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दक्षिण भारत में भाजपा की चुनौती बरकरार: 971 सीटों में सिर्फ 97 विधायक, केरल-तमिलनाडु में बेहद सीमित जनाधार

  • rounak group

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भले ही कई राज्यों में मजबूत स्थिति में हो, लेकिन दक्षिण भारत के कई प्रमुख राज्यों में पार्टी अभी भी व्यापक जनाधार बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। उपलब्ध विधानसभा आंकड़ों के अनुसार केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब और झारखंड की कुल 971 विधानसभा सीटों में भाजपा के पास केवल 97 विधायक हैं, जो कुल सीटों का लगभग 10 प्रतिशत है।

केरल और तमिलनाडु में भाजपा का सीमित प्रभाव

आंकड़ों के अनुसार केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के केवल 3 विधायक हैं, जबकि तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा की उपस्थिति मात्र 1 विधायक तक सीमित है। यह दर्शाता है कि इन राज्यों में पार्टी अभी भी क्षेत्रीय और पारंपरिक दलों के मजबूत प्रभाव को चुनौती नहीं दे पाई है।

कर्नाटक बना सबसे बड़ा आधार

दक्षिण भारत में भाजपा का सबसे मजबूत प्रदर्शन कर्नाटक में दिखाई देता है। 224 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 62 विधायक हैं। हालांकि पार्टी सत्ता से बाहर है, लेकिन विपक्ष के रूप में उसकी स्थिति मजबूत बनी हुई है।

आंध्र प्रदेश में भी सीमित प्रतिनिधित्व

175 सीटों वाली आंध्र प्रदेश विधानसभा में भाजपा के केवल 8 विधायक हैं। राज्य की राजनीति में क्षेत्रीय दलों का दबदबा होने के कारण भाजपा को अभी लंबा राजनीतिक सफर तय करना है।

झारखंड और पंजाब में भी चुनौती

झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 21 विधायक हैं, जबकि पंजाब की 117 सीटों में भाजपा के केवल 2 विधायक हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के प्रभाव के बीच भाजपा का संगठन विस्तार अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

राज्यवार स्थिति

राज्य

कुल विधानसभा सीटें    भाजपा विधायक  केरल

140    3

तमिलनाडु  234      1

कर्नाटक  224

62

आंध्र प्रदेश   175

8

पंजाब  117

2

झारखंड   81

21

कुल    971

97

राजनीतिक विश्लेषण

इन छह राज्यों के आंकड़े बताते हैं कि भाजपा का राष्ट्रीय विस्तार होने के बावजूद कुछ क्षेत्रों में उसे अभी भी मजबूत क्षेत्रीय दलों, स्थानीय मुद्दों और सामाजिक समीकरणों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से केरल, तमिलनाडु और पंजाब जैसे राज्यों में पार्टी का जनाधार सीमित है, जबकि कर्नाटक और झारखंड भाजपा के लिए अपेक्षाकृत मजबूत आधार बने हुए हैं।

 

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