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"फिर टूट रही ठाकरे की शिवसेना! 9 में 6 सांसदों की बगावत से UBT पर अस्तित्व का संकट"

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कारण बताओ नोटिस, अयोग्यता की मांग और कार्यकर्ताओं को संभालने की कवायद; महा विकास अघाड़ी के सामने भी नई चुनौती

  राजनीतिक विश्लेषण
2022 में पार्टी का संगठन और चुनाव चिन्ह खोने के बाद उद्धव ठाकरे ने लोकसभा चुनावों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता साबित की थी।
अब यदि 9 में से 6 सांसद अलग राह चुनते हैं, तो यह केवल संख्या का नुकसान नहीं बल्कि नेतृत्व पर विश्वास के संकट का संकेत माना जाएगा।
संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत UBT गुट लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता की मांग कर रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय संसदीय प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्यों पर निर्भर करेगा।
महाराष्ट्र की राजनीति में इसका सीधा असर महा विकास अघाड़ी (MVA) की एकजुटता और भविष्य की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, यदि ये सांसद एनडीए के साथ जाते हैं तो महाराष्ट्र में भाजपा-शिंदे गठबंधन की राजनीतिक ताकत और बढ़ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल
उद्धव ठाकरे के सामने अब चुनौती केवल बागी सांसदों पर कार्रवाई की नहीं, बल्कि यह साबित करने की है कि चुनाव चिन्ह, संगठन और लगातार हो रही टूट-फूट के बावजूद उनकी पार्टी अभी भी महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रभावशाली शक्ति बनी हुई है।
तीखा राजनीतिक निष्कर्ष
"पहले धनुष-बाण गया, फिर संगठन का बड़ा हिस्सा गया, और अब यदि सांसद भी साथ छोड़ते हैं तो उद्धव ठाकरे के सामने लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व बचाने की होगी।

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