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सदनों में व्यवधान लोकतंत्र के लिए खतरा, जनविश्वास बढ़ाना जनप्रतिनिधियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी : ओम बिरला

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CPA नॉर्थ ज़ोन सम्मेलन संपन्न, विकसित भारत-2047 के लिए चार अहम संकल्प पारित

जनभागीदारी, विधायकों के प्रशिक्षण, AI के उपयोग और विधायी निगरानी को मिलेगा बढ़ावा

चंडीगढ़/नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि संसद और विधानसभाओं में लगातार होने वाले व्यवधान लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए जनप्रतिनिधियों को अपने आचरण, संवाद और सार्थक बहस के माध्यम से जनता का विश्वास मजबूत करना होगा।

कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) इंडिया रीजन ज़ोन-II (नॉर्थ ज़ोन) के दो दिवसीय सम्मेलन के समापन अवसर पर श्री बिरला ने कहा कि जनता ने अपने प्रतिनिधियों को लोकतांत्रिक संस्थाओं में भेजा है, इसलिए उनके व्यवहार और कार्यशैली का सीधा प्रभाव समाज पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि "जैसा नेतृत्व होगा, वैसा ही समाज का स्वरूप भी विकसित होगा।"

उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य केवल मजबूत संसदीय और विधायी संस्थाओं के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने, विधायकों की क्षमता विकसित करने और संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।

राज्यों के विकास से ही बनेगा विकसित भारत

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत के संघीय ढांचे में राज्यों और केंद्र सरकार का समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्यों का समग्र विकास ही राष्ट्रीय विकास का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि नई चुनौतियों का समाधान नए विचारों और नवाचारों से ही संभव है तथा सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझाव इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

उन्होंने युवाओं और महिलाओं की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अधिक भागीदारी पर बल देते हुए कहा कि छात्र जीवन से ही संविधान, लोकतंत्र और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता विकसित की जानी चाहिए।

12 राज्यों के प्रतिनिधियों ने की भागीदारी

8-9 जून को चंडीगढ़ में आयोजित इस सम्मेलन में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली सहित 12 राज्यों की विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण तथा अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।

सम्मेलन में पारित हुए चार प्रमुख संकल्प

1. जन-जागरूकता और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा

आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों और विधायकों के बीच संवाद बढ़ाने तथा तकनीक के जिम्मेदार उपयोग के जरिए जागरूक और सशक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया गया।

2. विधायकों की क्षमता निर्माण

निरंतर प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, अनुसंधान सहयोग और श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं के आदान-प्रदान के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को अधिक सक्षम बनाने पर सहमति बनी।

3. विधायी निगरानी और जनविश्वास

नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में नागरिकों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास मजबूत करने पर जोर दिया गया।

4. AI और डिजिटल तकनीकों का विस्तार

सार्वजनिक सेवाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और सुलभ बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया।

मुख्य संदेश

चंडीगढ़ सम्मेलन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि विकसित भारत-2047 का मार्ग मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं, जनभागीदारी, तकनीकी नवाचार और जवाबदेह शासन से होकर गुजरता है। सम्मेलन में पारित चारों संकल्प आने वाले वर्षों में देश की संसदीय और विधायी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, आधुनिक और जनोन्मुख बनाने की दिशा तय करेंगे।

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