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पटाखा दुकानों का ड्रॉ तो निकला, अब अवैध दुकानों पर कार्रवाई की अग्निपरीक्षा! -

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ओम ज्वैलर्स के अतिक्रमण और बस स्टैंड पर चतुर्भुज राठी के कब्जे को लेकर उठे सवालों के बीच महापौर अलका बाघमार की निष्पक्षता पर रहेगी नजर; समृद्धि बाजार और इंदिरा मार्केट में कार्रवाई से तय होगी निगम की सक्रियता

दुर्ग। दीपावली 2026 के मद्देनजर दुर्ग नगर निगम की महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने जिला शिक्षा कार्यालय के पास स्थित मैदान में लगने वाली अस्थायी पटाखा दुकानों के आवंटन के लिए ड्रॉ प्रक्रिया संपन्न कराई। निगम की प्रेस विज्ञप्ति में बाजार को व्यवस्थित रखने की बात कही गई। इस प्रक्रिया में बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा भी शामिल रहे। अब सवाल यह है कि क्या यह व्यवस्था केवल निर्धारित मैदान तक सीमित रहेगी या शहर के अन्य क्षेत्रों में बिना आवश्यक अनुमति लगने वाली पटाखा दुकानों पर भी इसी तरह सख्ती दिखाई जाएगी?

ड्रॉ के बाद असली परीक्षा बाजार विभाग की

पटाखा दुकानों के लिए 50 दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया के बाद समृद्धि बाजार, इंदिरा मार्केट और अन्य क्षेत्रों में बाजार विभाग की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है। समृद्धि बाजार में दीपावली के दौरान चार-पांच दिनों के लिए अस्थायी पटाखा दुकानें लगने की बात सामने आती रही है। ऐसे में निगम को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन दुकानों के लिए क्या अनुमति ली जाती है और निर्धारित स्थल के बाहर दुकानें संचालित होने पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की भूमिका भी इसी कसौटी पर परखी जाएगी। शिकायतों पर नोटिस जारी करना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन उनका प्रभावी निराकरण और नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। इस बार निगम की सक्रियता का आकलन वास्तविक निरीक्षण, कार्रवाई और बाजार में दिखाई देने वाले परिणामों से होगा।

ओम ज्वैलर्स और चतुर्भुज राठी के मामले भी चर्चा में

शहर की बाजार व्यवस्था में निष्पक्षता का सवाल उठता है, तो ओम ज्वैलर्स से जुड़े अतिक्रमण संबंधी मामले और बस स्टैंड क्षेत्र में चतुर्भुज राठी से संबंधित कब्जे का मुद्दा भी प्रासंगिक हो जाता है। इन मामलों में संबंधित दस्तावेजों, स्वीकृतियों और निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।

ओम ज्वैलर्स के संबंध में अतिक्रमण की शिकायतों तथा चतुर्भुज राठी के मामले में समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी कब्जा बने रहने के आरोपों को लेकर निगम की कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित पक्ष कोई भी हो, नियमानुसार कार्रवाई की अपेक्षा स्वाभाविक है।

इन मामलों के संदर्भ में महापौर अलका बाघमार और संबंधित पक्षों के बीच सार्वजनिक कार्यक्रमों में मंच साझा करने अथवा बैठकें होने को अपने आप में किसी अनुचित संरक्षण का प्रमाण नहीं माना जा सकता। हालांकि, नागरिकों के मन में उठने वाले सवालों का समाधान तभी होगा, जब निगम संबंधित मामलों में की गई कार्रवाई, उपलब्ध अनुमतियों और नियमों की स्थिति स्पष्ट करेगा। जनता के लिए महत्वपूर्ण यह है कि कार्रवाई का आधार व्यक्ति की पहचान या प्रभाव नहीं, बल्कि नियम और उपलब्ध तथ्य हों।

महापौर की कार्यशैली पर उठते सवालों का जवाब कार्रवाई से

महापौर अलका बाघमार के नेतृत्व में निगम प्रशासन के सामने बाजार व्यवस्था सुधारने का अवसर है। ठेला व्यवसायियों के साथ व्यवहार, इंदिरा मार्केट में अतिक्रमण संबंधी शिकायतों और सार्वजनिक स्थलों के उपयोग को लेकर उठने वाले सवालों पर समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।

यदि छोटे व्यवसायियों को नियमों का हवाला देकर हटाया जाता है, तो बड़े प्रतिष्ठानों और प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में भी वही नियम लागू होते दिखाई देने चाहिए। यही वह बिंदु है, जहां निगम की निष्पक्षता और प्रशासनिक जवाबदेही का आकलन होगा। किसी मामले में कार्रवाई हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के जवाब से की जानी चाहिए।

बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की कार्यप्रणाली पर पहले उठे सवालों के बीच महापौर की जिम्मेदारी केवल व्यवस्था संबंधी निर्देश देने तक सीमित नहीं है। शिकायतों की समीक्षा, कार्रवाई की निगरानी और लंबित मामलों की स्थिति स्पष्ट कराने से ही प्रशासनिक व्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा।

शौर्यपथ समाचार रखेगा निगरानी

दीपावली तक शौर्यपथ समाचार निर्धारित मैदान के अलावा समृद्धि बाजार, इंदिरा मार्केट और अन्य क्षेत्रों में लगने वाली पटाखा दुकानों की स्थिति पर नजर रखेगा। उपलब्ध तस्वीरों और तथ्यों को महापौर अलका बाघमार, सभापति श्याम शर्मा, निगम आयुक्त लीना कोसाम तथा बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा के संज्ञान में लाकर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जाएगी।

साथ ही, ओम ज्वैलर्स और चतुर्भुज राठी से संबंधित मामलों में निगम की कार्रवाई तथा आधिकारिक स्थिति की जानकारी भी मांगी जाएगी, ताकि तथ्यों के आधार पर स्थिति पाठकों के सामने रखी जा सके।

पटाखा दुकानों का ड्रॉ व्यवस्था की शुरुआत है, उसकी सफलता का प्रमाण नहीं। असली परीक्षा तब होगी, जब निर्धारित स्थल के बाहर लगने वाली दुकानों, अतिक्रमण संबंधी शिकायतों और सार्वजनिक स्थलों पर कब्जे के मामलों में बिना भेदभाव नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। दुर्ग की जनता को घोषणाओं से अधिक ऐसी कार्रवाई की अपेक्षा है, जिसके परिणाम जमीन पर दिखाई दें।

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