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घोषणाओं का अम्बार, लेकिन ज़मीन पर काम का अकाल - यही है छत्तीसगढ़ का बजट 2026! - टी एस सिंहदेव

  • devendra yadav birth day

रायपुर। शौर्यपथ। 

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज प्रस्तुत किया गया राज्य का वित्तीय बजट “डबल इंजन सरकार” की हकीकत दिखाता है, जो राज्य को आगे नहीं ले जा रही, बल्कि पीछे की ओर खींच रही है।

इस बजट में कुल बढ़ोतरी मात्र ₹7,000 करोड़ की है - जिसमें रोज़गार सृजन के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए कोई स्पष्ट योजना नहीं, और राजस्व सृजन का कोई प्रभावी माध्यम नहीं है।

राज्य के संविदा कर्मचारियों को पिछले 3-3 महीनों से वेतन नहीं मिला है। पिछले वित्तीय वर्ष में जिन कार्यों को स्वीकृति मिली थी, वे या तो अब तक शुरू ही नहीं हो पाए हैं या फिर अधूरे पड़े हैं। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल का कार्य,और राजधानी के मेकाहारा अस्पताल में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल व कैंसर यूनिट आज भी लंबित हैं।

राजस्व सृजन का हाल यह है कि राज्य सरकार महात्मा गांधी के शहीद दिवस और होली जैसे पावन पर्वों के दिन भी शराब की दुकानें खोलकर व्यापार चला रही है, क्योंकि इस सरकार के पास वही एक राजस्व का साधन रह गया है।

जब UPA सरकार की मनरेगा योजना प्रभावी थी, तब पिछली बार इसके लिए लगभग ₹4,000 करोड़ का आवंटन था, जिसमें से राज्य सरकार ने सिर्फ़ ₹400 करोड़ ही खर्च किए - बाक़ी बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार से आया।

अब “VB GRAM G” जैसी योजना के नाम पर राज्य सरकार से ₹1,600 करोड़ खर्च करने की उम्मीद की जा रही है। बजट देखकर साफ़ पता चलता है कि राज्य सरकार इतना खर्च करने में सक्षम नहीं है।

इसका सीधा असर ग्रामीण छत्तीसगढ़ में रोज़गार के अवसरों में कमी और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की रफ़्तार पर पड़ेगा।

विकास की गाड़ी रिवर्स में डाल दी गई है और प्रदेश को आर्थिक व मौलिक पतन की ओर धकेला जा रहा है।

केंद्र और राज्य की सरकारें मिलकर छत्तीसगढ़ की जनता को सिर्फ़ झूठे वादों में उलझाने का काम कर रही हैं।

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शौर्यपथ

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