वार्ड 8 और 9 में नूजूल भूमि पर कथित कब्जों का मामला गरमाया, पाइपलाइन के लिए पहले हटाने और मुआवजा दिए जाने के दावों की जांच की मांग
कृष्णा मंडल दंतेवाड़ा / शौर्यपथ /
बचेली। नगर में नूजूल भूमि पर अतिक्रमण को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में एक ठेकेदार के कथित अतिक्रमण पर कार्रवाई के बाद स्थानीय लोग वार्ड क्रमांक 8 और 9 में पांच अन्य कथित कब्जों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाना प्रशासन की प्राथमिकता है, तो सभी शिकायतों पर समान रूप से कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित पांच स्थानों पर भी नूजूल भूमि पर कब्जे किए गए हैं, लेकिन अब तक कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में नगरपालिका और राजस्व प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
एक पर कार्रवाई, पांच अन्य मामलों में क्या हुई कार्रवाई?
ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित मामलों को लेकर अनुविभागीय अधिकारी से सवाल करने पर प्रकरण दर्ज होने की बात कही जाती है। हालांकि, उनका दावा है कि पांच कथित अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध अब तक कोई प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित भूमि का राजस्व रिकॉर्ड क्या है, शिकायतों की जांच हुई है या नहीं और यदि प्रकरण दर्ज किए गए हैं, तो उनमें अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
पाइपलाइन के लिए पहले हटाए गए थे कब्जे, मुआवजे का भी दावा
मामले में स्थानीय लोगों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एनएमडीसी की पाइपलाइन बिछाने के दौरान संबंधित पांच लोगों के कब्जे हटाए गए थे और उस समय मुआवजा भी दिया गया था। इसके बावजूद अब उसी भूमि पर दोबारा कब्जा किए जाने का आरोप है।
यदि ये दावे सही पाए जाते हैं, तो यह जांच जरूरी है कि पहले हटाए गए कब्जे दोबारा कैसे स्थापित हुए, मुआवजा किन परिस्थितियों में दिया गया था और दोबारा कब्जे की जानकारी मिलने पर संबंधित विभागों ने क्या कदम उठाए।
नगरपालिका सीएमओ और एसडीएम की भूमिका पर सवाल
नूजूल भूमि की स्थिति, अतिक्रमण की शिकायतों और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर नगरपालिका सीएमओ तथा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि वार्ड 8 और 9 में चिह्नित पांचों कथित कब्जों की जांच की गई है या नहीं। यदि जांच लंबित है, तो उसके कारण और कार्रवाई की समयसीमा भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
फिलहाल, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। भूमि अभिलेखों, पूर्व कार्रवाई के दस्तावेजों और मुआवजे से संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सभी कब्जों पर समान कार्रवाई की मांग
बचेली में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि सरकारी भूमि से जुड़े सभी मामलों की नियमानुसार जांच हो। यदि अन्य स्थानों पर भी अवैध कब्जे पाए जाते हैं, तो उन पर भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन वार्ड 8 और 9 के पांचों कथित अतिक्रमणों की जांच कर कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करेगा, या इन मामलों में लोगों को जवाब का इंतजार करना पड़ेगा? नगरवासियों की नजर अब नगरपालिका और राजस्व प्रशासन के अगले कदम पर है।