भिलाई। शौर्यपथ
भिलाई नगर पालिक निगम द्वारा वार्ड क्रमांक 06, संजय नगर स्थित लगभग 14,950 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले खेल मैदान की प्रस्तावित नीलामी को लेकर शहर में तीव्र राजनीतिक और सामाजिक विरोध शुरू हो गया है। करीब 200 करोड़ रुपये मूल्य की इस भूमि के लिए निगम द्वारा 1 करोड़ 97 लाख 34 हजार रुपये का बेस प्राइस तय कर निविदा आमंत्रित किए जाने की सूचना सामने आते ही सवालों की बाढ़ आ गई है।
इस मामले में नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा 'भोजुÓ ने छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग को औपचारिक शिकायत भेजकर नीलामी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह खेल मैदान क्षेत्र के सैकड़ों बच्चों के लिए खेल, स्वास्थ्य और शारीरिक विकास का एकमात्र प्रमुख केंद्र है। यदि इसे नीलाम किया गया, तो बच्चों के मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार होगा।
बाल अधिकारों के खिलाफ बताया गया फैसला
शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि खेल मैदान बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। इस मैदान में नियमित खेल गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यक्रम, मीना बाजार और विभिन्न सार्वजनिक आयोजन होते रहे हैं। ऐसे में इसे बेचने का निर्णय बाल अधिकार संरक्षण की भावना के विपरीत बताया गया है।
सभी दलों के पार्षद होंगे एकजुट
मामले को लेकर नगर निगम के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, विभिन्न दलों के पार्षद मिलकर "संपत्ति बचाओ संघर्ष समिति" के गठन की तैयारी में हैं। यह समिति कलेक्टर से भी हस्तक्षेप की मांग करेगी और नीलामी प्रक्रिया को रोकने के लिए संयुक्त आंदोलन की रणनीति बनाएगी।
विरोध करने वाले पार्षदों और नागरिकों का सवाल है कि जब यह भूमि नगर निगम की धरोहर और भविष्य की संपत्ति मानी जाती है, तो फिर किसकी अनुमति से इसे बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
'कॉम्प्लेक्स बना तो हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा मैदानÓ
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इस भूमि पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स या अन्य निर्माण हुआ, तो शहर का यह प्रमुख खेल मैदान हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। इससे न केवल बच्चों बल्कि आम नागरिकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। पूर्व में भी इस जमीन को बचाने के लिए शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
अब निगाहें आयोग और प्रशासन पर
फिलहाल पूरा मामला छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग के संज्ञान पर टिका हुआ है। यदि आयोग हस्तक्षेप करता है, तो नीलामी प्रक्रिया पर रोक संभव है। वहीं पार्षदों की संभावित एकजुटता इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक रूप दे सकती है।
शहर में इस समय एक ही सवाल गूंज रहा है—
क्या बच्चों का खेल मैदान बिकेगा, या जनता के दबाव में फैसला बदलेगा?