नवा रायपुर में प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ, नगरीय विकास के लिए दो महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शहरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शहर केवल आवास और नागरिक सुविधाओं के केंद्र नहीं, बल्कि उद्योग, व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख आधार भी हैं। इसलिए छत्तीसगढ़ के शहरों का विकास वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित न रहकर आने वाले दशकों की जरूरतों के अनुरूप सुनियोजित, समावेशी और टिकाऊ होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह बात नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में आयोजित अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) एवं अर्बन इन्वेस्ट विंडो (यूआईविन) विषयक प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कही। कार्यशाला का आयोजन आवासन एवं शहरी विकास निगम (हुडको) तथा छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शहरी विकास को नई दिशा और गति मिली है। अर्बन चैलेंज फंड नगरीय निकायों के लिए आधुनिक, सुविधासंपन्न और आर्थिक रूप से सशक्त शहर विकसित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। निकायों को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाते हुए ऐसी गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार करनी चाहिए, जिनसे नागरिकों का जीवन बेहतर हो और शहरों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
नगरीय विकास के लिए दो महत्वपूर्ण समझौते
कार्यशाला के दौरान नगरीय विकास, वित्तीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा निकायों की तकनीकी एवं संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पहला समझौता हुडको और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बीच तथा दूसरा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और सेप्ट विश्वविद्यालय के बीच हुआ।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन समझौतों से नगरीय निकायों को विकास परियोजनाओं की योजना बनाने, वित्तीय संसाधन जुटाने, तकनीकी विशेषज्ञता हासिल करने और प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास में सहयोग मिलेगा। इससे शहरों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप परियोजनाएं तैयार करने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।
जलभराव और अव्यवस्थित तारों की समस्या का हो स्थायी समाधान
मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों को निर्देशित किया कि विकास योजनाएं केवल तात्कालिक समस्याओं को ध्यान में रखकर न बनाई जाएं, बल्कि अगले कई दशकों की जरूरतों को भी उनमें शामिल किया जाए। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पेयजल, सड़क, बिजली, जल निकासी, स्वच्छता और परिवहन जैसी सुविधाओं के लिए दीर्घकालिक योजना जरूरी है।
उन्होंने बारिश के दौरान शहरों में होने वाले जलभराव का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को हर साल होने वाली परेशानी का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। इसके लिए प्रभावी जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने बिजली और अन्य सेवाओं के अव्यवस्थित तारों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, वहां तारों को भूमिगत करने की योजनाएं तैयार की जाएं। साथ ही, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर पेयजल, सड़क, बिजली और स्वच्छता संबंधी कार्यों को समग्र शहरी नियोजन का हिस्सा बनाया जाए।
एक लाख करोड़ रुपये का अर्बन चैलेंज फंड बड़ा अवसर : अरुण साव
उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कहा कि भारत सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह छत्तीसगढ़ के शहरों के विकास के लिए बड़ा अवसर है। अब नगरीय निकायों के सामने चुनौती है कि वे कितनी गुणवत्तापूर्ण और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार कर इस फंड का अधिकतम लाभ प्राप्त कर पाते हैं।
उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक और नागरिकों की बढ़ती अपेक्षाओं के अनुरूप नगरीय विकास की कार्यशैली में बदलाव आवश्यक है। परियोजनाओं की सफलता केवल निर्माण तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनके संचालन, रखरखाव और वित्तीय व्यवहार्यता की योजना भी शुरुआत से तैयार होनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों को ऐसे कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिनका लाभ आने वाली पीढिय़ों को भी मिले।
आधुनिक तकनीक और नवाचार से मजबूत होंगे शहर
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी, स्वच्छ भारत मिशन और अमृत मिशन जैसी योजनाओं से नागरिक सुविधाओं का विस्तार हुआ है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण आवास, पेयजल, सड़क, परिवहन और स्वच्छता की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाएं नागरिकों के लिए उपयोगी होने के साथ आर्थिक रूप से व्यवहार्य भी होनी चाहिए। सरकारी सहायता के अतिरिक्त बैंक वित्तपोषण, बाजार आधारित संसाधनों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे विकल्पों का भी प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने अन्य शहरों में कचरे से ऊर्जा उत्पादन और तकनीक आधारित जल प्रबंधन जैसे नवाचारों का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ के निकायों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सफल प्रयोग अपनाने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला से मिलने वाला तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञों के सुझाव प्रदेश के नगरीय विकास को नई दिशा देंगे। शासन, जनप्रतिनिधियों, नगरीय निकायों और विशेषज्ञ संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ के शहरों को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित, सुविधासंपन्न और आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा।
कार्यशाला में प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों के महापौर, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, हुडको के सीएमडी संजय कुलश्रेष्ठ, सेप्ट विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट बरजोर मेहता सहित जनप्रतिनिधि, विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।