सड़क पर सत्ता से ज़्यादा नज़र आ रही है विपक्ष की चुप्पी, अब फैसला धीरज बाकलीवाल को करना होगा
दुर्ग। लोकतंत्र में एक मजबूत विपक्ष केवल सरकार की आलोचना करने के लिए नहीं होता, बल्कि जनता की आवाज़ बनकर सत्ता को जवाबदेह बनाने के लिए होता है। यदि विपक्ष ही अपनी भूमिका से पीछे हट जाए तो नुकसान केवल किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और आम जनता का होता है।
दुर्ग नगर निगम की वर्तमान परिस्थितियों को लेकर शहर में लगातार सवाल उठ रहे हैं। गंदगी, बदहाल व्यवस्थाएं, विकास कार्यों में कथित भेदभाव और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष के भीतर से भी समय-समय पर आवाजें उठती रही हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से उम्मीद नेता प्रतिपक्ष से होती है कि वे इन मुद्दों को निगम परिषद से लेकर सड़कों तक मजबूती से उठाएं। लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज होती जा रही है कि नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले इन मुद्दों पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पा रहे हैं।
कांग्रेस संगठन इन दिनों नए तेवर और नई कार्यशैली की बात कर रहा है। प्रदेश नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहा है कि संगठन में केवल पद धारण करने वाले नहीं, बल्कि मैदान में संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिलेगी। कई मंचों से यह भी कहा गया है कि जो लोग केवल पद के भरोसे राजनीति कर रहे हैं, उन्हें अब सक्रिय संघर्षशील कार्यकर्ताओं के लिए जगह छोड़नी चाहिए।
ऐसे में सवाल यह उठना स्वाभाविक है कि क्या यही कसौटी नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका पर भी लागू होगी?
जनता यह अपेक्षा करती है कि विपक्ष सत्ता के हर निर्णय की समीक्षा करे, जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाए और यदि कहीं अनियमितता हो तो उसके खिलाफ संघर्ष करे। यदि विपक्ष की सक्रियता केवल औपचारिक बैठकों या सीमित राजनीतिक गतिविधियों तक सिमट जाए तो लोकतंत्र का संतुलन प्रभावित होता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दुर्ग शहर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के सामने अब संगठनात्मक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण चुनौती है। यदि कांग्रेस को नगर निगम में प्रभावी विपक्ष के रूप में स्थापित करना है तो उसे ऐसा नेतृत्व देना होगा जो सड़कों पर संघर्ष करता दिखाई दे, जनता के बीच उपस्थित रहे और सत्ता पक्ष से वैचारिक दूरी बनाए रखते हुए जनहित के मुद्दों को मुखरता से उठाए।
यह किसी व्यक्ति विशेष के निजी जीवन या व्यक्तिगत संबंधों का विषय नहीं है। सार्वजनिक पद पर बैठे प्रत्येक जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन उसके सार्वजनिक कार्यों, सक्रियता और जनता के प्रति जवाबदेही के आधार पर होना स्वाभाविक है।
अब सबसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न यही है—क्या कांग्रेस संगठन नगर निगम में विपक्ष की भूमिका को और अधिक धार देने के लिए कोई बड़ा निर्णय लेगा, या फिर वर्तमान व्यवस्था को ही जारी रखेगा? इसका उत्तर आने वाले दिनों में संगठन की रणनीति और नेतृत्व के निर्णयों से स्पष्ट होगा।