नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अप्रैल 2026 रिपोर्ट के अनुसार, नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP) के आधार पर भारत वर्तमान में दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर भारत ने अपना तीसरा स्थान बरकरार रखा है।
हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के कारण नॉमिनल जीडीपी रैंकिंग में भारत एक स्थान नीचे खिसक गया है, लेकिन देश की वास्तविक आर्थिक मजबूती और विकास दर पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आज भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
पिछले पांच वर्षों में भारत की वैश्विक जीडीपी रैंकिंग
2022: भारत ने ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का गौरव हासिल किया।
2023: तेज आर्थिक विकास दर के दम पर भारत 5वें स्थान पर कायम रहा।
2024: ब्रिटेन पर बढ़त बनाए रखते हुए भारत ने 5वां स्थान बरकरार रखा।
2025: मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक सुधारों के चलते भारत कुछ समय के लिए 4थे स्थान तक पहुंचा और जापान को पीछे छोड़ने में सफल रहा।
2026: विनिमय दरों में बदलाव के कारण भारत फिलहाल 6वें स्थान पर है, जबकि जापान और ब्रिटेन उससे आगे निकल गए हैं।
तेज विकास दर से दुनिया का ध्यान भारत पर
अर्थशास्त्रियों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत घरेलू बाजार, बढ़ता निवेश, डिजिटल क्रांति, विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार और आधारभूत संरचना पर हो रहा बड़ा निवेश है। यही कारण है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत लगातार विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान
IMF और विभिन्न वैश्विक आर्थिक संस्थानों के आकलन के अनुसार, यदि वर्तमान विकास दर और आर्थिक सुधारों की गति बनी रहती है तो वर्ष 2030 तक भारत 7.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। यह उपलब्धि भारत को अमेरिका और चीन के बाद वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगी।