August 03, 2026
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    हजारों बहनों ने बांधी राखी, विधायक बोले   'भिलाई मेरा परिवार है, यही मेरा सबसे बड़ा धन हैÓ

       भिलाई / शौर्यपथ / रक्षाबंधन के अवसर पर भिलाई नगर विधायक ने एक बार फिर अपने अनोखे और भावनात्मक आयोजन से लोगों के दिल जीत लिए। सेक्टर-5 स्थित एक विशाल पंडाल में भव्य रक्षाबंधन पर्व का आयोजन किया गया, जहां पूरे विधानसभा क्षेत्र से हजारों महिलाएं और युवतियां विधायक को राखी बांधने के लिए उमड़ीं।
      यह आयोजन हर साल की तरह इस वर्ष भी विधायक द्वारा स्वयं के स्तर पर आयोजित किया गया था, जिसमें राखी बांधने के साथ-साथ महिलाओं के लिए विशेष भोजन, मनोरंजन, गीत-संगीत, और छत्तीसगढ़ी सुआ नृत्य की भी आकर्षक प्रस्तुति हुई।

    विधायक के हाथों में बंधीं हजारों राखियाँ
       विधायक का पूरा हाथ राखियों से भर गया था। बहनों के स्नेह और आशीर्वाद से अभिभूत विधायक ने भावुक होते हुए कहा –पूरा भिलाई मेरा परिवार है। यह रक्षाबंधन सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि हमारे विश्वास और प्रेम का प्रतीक है। यह परंपरा सालों से चल रही है, और इसे मैं हर साल अपनी बहनों के साथ मनाता हूं।

    जेल में भी नहीं टूटा बहनों का रिश्ता
    विधायक ने याद करते हुए कहा -
      "पिछले साल जब मैं जेल में था, तब भी मेरी बहनें राखी लेकर वहां पहुंचीं थीं। यह सिर्फ धागा नहीं, बल्कि प्यार, विश्वास और आशीर्वाद का प्रतीक है। यही मेरा सबसे बड़ा धन है।"

    बहनों ने दी लंबी उम्र की कामना
      राखी बांधने पहुंची महिलाओं ने विधायक को तिलक कर रक्षा सूत्र बांधा और उनकी लंबी उम्र, सफलता और स्वस्थ जीवन की कामना की। कई बहनों ने कहा कि विधायक से उनका रिश्ता सिर्फ एक जनप्रतिनिधि का नहीं, बल्कि भाई जैसा है, जो हर समय उनके साथ खड़ा रहता है।

    आयोजन स्थल पर उमड़ी भारी भीड़
      रक्षाबंधन पर्व के इस आयोजन में सुबह से ही महिलाओं की भीड़ लगने लगी थी। आयोजन समिति द्वारा पंडाल में बैठने, खाने और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की गई थी। छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य और गीत-संगीत ने माहौल को और भी उल्लासमय बना दिया।

    शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट

       "अगर केंद्र, राज्य और नगर निगम में एक ही पार्टी की सरकार होगी, तो विकास दौड़ेगा!"
        यह था भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पांडे का वादा, जब उन्होंने दुर्ग की जनता से "ट्रिपल इंजन" का समर्थन मांगा था।
       लेकिन आज, जब ट्रिपल इंजन से चलने वाला दुर्ग शहर गड्ढों, गंदगी और गुटबाजी के दलदल में फंसा है, जनता खुद सवाल पूछ रही है - "वादा किया था रोशनी का, फिर क्यों पसरा है अंधेरा?"

     जब सरोज पांडे थीं महापौर: दुर्ग बना था विकास का पर्याय
       महापौर रहते सुश्री सरोज पांडे ने दुर्ग नगर निगम को विकास की दिशा में एक नई पहचान दी थी।चौड़ी सड़कें,सुव्यवस्थित बाजार,सुंदर उद्यान,और सफाई व्यवस्था -
    उस दौर में दुर्ग को "छोटा स्मार्ट सिटी" कहने लगे थे लोग।
      आज उसी शहर में, जहां उन्होंने विकास की नींव रखी, वहीं अब बदहाल व्यवस्थाएं और टूटी उम्मीदें एक कटु सच्चाई बन चुकी हैं।
     आज का दुगर्: नालियां जाम, सड़कों पर जान का खतरा ,अतिक्रमण से जकड़े बाजार ,आवारा पशुओं से भरा शहर ,अधूरी सड़कें , और राजेंद्र चौक जैसे व्यावसायिक हब पर सरकारी सुस्ती ,नगर निगम की 6 महीने की सत्ता और राज्य सरकार के 20 महीनों के कार्यकाल में सुधार की बजाय गिरावट ही सामने आई है।
     नालियों की सफाई अब भी "प्रक्रिया में" है, पार्कों की घास सूख रही है, और जनता धूल, दुर्गंध और दुश्वारियों के बीच जूझ रही है।
     गुटबाजी का गड्ढा: महापौर बनाम विधायक
      शहर के दो जिम्मेदार चेहरे - महापौर और स्थानीय विधायक – आमने-सामने हैं। कोई काम अगर हो भी गया, तो उसका श्रेय लेने की राजनीतिक होड़ जारी है। सामंजस्य और टीमवर्क जैसे शब्द शहरी प्रशासन की डिक्शनरी से नदारद हो चुके हैं। विपक्ष को परिषद में बोलने तक का मौका नहीं देना लोकतांत्रिक मर्यादा का खुला उल्लंघन है।

     गरीबों पर सख्ती, रसूखदारों को संरक्षण
      इंदिरा मार्केट हो या कपड़ा लाइन - जहां आम ठेलेवालों को हटाया जा रहा है, वहीं बड़े दुकानदारों द्वारा बरामदे पर कब्जा बरकरार है।
    भाजपा नेता के संरक्षण में राम रसोई को गलत दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों की भूमि का आवंटन भी अब चर्चा में है, लेकिन कार्रवाई शून्य।

     जनता पूछ रही - "अब किससे लें जवाब?"
      क्या जवाब दें वो भाजपा संगठन जो विपक्ष में रहकर हर गड्ढे पर धरना देता था? या वो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे, जिन्होंने वादा किया था कि "ट्रिपल इंजन" से दुर्ग दौड़ेगा?"
    अब जब वही इंजन धुएं में उलझ गया है, तो जनता सिर्फ इंतज़ार में है कि -"कोई आए, और इन सवालों का ईमानदारी से जवाब दे!"

     आईना देखिए, पोस्टर नहीं
      यह सिर्फ बदहाल दुर्ग की रिपोर्ट नहीं, बल्कि उन तमाम वादों का आइना है, जो वोट से पहले बड़े-बड़े मंचों पर बोले गए थे।
    महापौर रहते सरोज पांडे का विकास मॉडल आज खुद सवाल कर रहा है - "क्या भाजपा की आज की नगर सरकार उस स्तर को भी छू पाई?"
    अब जनता तय करेगी -बातों के ट्रिपल इंजन से शहर नहीं चलता, ज़मीन पर पसीने से काम करना होता है।

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