उम्मीदवारों का आकलन करता है, जमीनी पकड़, कार्यकर्ताओं के साथ संबंध, जनस्वीकार्यता और चुनाव जीतने की क्षमता को आधार बनाता है तो दुर्ग में मुकाबला निश्चित रूप से दिलचस्प हो सकता है।
धीरज बाकलीवाल के सामने भी बड़ी परीक्षा
दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के लिए भी आने वाला समय आसान नहीं है। संगठन को सक्रिय करना एक बात है, लेकिन उसे चुनाव तक एकजुट और अनुशासित रखना दूसरी बड़ी चुनौती होगी।
यदि संगठन सड़क पर संघर्ष करता है और कार्यकर्ता जनता के बीच सक्रिय रहते हैं, लेकिन टिकट वितरण के बाद संगठन में ही असंतोष पैदा हो जाता है, तो पिछले प्रयासों पर पानी फिर सकता है।
इसलिए कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं कि टिकट किसे मिलेगा, बल्कि यह है कि टिकट मिलने के बाद कितने लोग उस प्रत्याशी के साथ खड़े होंगे।
क्या कांग्रेस इतिहास दोहराएगी या नया अध्याय लिखेगी?
विधानसभा चुनाव अभी करीब दो वर्ष दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों की तैयारियां धीरे-धीरे शुरू हो जाती हैं। अगले वर्ष तक चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। ऐसे में कांग्रेस के पास पर्याप्त समय है कि वह दुर्ग विधानसभा की राजनीतिक परिस्थितियों का निष्पक्ष आकलन करे।
यदि पार्टी पुराने राजनीतिक समीकरणों को ही प्राथमिकता देती है तो भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है। वहीं यदि कांग्रेस संगठन की नई ऊर्जा को प्रत्याशी चयन के साथ जोड़ने में सफल रहती है तो दुर्ग में मुकाबला पूरी तरह बदल सकता है।
आज की सबसे बड़ी जरूरत किसी एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की जीत है। क्योंकि मजबूत संगठन के बिना मजबूत प्रत्याशी भी कमजोर पड़ सकता है और मजबूत संगठन के साथ अपेक्षाकृत नया चेहरा भी बड़ा राजनीतिक मुकाबला खड़ा कर सकता है।
फैसला अब कांग्रेस को करना है
दुर्ग की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर में एक तरफ वर्षों पुराना राजनीतिक अनुभव और स्थापित नेतृत्व है, तो दूसरी तरफ बदलती जनता की अपेक्षाएं और नए चेहरे की मांग की चर्चा है। एक तरफ संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ संभावित प्रत्याशी की अपनी राजनीतिक गतिविधियां और दावेदारी चर्चा में है।
इस पूरे राजनीतिक परिदृश्य पर यह लेख दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में आम नागरिकों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न वर्गों के लोगों से हुई चर्चाओं तथा सामने आ रही राजनीतिक धारणाओं के आधार पर तैयार किया गया है। यह किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में अंतिम निष्कर्ष नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और जनता के बीच चल रही चर्चाओं का विश्लेषण है।
अब देखना यही है कि कांग्रेस टिकट को प्राथमिकता देती है या संगठन को, पुराने समीकरणों पर भरोसा करती है या नए राजनीतिक चेहरे को मौका देती है और सबसे महत्वपूर्ण—क्या पार्टी व्यक्तिगत दावेदारियों से ऊपर उठकर सामूहिक चुनावी रणनीति तैयार कर पाती है?
क्योंकि यदि कांग्रेस के भीतर ही यह सवाल अनुत्तरित रह गया कि "कौन चुनाव लड़ेगा?" से पहले "कांग्रेस चुनाव कैसे जीतेगी?", तो दुर्ग विधानसभा में भाजपा के लिए राह आसान होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
NIA की जांच पर दंतेवाड़ा कांग्रेस ने उठाए सवाल, पूछा- गणपति और रमन्ना समेत 26 नाम चार्जशीट से क्यों हटाए गए? आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली नेताओं से पूछताछ क्यों नहीं हुई?
शौर्यपथ संवाददाता-कृष्णा मंडल
दंतेवाड़ा । झीरम घाटी हत्याकांड में एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा ने जांच और कार्रवाई की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने फैसले को “आधा-अधूरा न्याय” बताते हुए आरोप लगाया कि झीरम नरसंहार के पीछे कथित रूप से मौजूद बड़े नक्सली नेताओं और राजनीतिक षड्यंत्र का सच अब तक सामने नहीं आया है।
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शकील रिज़वी ने कहा कि कांग्रेस अदालत के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन अदालत के सामने एनआईए ने जो तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत किए, फैसला उन्हीं के आधार पर आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच शुरू से ही दिशाहीन रही और घटना के राजनीतिक षड्यंत्र से जुड़े पहलू की गंभीरता से जांच नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वारदात केवल छोटे स्तर के नक्सली कैडरों के भरोसे संभव नहीं थी। ऐसे में बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए थी।
गणपति और रमन्ना के नाम चार्जशीट से हटाने पर सवाल
कांग्रेस ने एनआईए की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि शुरुआती एफआईआर में जिन प्रमुख नक्सली नेताओं गणपति और रमन्ना के नाम शामिल थे, उनके नाम बाद की चार्जशीट से क्यों हटा दिए गए?
कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि एनआईए द्वारा वांछित और फरार घोषित किए गए कई नक्सली बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं, तो झीरम मामले में उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई? पार्टी ने मांग की कि आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली नेताओं से घटना के संबंध में पूछताछ कर उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
26 फरार आरोपियों के नाम हटने पर भी उठे सवाल
पीसीसी संयुक्त महामंत्री छविंद्र कर्मा ने कहा कि एनआईए की शुरुआती कार्रवाई और बाद में प्रस्तुत चार्जशीट के बीच कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब अब तक नहीं मिला है। उन्होंने सवाल किया कि गणपति और रमन्ना सहित 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद बाद की चार्जशीट से उनके नाम क्यों हटाए गए?
उन्होंने कहा कि झीरम मामले की जांच को केवल एक स्तर तक सीमित करने के बजाय घटना की पूरी साजिश और इसके पीछे शामिल लोगों की भूमिका सामने लाने की जरूरत है।
परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा और मार्ग बदलने पर भी सवाल
कांग्रेस नेताओं ने परिवर्तन यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई, यात्रा का मार्ग किसने और क्यों बदला, हमले की योजना किसने बनाई और सुरक्षा व्यवस्था में चूक कैसे हुई?
पार्टी ने आरोप लगाया कि हमले में घायल हुए और जीवित बचे प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को भी जांच में अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।
देवती कर्मा ने भाजपा पर साधा निशाना
पूर्व विधायक देवती महेंद्र कर्मा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की तत्कालीन सरकार से लेकर मौजूदा व्यवस्था तक झीरम के पूरे सच को सामने लाने में गंभीरता नहीं दिखाई गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच को भी आगे नहीं बढ़ाया गया।
देवती कर्मा ने आरोप लगाया कि बड़े नक्सली नेताओं को जांच के दायरे में नहीं लाया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
‘पूरा सच सामने आने तक जारी रहेगी न्याय की लड़ाई’
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि झीरम केवल एक नक्सली हमला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के इतिहास का ऐसा गहरा जख्म है, जिसका पूरा सच अब भी सामने आना बाकी है। पार्टी का कहना है कि जब तक हमले के वास्तविक षड्यंत्रकारियों, कथित राजनीतिक साजिश और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तमाम सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक कांग्रेस न्याय की लड़ाई जारी रखेगी।
पत्रकार वार्ता में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव तूलिका कर्मा, जिला पंचायत सदस्य सुलोचना कर्मा, जिला महामंत्री मनीष भट्टाचार्य, प्रवीण राणा, मनोज मालवीय, महिला कांग्रेस अध्यक्ष इंद्रा शर्मा, दंतेवाड़ा ब्लॉक कांग्रेस शहर अध्यक्ष सुमित्रा शोरी, जिला सचिव जितेंद्र कश्यप और मनोज कौरव सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
रायपुर । छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत दुर्ग संभाग के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों एवं जिला मास्टर ट्रेनरों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू हो गया है। प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू तथा सह प्रभारी सचिव एस. संपत और विजय जांगिड़ की मौजूदगी में हुआ।
कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
संगठन को बूथ और ब्लॉक स्तर तक मजबूत करने पर जोर
प्रशिक्षण शिविर के दौरान कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने, कार्यकर्ताओं की भूमिका को प्रभावी करने और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती के साथ उठाने सहित विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर मार्गदर्शन एवं विचार-विमर्श किया गया।
प्रशिक्षण में ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों को संगठन की कार्यप्रणाली, कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय और जनता से जुड़े मुद्दों को संगठन के माध्यम से प्रभावी ढंग से उठाने को लेकर जानकारी दी जा रही है।
पहले दिन इन वक्ताओं ने दिया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण शिविर के पहले दिन पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, प्रशिक्षण प्रभारी युगल पांडे तथा कनेक्ट सेंटर के को-चेयरमैन अशोक चतुर्वेदी ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया।
वक्ताओं ने संगठन को सक्रिय और मजबूत बनाने के लिए ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर विस्तार से मार्गदर्शन किया।
बस्तर के बाद अब अन्य संभागों की बारी
कांग्रेस की ओर से बताया गया कि इससे पहले बस्तर संभाग के ब्लॉक अध्यक्षों का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा हो चुका है। दुर्ग संभाग के प्रशिक्षण के बाद अगले चरण में बिलासपुर, सरगुजा और रायपुर संभाग के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे।
संगठन सृजन अभियान के तहत चलाए जा रहे इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रदेश में कांग्रेस संगठन को जिला, ब्लॉक और जमीनी स्तर तक अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाना है।
रायपुर/ / शौर्यपथ /
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में अवैध रेत की काली कमाई पर्यावरण और कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकट बन चुकी है। सामान्य तौर पर 15 जून से 15 अक्टूबर तक रेत उत्खनन में पूर्ण प्रतिबंध रहता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में रेत माफिया मानसून (बारिश) के दौरान भी नदी से खनन कर रहे हैं, नदियों में पनडुब्बी मशीने लगाकर रेत निकाला जा रहा है, रोक लगने से पहले भी भारी मात्रा में अवैध रेत निकालकर खेतों, गांवों और नदी के कैचमेंट एरिया के पास, सड़कों के किनारे और गोठानों की सरकारी जमीनों में बड़े-बड़े पहाड़ जैसे अवैध भंडारण (स्टॉक) खड़े कर दिए गए हैं ताकि बाद में उन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा सके। हालिया मामले रायपुर जिले के समोदा, कुरुद और करमंदी इलाकों में महानदी को बुरी तरह काटकर रेत के ऊंचे पहाड़ बना दिए गए हैं। बिलासपुर में अरपा और शिवनाथ नदी के पास, जशपुर की शंख नदी और बलौदाबाजार में भी बड़े पैमाने पर अवैध भंडारण पकड़ा गया है। दुर्ग में शिवनाथ, बिलासपुर में अरपा, मनियारी, गरियाबंद में पैरी और बस्तर में शबरी, शंखनी, डंकनी, नारंगी और इंद्रावती में भी यही हाल है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि रेत के अवैध करोबारियों को भाजपा सरकार का संरक्षण है, इन्हीं की मिलीभगत से छत्तीसगढ़ से अवैध रेत सीमावर्ती राज्यों में बड़े पैमाने पर खपाएं जा रहे हैं। झारखंड की अंतर्राज्यीय सीमा, यूपी, उड़ीसा, आंध्र, तेलंगाना और महाराष्ट्र तक रेत तस्कर सक्रिय हैं। ये तस्कर गिरोह संगठित रुप से नदी का सीना छलनी कर रेत का खनन कर रहे है। अवैध उत्खनन से लेकर उसके भंडारण और परिवहन तक को रोकने में यह सरकार नाकाम है। रेत माफियाओं का साम्राज्य फैलता जा रहा है, इनका खौफ इतना ज्यादा है कि इसके विरोध का साहस पंचायत प्रतिनिधित तक नहीं जुटा पा रहे हैं, राजनीतिक संरक्षण, मुनाफे में हिस्सेदारी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते ही रेत तस्कर बेलगाम हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि रेत का अवैध कारोबार अब गैंगवार, चाकूबाजी, गोलीबारी के खूनी खेल तक पहुंच गया है। रेत की काली कमाई में एकाधिकार के लिए ही विगत दिनों कोरिया जिले के एक भाजपा नेता के दूसरे भाजपा नेता और उनके साथियों को फॉर्चूनर गाड़ी में बंद करके जिंदा जला दिया। उससे पहले जांजगीर चांपा के जैजेपुर में घर घर में घुसकर दो भाइयों को गोली मार दी गई। रेत तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि खनिज विभाग के अधिकारीयों, पुलिस और प्रशासन को भी खुले तौर पर चुनौती दे रहे हैं। बलरामपुर में रेत माफियाओं ने पुलिस कांस्टेबल को ट्रैक्टर से कुचल कर मार दिया। गरीयाबंद और बलौदाबाजार में खनिज इंस्पेक्टर और माइनिंग अधिकारियों को पीटा गया, बस्तर से हो रहे रेत के अंतर्राज्यीय तस्करी पर खबर चलाने वाले चार पत्रकारों के गाड़ी में गांजा रखवाकर झूठे केस में फंसा दिया गया। कहीं किसी की हत्या हो रही है तो कहीं इनके गुर्गे खुलेआम धमका रहे हैं, बिना सत्ता के प्रश्रय के यह संभव नहीं है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार पर साधा निशाना, कहा—अपराध रोकने में पुलिस और सरकार नाकाम
रायपुर/शौर्यपथ। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और हत्या, बलात्कार, गोलीबारी, लूट, चाकूबाजी तथा गैंगवार की घटनाओं से आम जनता में भय का माहौल है।
बैज ने कहा कि राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में लगातार गंभीर आपराधिक घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने रायपुर में महिला की हत्या के बाद शव के साथ दुष्कर्म, महिला से गैंगरेप, राजनांदगांव के चिखली में घर में घुसकर हत्या, सक्ती में युवती को गोली मारने, जैजेपुर में दो भाइयों की हत्या तथा पेंड्रा-गौरेला क्षेत्र में सराफा कारोबारी की गोली मारकर हत्या जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार से कानून व्यवस्था पर जवाब मांगा।
“राजधानी की कमिश्नरी व्यवस्था भी विफल”
दीपक बैज ने कहा कि रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। राजधानी के गंज क्षेत्र में चाकूबाजी और हत्या, देवभोग में परिवार पर धारदार हथियार से हमला तथा अन्य घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अपराधियों में पुलिस का भय समाप्त होता दिखाई दे रहा है।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में प्रतिदिन 6 हत्या और 8 बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं। हालांकि ये आंकड़े कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा लगाए गए दावे हैं।
गोलीकांड और गैंगवार पर सरकार को घेरा
बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद प्रदेश में एक दर्जन से अधिक लोगों की गोली मारकर हत्या हो चुकी है। उन्होंने रायपुर सहित बिलासपुर, पेंड्रा-गौरेला, दुर्ग, मस्तूरी, जांजगीर-चांपा, जशपुर और कवर्धा में गोलीबारी की घटनाओं का हवाला दिया।
उन्होंने रायपुर के हीरापुर में बम हमले, बिरगांव में कथित बम निर्माण और तेलीबांधा-श्याम नगर क्षेत्र में गैंगवार का उल्लेख करते हुए कहा कि दिनदहाड़े चाकूबाजी, गोलीबारी और गैंगवार की घटनाएं चिंता का विषय हैं।
सोशल मीडिया पर हथियारों का प्रदर्शन भी चिंता का विषय
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बदमाश सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ रील बनाकर खुलेआम धमकियां दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इस प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाने में विफल रही है। बैज ने सरकार से अपराधियों पर कठोर कार्रवाई कर आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा बहाल करने की मांग की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पुलिस और प्रशासन का राजनीतिक उपयोग कर रही है तथा विपक्षी नेताओं को प्रताड़ित करने के बजाय अपराध नियंत्रण को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बैज ने कहा कि लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाएं गंभीर चेतावनी हैं। सरकार को कानून व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्वीकार कर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
